Monday , September 28 2026

जैसा मरीज, वैसा इलाज, माता-पिता बनना अब और आसान

-HOPE CME 2026 में निकला दम्पतियों की आशा बढ़ाने वाला संदेश 

-एआई और रोबोट से बदल रहा है निःसंतानता का इलाज

-सीएमई में शामिल हुए देश भर से आए विशेषज्ञ 

सेहत टाइम्स 

लखनऊ। हर मरीज़ अलग है, हर किसी की कहानी अलग है। इसलिए इलाज भी सबके लिए एक जैसा नहीं हो सकता। सबसे ज़रूरी है- मरीज़ को, सही समय पर, सही इलाज।

ये वह संदेश है जो 27 सितम्बर को लखनऊ में होटल क्लार्क्स अवध में आयोजित होप सीएमई 2026 में देशभर से आए विशेषज्ञों के व्याख्यान में निकल कर सामने आया। सीएमई का आयोजन अजंता अस्पताल की डॉ गीता खन्ना की अध्यक्षता में किया गया। इस बार की सीएमई का विषय था “आईवीएफ से आगे : हर मरीज़ के लिए सही इलाज, कंप्यूटर की समझ (एआई) और रोबोट से सर्जरी”।

डॉ गीता खन्ना ने बताया कि यह कार्यक्रम आईएफएस, एलओजीएस और होप सोसाइटी की ओर से किया गया। HOPE CME 2026 का उ‌द्घाटन मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. (डॉ.) सोनिया नित्यानंद, कुलपति, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. नीरज बोरा, विधायक तथा प्रो. दीपक मालवीय, पूर्व निदेशक, RMLIMS, लखनऊ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

डॉ. गीता खत्रा ने बताया कि कार्यक्रम में उन सवालों पर चर्चा हुई जो अक्सर दंपति और महिलाएँ डॉक्टरों से पूछते हैं:

आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल 

-क्या कंप्यूटर (एआई) पहले से बता सकता है कि किस महिला पर कौन-सी दवा कितना असर करेगी?

-अगर बच्चेदानी की अंदरूनी परत पतली है, तो क्या माँ बनना मुश्किल है?

– साधारण इलाज (आईयूआई) से आईवीएफ पर कब जाना चाहिए?

– बार-बार आईवीएफ फेल होने या बार-बार गर्भ गिरने की असली वजह कैसे पता करें

-पुरुषों में कमी की जाँच सिर्फ़ एक साधारण रिपोर्ट से आगे कैसे हो?

– क्या पीसीओएस (अंडाशय में गांठें) सिर्फ़ बच्चा न होने की समस्या है, या यह पूरी जिंदगी की सेहत से जुड़ी है?

– क्या नई मशीनें और जाँचें खतरे वाली गर्भावस्था को पहले ही पकड़ सकती हैं?

– क्या रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से बीमारी का इलाज करते हुए माँ बनने की क्षमता बचाई जा सकती है? 

– माहवारी बंद होने (मेनोपॉज़) के समय और कैंसर से बचाव में महिलाओं की बेहतर देखभाल कैसे हो?

विशेषज्ञों का कहना था कि निःसंतानता का इलाज अब तेज़ी से बदल रहा है। अब हर महिला को एक जैसा इलाज देना ज़रूरी नहीं है। हर मरीज़ की समस्या अलग होती है, इसलिए उसका इलाज भी उसी के हिसाब से होना चाहिए। पुरुषों में भी बांझपन तेजी से बढ़ रहा है। सही निर्णय लेने में नयी तकनीक डॉक्टरों के लिए बड़ी मददगार है।

कार्यक्रम में निःसंतानता के विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, गर्भावस्था एवं भ्रूण की देखभाल करने वाले विशेषज्ञ और रोबोटिक सर्जन एक साथ आए। इसमें प्रो. (डॉ.) नीना मल्होत्रा, डॉ. मीरा अग्निहोत्री, डॉ. सोनिया मलिक, डॉ. के.डी. नायर, डॉ. कुलदीप जैन, डॉ. मनीष बैंकर, प्रो. अनुराधा खत्रा, डॉ. भारती ढोरेपाटिल, डॉ. कांति बंसल और डॉ. अंजू अग्रवाल समेत पुणे, अहमदाबाद, नई दिल्ली, कानपुर और वाराणसी से आए कई बड़े डॉक्टर शामिल हुए।

एआई की भूमिका पर विशेष चर्चा

कार्यक्रम में दवाओं के सही असर का अनुमान लगाने में एआई की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। इसके अलावा रोबोटिक सर्जरी, गर्भ में बच्चे की निगरानी और पीसीओएस के इलाज पर भी सत्र हुए। आईवीएफ से जुड़े कानून, बार-बार आईवीएफ फेल होने और बार-बार गर्भ गिरने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने खुलकर चर्चा की।

इलाज सिर्फ़ आईवीएफ तक सीमित नहीं

डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा न होने का इलाज सिर्फ़ आईवीएफ तक सीमित नहीं है। समय पर जाँच, पति-पत्नी दोनों की जाँच, सही खान-पान और रहन-सहन, ज़रूरत पड़ने पर ऑपरेशन, गर्भावस्था में सही देखभाल और महिलाओं की लंबे समय तक अच्छी सेहत ये सब इस इलाज का हिस्सा हैं।

इस तरह होप सीएमई 2026 ने आईवीएफ से आगे बढ़कर एक ऐसे भविष्य की बात की, जहाँ नई तकनीक, डॉक्टरों के अनुभव और संवेदनशीलता के साथ मिलकर हर परिवार को बेहतर इलाज दे सकें।

एआई डॉक्टर का मददगार है, विकल्प नहीं 

कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रोबोटिक सर्जरी पर खास ज़ोर दिया गया। डॉक्टरों ने साफ़ कहा कि ये तकनीकें डॉक्टर की जगह नहीं लेंगी, बल्कि बीमारी पहचानने, इलाज तय करने और ऑपरेशन करने में डॉक्टर की मदद करेंगी।

सम्मान एवं पुरस्कार

समारोह में प्रजनन चिकित्सा के अनेक अग्रणी विशेषज्ञों को बांझपन उपचार, सहायक प्रजनन तकनीक (ART) तथा भारत में प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं के विकास में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।