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फार्मासिस्‍ट करेंगे 17 दिसम्‍बर से पूर्ण कार्य बहिष्‍कार, 20 से इमरजेंसी सेवाएं भी होंगी बंद

-4 दिसंबर को धरना-प्रदर्शन, 5 से 8 तक काला फीता, 9-10 को 2 घंटे कार्य बहिष्कार

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। प्रशासन द्वारा फार्मेसिस्ट संवर्ग के प्रति सौतेला एवं नकारात्मक रवैया अपनाए जाने का आरोप लगाते हुए डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश की प्रांतीय कार्यकारिणी ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है। 4 दिसंबर को सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालयों पर धरना ज्ञापन, 5 से 8 तक काला फीता, 9 से 10 तक 2 घंटे कार्य बहिष्कार, 17 से 19 तक पूर्ण कार्य बहिष्कार और मांगें न माने जाने पर 20 दिसंबर से आपातकालीन सेवाओं को भी शामिल करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा   आज संघ के प्रांतीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में संघ के अध्यक्ष संदीप बडोला, महामंत्री उमेश मिश्रा ने की।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 में प्रदेश के फार्मेसिस्टों ने जनता की सेवा में अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की ट्रैकिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई पोस्ट कोविड उपचार और मरीजों की काउंसलिंग के बाद प्रदेश के फार्मेसिस्ट वैक्सीनेशन को सफल बनाने में पूरे जी-जान से लगे हुए हैं। कोविड-19 में लगभग दो दर्जन फार्मेसिस्टो ने अपनी प्राणों की आहुति भी दे दी है, हजारों फार्मेसिस्ट गंभीर रूप से संक्रमित हुए हैं, ऐसे समय भी सरकार द्वारा फार्मेसिस्टों की मांगों पर नकारात्मक रुख अख्तियार किया जाना निश्चित ही उनका अपमान है।

ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की अनुपस्थिति में फार्मेसिस्ट चिकित्सीय वैन प्रशासनिक कार्य भी करते हैं परंतु उन्हें प्रभार भत्ता के नाम पर मात्र ₹75 रुपये प्रतिमाह दिया जाता है। इस कार्य के लिए ड्यूटीलिस्ट में कार्य निर्धारण को अभी तक विधिक मान्यता नहीं दी गई, सीमित औषधियों के प्रिस्क्रिप्शन लिखने के अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव शासन में लंबित है । गैर वित्तीय मांगे भी शासन में लटकी हुई है, पद नाम परिवर्तन का प्रस्ताव निर्णय की बाट जोह रहा है ।

अनेक कार्य एवं दायित्व को देखते हुए वेतन उच्चीकरण की मांग पर वेतन कमेटी की रिपोर्ट पिछले 5 साल से वित्त विभाग में धूल खा रही है । भत्तो का पुनरीक्षण नहीं हो सका है । शासन स्तर पर कई बार वार्ताओं में बनी सहमति के बाद भी उच्च पदों का सृजन नहीं हो पाया। पदों का पुनर्गठन न होने से ज्यादातर फार्मेसिस्ट प्रोन्नति के लाभ से वंचित होकर सेवानिवृत्त हो जाते हैं। संवर्ग में सृजित दो उच्च पद विशेष कार्य अधिकारी फार्मेसी एवं संयुक्त निदेशक फार्मेसी के एकल पद विगत 5 वर्षों से रिक्त पड़े हुए हैं, प्रभारी अधिकारी फार्मेसी के लगभग 40 से अधिक पद एवं चीफ फार्मेसिस्ट के सैकड़ों पद रिक्त हैं, जिन पर पदोन्नतियां नहीं की गई। ट्रॉमा सेंटर में अभी तक फार्मेसिस्ट के एक भी पद सृजित नहीं है, जिससे वहां पर अन्य चिकित्सालयों के फार्मेसिस्टों को संबद्ध कर उधार से कार्य संचालित किया जा रहा है । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सा सुविधाएं 24 घंटे संचालित हो रही हैं, परंतु मानक में मात्र 2 पदों के सृजन का प्रावधान है जिससे 1-1 फार्मेसिस्ट 24 से 48 घंटे कार्य कर रहा है। शासन द्वारा ड्रग वेयरहाउस बनाये गए परंतु उसमें पद सृजित नहीं हुए, अन्य चिकित्सालयों के फार्मेसिस्टो को संबद्ध किया गया है, जिससे वहां का कार्य प्रभावित है। संघ का कहना है कि उनकी सभी मांगें न्यायोचित हैं एवं जनहित में है। मांगों की पूर्ति होने से जनता को अच्छी गुणवत्ता युक्त चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त होंगी।

संघ ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि संघ आंदोलन नहीं चाहता लेकिन शासन द्वारा उनके प्रति नकारात्मक रवैया अपनाए जाने से आंदोलन किया जाना मजबूरी बन रही है। वार्ता में संरक्षक के के सचान, आर एन डी द्विवेदी, अजय पांडेय, सुशील त्रिपाठी, हेमंत चौधरी, एस एम त्रिपाठी, अखिल सिंह, संगीता वर्मा, रविन्द्र शर्मा, शंकर पटेल उपस्थित थे।

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