-इप्सेफ ने कहा कि राजनाथ सिंह ने आश्चवासन भी दिया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं

सेहत टाइम्स
लखनऊ। इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) ने साफ कर दिया है कि तीनों मांगों, पहली पुरानी पेंशन की यथावत बहाली, दूसरी स्थायी राष्ट्रीय वेतन आयोग का गठन और तीसरी आउटसोर्स कर्मचारी की सेवा सुरक्षा तथा न्यूनतम वेतन सहित नियमित सेवा में वरीयता की नियमावली बनाना, पर भारत सरकार के सार्थक निर्णय के अलावा कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। पूर्व में घोषित कार्यक्रम के अनुसार 2 अक्टूबर से महात्मा गांधी के जन्मदिन को देशभर के कर्मचारी सत्याग्रह करने का संकल्प लेंगे जो आगे भी चलता रहेगा।
यह जानकारी देते हुए इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी पी मिश्रा ने कहा है कि उपरोक्त मांगों का ज्ञापन भी रक्षा मंत्री भारत सरकार राजनाथ सिंह जी के माध्यम से कई बार भेजा जा चुका है। श्री सिंह ने इप्सेफ के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन भी दिया था कि इप्सेफ की मांगों पर प्रधानमंत्री से बातचीत कर निराकरण कराएंगे। इस संबंध में कार्मिक सचिव से वार्ता हुई थी इप्सेफ के अनुरोध पर पेंशन बहाली समिति का गठन भी हुआ परंतु उसकी संस्तुतियों के बारे में कोई निर्णय नहीं किया गया।


महासचिव प्रेम चन्द एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सतीश पांडेय ने बताया कि पिछला वेतन आयोग 2 वर्ष पहले ही गठित हो गया था जिसका लाभ 1 जनवरी 2016 से लागू कर दिया गया था उसी तरह आठवां वेतन आयोग भी 2 वर्ष पूर्व अर्थात 2024 में गठित होना चाहिए।
उप महासचिव अतुल मिश्रा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शशि कुमार मिश्रा, सुरेश रावत ने कहा कि उत्तर प्रदेश में डेली वेजेस कर्मचारियों के नियमितीकरण की भाँति आउटसोर्स कर्मचारी के भी विनियमितीकरण की नीति बनाई जानी चाहिए।
इप्सेफ के राष्ट्रीय उप महासचिव अतुल मिश्रा ने बताया कि देश भर के करोड़ों कर्मचारी इन मांगों को पूरा करने के लिए 2 अक्टूबर को आंदोलन करने का संकल्प करेंगे और आगे के आंदोलन में पूरी भागीदारी करेंगे। इप्सेफ ने राजनाथ सिंह से अपील की है कि तीनों मांगों को पूरा करने में पूरा सहयोग करें, देशभर का कर्मचारी आभार व्यक्त करेगा। भारत सरकार निर्णय नहीं करेगी तो भावी चुनाव में भाजपा को भारी क्षति उठानी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि दिल्ली इंडियन पब्लिक सर्विस एम्पलाइज फेडरेशन की राज्य इकाई 12 सितंबर को संसद पर प्रदर्शन का ऐलान किया है।
