-इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स, यूपी ने आयोजित की ‘RA Expert Meet 2026’

सेहत टाइम्स
लखनऊ। एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने कहा है कि रीजनल एनेस्थीसिया केवल ऑपरेशन की तकनीक नहीं, बल्कि दर्द प्रबंधन, सुरक्षित उपचार और बेहतर रिकवरी का सशक्त माध्यम है। मानक प्रोटोकॉल, अल्ट्रासाउंड आधारित तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञों के माध्यम से मरीजों की सुरक्षा और बेहतर की जा सकती है। रीजनल एनेस्थीसिया से जहां सिजेरियन डिलीवरी में प्रसूता का दर्द कम किया जा सकता है, वहीं कैंसर सर्जरी में मरीज की प्रतिरक्षा शक्ति को बेहतर बनाये रखने के साथ ही कैंसर के फैलाव को रोकने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
इस बारे में जानकारी देते हुए Indian Society of Anaesthesiologists (ISA UP) के सचिव डॉ तन्मय तिवारी ने बताया कि इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स, यूपी द्वारा RA Expert Meet 2026 का सफल आयोजन किया गया, जिसमें उत्तर भारत से 100 से अधिक चिकित्सकों ने सहभागिता की। उन्होंने बताया कि इस मीट में सुरक्षित मरीज, बेहतर दर्द नियंत्रण और बेहतर परिणाम के प्रति संकल्पित रहने की भावना के साथ क्षेत्रीय एनेस्थीसिया के सुरक्षित एवं व्यापक उपयोग पर मंथन कर रीजनल एनेस्थीसिया के सुरक्षित, प्रभावी एवं व्यापक उपयोग को क्लिनिकल प्रैक्टिस में बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। बैठक में अल्ट्रासाउंड-गाइडेड तकनीकों, दर्द प्रबंधन और बेहतर मरीज परिणामों पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. तन्मय तिवारी ने कहा कि मरीज सुरक्षा (Patient Safety) हमेशा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए एनेस्थीसिया की हर तकनीक का उद्देश्य सुरक्षित उपचार, बेहतर रिकवरी और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुनिश्चित करना है। प्रसूता माताओं के लिए बेहतर दर्द राहत पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि रीजनल एनेस्थीसिया, विशेषकर लेबर एपिड्यूरल, गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित और प्रभावी दर्द राहत प्रदान करता है, जिससे प्रसव अनुभव अधिक सहज और आरामदायक बनता है।
इसके अतिरिक्त रीजनल एनेस्थीसिया की कैंसर के फैलाव को कम करने में संभावित भूमिका पर हुई चर्चा में यह भी सामने आया कि कुछ कैंसर सर्जरी में रीजनल एनेस्थीसिया शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है तथा कैंसर के फैलाव को कम करने में संभावित भूमिका निभा सकता है।
बैठक में डॉ. दिव्या श्रीवास्तव (एसजीपीजीआई), डॉ. ममता हरजाई (आरएमएलआई), डॉ. अपूर्व अग्रवाल (जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज), डॉ. मोनिका कोहली (केजीएमयू), डॉ. दीपक मालवीय, डॉ. रशीद (कैंसर इंस्टीट्यूट), डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. संदीप साहू (एसजीपीजीआई), डॉ. शिशिर अग्रवाल सहित विभिन्न संस्थानों के अनेक वरिष्ठ एवं युवा चिकित्सकों ने सहभागिता की।

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