Wednesday , October 20 2021

रिश्तों की कीमत

जीवन जीने की कला सिखाती कहानी – 5   

प्रेरणादायक प्रसंग/कहानियों का इतिहास बहुत पुराना है, अच्‍छे विचारों को जेहन में गहरे से उतारने की कला के रूप में इन कहानियों की बड़ी भूमिका है। बचपन में दादा-दादी व अन्‍य बुजुर्ग बच्‍चों को कहानी-कहानी में ही जीवन जीने का ऐसा सलीका बता देते थे, जो बड़े होने पर भी आपको प्रेरणा देता रहता है। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय (केजीएमयू) के वृद्धावस्था मानसिक स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ भूपेन्‍द्र सिंह के माध्‍यम से ‘सेहत टाइम्‍स’ अपने पाठकों तक मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य में सहायक ऐसे प्रसंग/कहानियां पहुंचाने का प्रयास कर रहा है…

प्रस्‍तुत है पांचवीं कहानी- रिश्तों की कीमत

डॉ भूपेंद्र सिंह
डॉ भूपेन्‍द्र सिंह

एक शाम मां ने दिनभर की लम्बी थकान एवं काम के बाद जब डि‍नर बनाया तो उन्होंने पापा के सामने एक प्लेट सब्जी और एक जली हुई रोटी परोसी। मुझे लग रहा था कि इस जली हुई रोटी पर कोई कुछ कहेगा, परन्तु पापा ने उस रोटी को आराम से खा लिया परन्तु मैंने मां को पापा से उस जली रोटी के लिए “सॉरी” बोलते हुए जरूर सुना था, और मैं ये कभी नहीं भूल सकता जो पापा ने कहा “प्रिये, मुझे जली हुई कड़क रोटी बेहद पसंद है।”

देर रात को मैंने पापा से पूछा, क्या उन्हें सचमुच जली रोटी पसंद है?

उन्होंने मुझे अपनी बाहों में लेते हुए कहा – तुम्हारी मां ने आज दिनभर ढेर सारा काम किया और वो सचमुच बहुत थकी हुई थी। और…वैसे भी…एक जली रोटी किसी को ठेस नहीं पहुंचाती परन्तु कठोर-कटु शब्द जरूर पहुंचाते हैं।

तुम्हें पता है बेटा – जिंदगी भरी पड़ी है अपूर्ण चीजों से…अपूर्ण लोगों से… कमियों से…दोषों से…मैं स्वयं सर्वश्रेष्ठ नहीं, साधारण हूं और शायद ही किसी काम में ठीक हूं।

मैंने इतने सालों में सीखा है कि-

“एक दूसरे की गलतियों को स्वीकार करो…अनदेखी करो… और चुनो… पसंद करो…आपसी संबंधों को सेलिब्रेट करना।”

मित्रों, जिदंगी बहुत छोटी है…उसे हर सुबह दु:ख…पछतावे…खेद के साथ जागते हुए बर्बाद न करें। जो लोग तुमसे अच्छा व्यवहार करते हैं, उन्हें प्यार करो ओर जो नहीं करते उनके लिए दया सहानुभूति रखो।

किसी ने क्या खूब कहा है-

“मेरे पास वक्त नहीं उन लोगों से नफरत करने का जो मुझे पसंद नहीं करते,

क्योंकि मैं व्यस्त हूं उन लोगों को प्यार करने में जो मुझे पसंद करते हैं।”

तो मित्रों, जिदंगी का आनंद लीजिये…उसका लुत्फ़ उठाइए…उसकी समाप्ति… उसका अंत तो निश्चित है…। अतः आप सब स्वस्थ रहें, सुखी रहें एवं समृद्ध रहें, साथ ही अपने काम में व्यस्त रहे एवं मस्त रहे।

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