‘धप्‍पा’ बोले तो आइस-पाइस में खिलाड़ी को पीछे से पड़ने वाली धौल…

शुक्रवार को पूरे देश भर में हो रहा है फि‍ल्‍म ‘धप्‍पा’ का प्रदर्शन  

लखनऊ। लखनऊ के सिद्धार्थ नागर की महत्वाकांक्षी फीचर फिल्म ’धप्पा’ देशभर में प्रदर्शन के लिए तैयार है और 14 दिसम्बर को फिल्म का भव्य प्रीमियर संपन्न होने जा रहा है। फि‍ल्‍म की केन्द्रीय थीम है ’युवाओं के हाथ में तमंचा नहीं कलम होनी चाहिए’।

 

आज लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए फिल्म के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर सिद्धार्थ नागर ने कहा, ’’फिल्म को समूचे उत्तर भारत में प्रदर्शित करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और उम्मीद है कि फिल्म का कथानक लोगों के मन को छुएगा। फि‍ल्‍म के नाम को लेकर किये गये प्रश्‍न पर उन्‍होंने कहा कि धप्‍पा का अर्थ होता है धौल जमाना, जैसे कि बचपन में हर किसी ने आइस-पाइस खेल खेला होगा, इस आइस-पाइस खेल में जब ढूंढने वाले व्‍यक्ति को छिपा हुआ व्‍यक्ति पीछे से धौल जमाता है, उसी को धप्‍पा कहते हैं। इस फि‍ल्‍म में नायक को किस तरह धप्‍पा पड़ता है, यह देखना रोचक होगा।

 

उन्‍होंने वर्तमान उत्‍तर प्रदेश सरकार तथा पूर्व की सरकारों का आभार जताते हुए कहा कि सरकारों की मदद की वजह से ही यूपी में अच्‍छी खासी संख्‍या में फि‍ल्‍में बन रही हैं। उन्‍होंने कहा कि यहां की लोकेशन बहुत अच्‍छी है, माहौल अच्‍छा है, कलाकारों से कोई बद्तमीजी नहीं करता है, जो कि अन्‍य कुछ स्‍थानों पर हो जाती हैं।

 

सिद्धार्थ नागर ने फि‍ल्‍म के अन्‍य कलाकारों के साथ यहां आयोजित एक पत्रकार वार्ता में बताया कि ’धप्पा’ फिल्म उत्तरप्रदेश और हिन्दी बेल्ट के दर्शकों को विशेष रूप से पसंद आयेगी क्योंकि फिल्म की कहानी यहीं के लोगों की जिंदगी, सपनों और हकीकतों के इर्द-गिर्द खूबसूरती से बुनी गई है। युवावर्ग की समस्याओं और महत्वाकांक्षाओं पर केंद्रित फिल्म का कथानक नयापन लिए हुए है जो फार्मूला फिल्मों की भीड़ में एक ताजा हवा के झोंके सा है।

 

निर्देशक सिद्धार्थ नागर का कहना है कि अपनी जड़ों की ओर वापस लौटने की बेचैनी अर्से से उनके मन में थी इसीलिए इस फिल्म का समूचा छायांकन उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों, मुख्यतः लखनऊ, आगरा और मथुरा में ही किया गया है, साथ ही फिल्म के ज्यादातर कलाकार और तकनीशियन भी यहीं के हैं।

 

कृति फिल्म के बैनर तले बन रही इस फीचर फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में अयूब खान, श्रेष्ठ कुमार, बृजेन्द्र काला, यश सिन्हा, अमित बहल, दीप राज राणा, अर्पणा, जया भट्टाचार्या एवं नवोदित नायिका वर्षा मानिकचन्द के अलावा उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित कलाकार आर. डी. सिंह, संदीपन नागर, पवन मिश्रा, राधेश्याम दीक्षित, आलोक शुक्ला, आरती पाण्डया, भानुमति सिंह, पुनीता अवस्थी, अनीता सहगल, डिम्पी मिश्रा, विनोद शर्मा एवं कमल मल्होत्रा के अलावा कई अन्‍य नवोदित कलाकार हैं। फिल्म के कैमरामैन हैं मुकेश शर्मा जबकि संगीत दिया है विवेक बक्शी ने और स्टंट डायरेक्टर हैं मोहन बग्गड़ फि‍ल्‍म में कोरियोग्राफी की है लॉलीपॉप ने।

 

सिद्धार्थ का कहना है कि फिल्म के सशक्त कथानक के केन्द्र में आज का युवा है जिसकी केन्द्रीय थीम है ’युवाओं के हाथ में तमंचा नहीं कलम होनी चाहिए’ और यह कहानी दर्शक को गहरे तक प्रभावित करेगी, जबकि फिल्म में अनुभवी कलाकारों के साथ-साथ स्थानीय और नवोदित कलाकारों को भरपूर अवसर देने के पीछे हमारा उद्देश्य है स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देना और मंच प्रदान करना। फिल्म में ब्रज और समूचे उत्तरप्रदेश की लोकसंस्कृति को पारंपरिक रुप से दर्शाया गया है। उन्होंने घोषणा की कि कृति फिल्म्स के बैनर तले शीघ्र ही एक नई फीचर फिल्म पर काम शुरू होगा जिसका सम्पूर्ण छायांकन उत्तर प्रदेश में ही किया जाएगा।