-लिखित आश्वासन के बाद भी मांगों पर शासनादेश न होने से नाराज नर्सिंग संवर्ग ने बैठक में लिया फैसला

सेहत टाइम्स
लखनऊ। राजकीय नर्सेस संघ, उत्तर प्रदेश की प्रांतीय कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक विज्ञान भवन, बलरामपुर चिकित्सालय, लखनऊ में 26 सितम्बर देर शाम तक संपन्न हुई इस बैठक में प्रदेश भर से आए सभी मंडल अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष/मंत्री एवं संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
यह जानकारी देते हुए संघ की अध्यक्ष शर्ली भंडारी एवं महामंत्री अशोक कुमार ने बताया है कि बैठक में इस बात पर गहरी चिंता और रोष व्यक्त किया गया कि संघ की 13-सूत्रीय मांगों को लेकर उप मुख्यमंत्री, अपर मुख्य सचिव एवं महानिदेशक स्तर से प्रमुख मांगों, जैसे उच्च संस्थानो के समान भत्ते, गृह जनपद नियुक्ति, ए सी पी, पदोन्नति, पालनाघर, पोस्ट बेसिक बी एस सी नर्सिंग की भाँति उच्च शिक्षा एम एस सी नर्सिंग एवं पी एच डी के लिए सवेतन छुट्टी, मेडिकल कॉलेज से हटाए जा रहे नर्सिंग संवर्ग को या तो अन्य मेडिकल कॉलेज की भाँति रखा जाए या पद सहित उसी या अन्य जनपदो में रखा जाए इत्यादि पर लिखित आश्वासन के उपरांत भी आज तक शासनादेश निर्गत नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि लंबे समय से की जा रही शासन, प्रशासन द्वारा उपेक्षा एंव हठधर्मिता के कारण प्रदेश के सभी नर्सिंग संवर्ग में भारी असंतोष व्याप्त है। ऐसी स्थिति में, कार्यकारिणी द्वारा सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि अब संघ के पास अपने अधिकारों के लिए आंदोलन के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प शेष नहीं है। बाध्य होकर संघ ने चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया है।
9 अक्टूबर से बांधा जाएगा काला फीता
उन्होंने बताया कि 9 अक्टूबर से प्रदेश के सभी चिकित्सालयों में नर्सेस द्वारा विरोध स्वरूप काला फीता बांधकर राजकीय कार्य किया जाएगा। इसके पश्चात 21 अक्टूबर से दो घन्टे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
- 22 अक्टूबर से 2 घंटे कार्य बहिष्कार
उन्होंने बताया कि 22 अक्टूबर को 11 बजे स्वास्थ्य महानिदेशालय पर प्रदेश भर से आए नर्सिंग संवर्ग द्वारा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। 22 अक्टूबर तक शासनादेश निर्गत नहीं होता है या मांगों से सम्बंधित आदेश जारी नहीं होता है तो प्रदेश भर की नर्सेस अनिश्चितकाल के लिए प्रतिदिन प्रातः 8:00 बजे से 10:00 बजे तक कार्य बहिष्कार करेंगी।
अध्यक्ष और महामंत्री ने बताया कि इस संबंध में महानिदेशक को पत्र भेज कर अनुरोध किया गया है कि नर्सिंग संवर्ग की न्यायोचित मांगों, उनके आक्रोश और आम जनमानस (मरीजों) को होने वाली संभावित असुविधा को दृष्टिगत रखते हुए, पूर्व में बनी लिखित सहमति के आधार पर मांगों का शासनादेश अविलंब निर्गत करने की कृपा करें, ताकि प्रस्तावित आंदोलन को टाला जा सके। उन्होंने बताया कि इस पत्र की प्रतिलिपि उप मुख्यमंत्री/विभागीय मंत्री तथा अपर मुख्य सचिव को भी भेजी गई है।

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