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केजीएमयू में है हेपेटाइटिस जांच के लिए सर्वोच्‍च स्‍तर की लैब

एनएचएम से स्‍थापित देश के 10 केंद्रों में एक है यहां की लैब

लखनऊ। केजीएमयू के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने कहा है कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हेपिटाइटिस की जांच की सर्वोच्च स्तर की लैब है। उन्‍होंने कहा कि देश में नेशनल हेल्थ मिशन के तहत ऐसे केवल 10 केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से केजीएमयू एक है।

कुलपति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के 13 जिलों के प्रतिभागियों द्वारा यहां प्रशिक्षण प्राप्त किया जा रहा है, यहां से प्रशिक्षण लेकर ये अपने जिलों में लोगों को इससे लाभान्वित कर सकेंगे। इसके साथ ही इन जिलों में जांच का कार्य तत्काल शुरू किया जा सकेगा।

कुलपति प्रो. एम.एल.बी. भटट् ने मंगलवार को संस्थान के कलाम सेंटर में माइक्रोबायोलॉजी, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग एवं राज्य हेल्थ मिशन के संयुक्त तत्वावधान में हेपिटाइटिस के सही इलाज एवं निदान के लिए एक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुभारम्भ किया। इसमें प्रदेश के 13 जिलों से आए टेक्नीशियन एवं चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर एन.एच.एम. की एडिशनल डायरेक्टर श्रुति ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. अमिता जैन ने बताया कि केजीएमयू का माइक्रोबायोलॉजी विभाग हेपिटाइटिस की जांच का उत्तर प्रदेश में सर्वोच्च स्तर का केंद्र निर्धारित किया गया है तथा इसी क्रम में वह और उनकी टीम 13 जिलों के टेक्नीशियन एवं चिकित्सकों को पांच दिन का प्रशिक्षण दे रही हैं। इस कार्यक्रम में गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा ने कहा कि हर साल 34 मिलियन लोग हेपिटाइटिस का शिकार होकर मौत के मुंह में समा जाते हैं। गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को विश्व हेपिटाइटिस दिवस मनाया जाता है। पिछले वर्ष इसी दिन राष्ट्रीय वायरल हेपिटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। इस कार्यक्रम में हर प्रकार के वैरायटी की जांच व उपचार को समायोजित करता है तथा यह कार्यक्रम विभिन्न स्तर पर बनाया गया है।

इस दौरान माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. सुरुचि शुक्ला, डॉ. पारुल जैन, डॉ. आर.के.कल्याण, डॉ. शीतल वर्मा, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के चिकित्सक एवं वाइरोलॉजी लैब के कर्मचारी उपस्थित रहे।