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काम के दौरान आती है नींद, खर्राटे, सोते-सोते चौंक जाते हैं तो आपको चाहिये…

-वर्ल्‍ड स्‍लीप डे पर जीसीसीएचआर के डॉ गौरांग गुप्‍ता से विशेष वार्ता

डॉ गौरांग गुप्‍ता

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। दिन में कार्य करते-करते नींद आना, बैठे-बैठे नींद आना, थकावट महसूस होना, गाड़ी चलाने में नींद आने की शिकायत है और सोते समय अगर आपको खर्राटे आते हैं, नींद में चौंककर उठ जाते हैं, मुंह सूखता है तो इसकी वजह क्रॉनिक साइनोसाइटिस नाक के अंदर मांस बढ़ना या नाक की हड्डी टेढ़ी होना हो सकती है। इस‍के अलावा एलर्जी भी एक वजह होती है जिसमें नाक का रास्‍ता सकरा हो जाता है, जो सोते समय सांस लेने में अवरोध उत्‍पन्‍न करता है, इससे कुछ सेकंड के लिए मस्तिष्‍क को ऑक्‍सीजन की आपूर्ति घट जाती है। इन सब बातों के चलते व्‍यक्ति गहरी नींद नहीं सो पाता है, यह स्थिति स्‍लीप एप्निया कहलाती है, यह स्थिति ज्‍यादा खराब होने पर जानलेवा भी हो सकती है। ऐसे में व्‍यक्ति को चाहिये कि वह डॉक्‍टर से सम्‍पर्क कर प्रारम्भिक स्‍टेज पर ही इस समस्‍या का इलाज कर ले।

यह सलाह गौरांग क्‍लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्‍योपैथिक रिसर्च जीसीसीएचआर के कन्‍सल्‍टेंट डॉ गौरांग गुप्‍ता ने विश्‍व निद्रा दिवस के मौके पर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्‍य से ‘सेहत टाइम्‍स’ से विशेष बातचीत में दी। उन्‍होंने कहा कि इस परेशानी के इलाज की दिशा CT paranasal sinuses सीटीपीएनएस टेस्‍ट की रिपोर्ट और स्‍लीप स्‍टडी देखकर तय की जाती है। उन्‍होंने कहा कि अगर नाक के अंदर मांस बढ़ने से यह समस्‍या है तो होम्‍योपैथिक में इसका सफल इलाज है, लेकिन अगर समस्‍या हड्डी टेढ़ी होने के कारण है तो इसका ऑपरेशन कराना ज्‍यादा श्रेयस्‍कर है। 

डॉ गौरांग कहते हैं कि सांस अटकती दिन में भी है लेकिन चूंकि व्‍यक्ति जगता रहता है तो ऐसे में यह स्थिति बिगड़ नहीं पाती है लेकिन रात में सोते समय यह स्थिति खर्राटे पैदा करती है, मस्तिष्‍क में ऑक्‍सीजन की आपूर्ति बाधित भी कर सकती है।

डॉ गौरांग बताते हैं कि स्‍लीप एप्निया की डायग्‍नोसिस के लिए जो स्‍लीप स्‍टडी करायी जाती है, इस स्‍टडी में नींद का पैटर्न, ब्‍लड में ऑक्‍सीजन की मात्रा, पल्‍स-ब्‍लड प्रेशर की मॉनिटरिंग की जाती है साथ ही सीटीपीएनएस टेस्‍ट से इसके कारण का पता लगाया जाता है। उन्‍होंने कहा कि स्‍लीप स्‍टडी अगर सीवियर है तो शीघ्र ऑपरेशन की सलाह दी जाती है, लेकिन जो लोग सर्जरी नहीं कराना चाहते हैं तो उनके लिए एक विकल्‍प बाईपेप या सीपेप उपकरण होता है, इस उपकरण को सोते समय प्रयोग किया जाता है, यह उपकरण बिना अवरोध सांस लेना सुनिश्चित करता है।

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