-रिटायर्ड कर्मियों की व्यथा, 27 साल से इंतजार है पेंशन के अपग्रेडेशन का
सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। 27 साल बीत चुके हैं, बैंक कर्मचारियों की पेंशन का अपग्रेडेशन नहीं हुआ है, महंगाई कहां से कहां पहुंच गयी है, मगर पेंशन वही पुरानी, स्थिति यह है कि अब तो पेंशनर्स को पेंशन के भरोसे घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है, वृद्धावस्था में बढ़ते स्वास्थ्य सम्बन्धी खर्चों को झेलना मुश्किल पड़ रहा है। लम्बे समय से पेंशन का अपग्रेडेशन न होने का नतीजा यह है कि 20-22 साल पूर्व रिटायर होने वाले अधिकारियों की पेंशन आजकल रिटायर होने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मी की पेंशन से भी चौथाई तक कम हो गयी है।
अपनी इस व्यथा को बताने के लिए आज ऑल इंडिया इलाहाबाद बैंक (अब इंडियन बैंक में विलय) पेंशनर्स एंड रिटायरीज एसोसिएशन ने एक प्रेस वार्ता यहां कॉफी हाउस में आयोजित की थी। प्रेस वार्ता में अन्य पदाधिकारियों में आरएन शुक्ला, नित्यानंद दुबे, हरिहर सिंह, आरएल गुप्ता, आलोक कुमार पाण्डेय, रूबी कंचन, डीएस उपाध्याय, सुनील सक्सेना, एपी द्विवेदी भी उपस्थित थे। एसोसिएशन के सचिࠒव हरिहर सिंह से पत्रकारों को बताया कि बैंकों में पेंशन अपग्रेडेशन एंड निर्धारण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पैटर्न पर किया जाता है। अब जबकि रिजर्व बैंक ने पेंशन अपग्रेडेशन कर दिया है उसके बाद भी हम लोगों को अब भी वही पुरानी पेंशन मिल रही है।
पदाधिकारियों का कहना था कि विलय के समय इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक ने 24 अप्रैल 2020 को घोषणा की थी कि इलाहाबाद बैंक कर्मचारियों व पेंशनर्स को दिक्कत नहीं होने दी जायेगी, इलाहाबाद बैंक जो सुविधाएं दे रही हैं, वो मिलती रहेंगी, इंडियन बैंक में उससे अच्छी व अतिरिक्त सुविधाएं जो, कर्मचारियों को दी जा रही हैं वह सुविधाएं भी इलाहाबाद बैंक कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को दी जायेंगी। वर्तमान में छह माह बीत चुके हैं, मगर कोई सुविधाएं नही दी गईं हैं। भारत सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन इस उचिࠒत मांग पर ध्यान नहीं दे रही है, इससे पेंशनर्स विशेषकर 70 से 80 वर्ष की आयु के रिटायर्ड कर्मियों की आर्थिक दशा अत्यन्त खराब हो गयी है। ज्ञात हो इलाहाबाद जैसी पुरानी बड़ी व ऐतिहासिक बैंक का भी इंडियन बैंक में विलय हो गया जिसमें उपभोक्ता समेत कर्मचारियों का भी समायोजन हो गया।
पदाधिकारियों का कहना था कि सभी विभागों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं अधिकारियों की पेंशन समय-समय पर रिवाइज होती हैं। मगर बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं है। एसोसिएशन के प्रवक्ता आलोक कुमार पाण्डेय ने कहा कि पेंशनर्स की एक और बड़ी समस्या है, मेडिकल इन्श्योरेंस। सामान्यत: बैंकों में कार्यरत कर्मचारियों का बीमा बैंक मुफ्त में कराते हैं, लेकिन यहां ऐसा नहीं है। बीमा की किस्त भी पेंशनर्स को भरनी पड़ती है, वह भी बैंक द्वारा तय की गयी इंश्योरेंस कम्पनी को। पेंशनर्स पहले से ही आर्थिक तंगी से गुजर रहा है, ऊपर से इंश्योरेंस कम्पनी का भारी भरकम प्रीमियम और कमर तोड़ देता है। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बाबत आश्वासन भी दिया है लेकिन अभी तक तो कुछ हुआ नहीं है, कब इंतजार खत्म होगा, कुछ पता नहीं।