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व्‍यापक स्‍तनपान प्रबंधन केंद्रों की जरूरत, ताकि कोई भी शिशु वंचित न रहे मां के ‘अमृत’ से

-संजय गांधी पीजीआई में नियोनेटल न्यूट्रिशन : बेंच टू बेडसाइड कार्यशाला आयोजित

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (एनएनएफ) की निर्वाचित अध्यक्ष प्रोफेसर सुषमा नांगिया ने “मां के अपने दूध (mother’s own milk : MOM) के साथ शुरुआती पोषण” के महत्व पर जोर दिया है।

प्रोफेसर सुषमा नांगिया ने ये विचार संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) के नियोनेटोलॉजी विभाग द्वारा 15 और 16 अप्रैल को नवजात पोषण से संबंधित ज्ञान और कौशल के बीच के अंतर को दूर करने के लिए “नियोनेटल न्यूट्रिशन : बेंच टू बेडसाइड” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला में व्‍यक्‍त किये। उन्‍होंने समय से पहले जन्मे और समय पर जन्मे बच्चों को मां का दूध उपलब्ध न होने पर व्यापक स्तनपान प्रबंधन केंद्रों की आवश्यकता पर जोर दिया गया, जिससे नवजात शिशुओं को सहजता से दूध उपलब्ध हो सके।

ज्ञात हो नवजात शिशुओं के प्रबंधन में रुग्णता व शिशु मृत्यु दर को कम करने और उनके न्यूरोलॉजिकल survival को अक्षुण्ण रखने के लिए नवजात पोषण एक निरंतर विकसित होता हुआ क्षेत्र है।  यह कार्यशाला स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग ( DHR – department of health research) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के तत्वावधान में आयोजित की गई थी। कार्यशाला का उद्देश्य समय से पहले जन्मे शिशुओं पर विशेष ध्यान देते हुए  नवजात पोषण के क्षेत्र में हुई नवीनतम प्रगति से स्वास्थ्यकर्मियों को अवगत कराना था। देश भर से आये 70 से अधिक उत्साही प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यशाला में नैदानिक ​​व्याख्यान और वर्क स्टेशन शामिल थे। प्रख्यात राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संकाय सदस्यों ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये। इनमें कलावती सरन और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली से प्रोफेसर सुषमा नांगिया, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया से प्रोफेसर संजय पटोले, केईएम, पुणे से प्रोफेसर उमेश वैद्य, HIMS, देहरादून से प्रो. गिरीश गुप्ता, बीएचयू, वाराणसी से प्रोफेसर अशोक कुमार, केजीएमयू, लखनऊ से प्रोफेसर माला कुमार, GRIPMER, नई दिल्ली से डॉ. अनूप ठाकुर, एम्स, जोधपुर से डॉ. नीरज गुप्ता, केएस और एलएचएमसी, नई दिल्ली से डॉ. प्रतिमा आनंद,  मुंबई से डॉ विभोर बोरकर व डॉ अनीश पिल्लई और मेदांता, लखनऊ से डॉ आकाश पंडिता शामिल रहीं।

पोषण के बुनियादी पहलुओं पर केंद्रित इस कार्यशाला का शुभारंभ डॉ. पियाली भट्टाचार्य (उपाध्यक्ष मध्य क्षेत्र IAP), डॉ. संजय निरंजन (अध्यक्ष यूपी-आईएपी) व  डॉ. निरंजन सिंह (अध्यक्ष लखनऊ नियोनेटोलॉजी फोरम) द्वारा पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

कार्यशाला में टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रिशन (TPN), ग्रोथ मॉनिटरिंग और फॉलो-अप के विभिन्न पहलुओं को भी शामिल किया गया। प्रोफेसर उमेश वैद्य, जो देश में पैरेंट्रल न्यूट्रिशन के अग्रदूतों में से एक है, ने शुरुआती आक्रामक टीपीएन के महत्व, इसके नुस्खे, तैयारी और न्यूरो डेवलपमेंटल परिणामों में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

प्रो. गिरीश गुप्ता ने प्रीमेच्योरिटी ऑस्टियोपेनिया की रोकथाम के बारे में बात की और लंबे और मजबूत भारतीय जनशक्ति के निर्माण पर जोर दिया।

इस कार्यशाला का आयोजन संस्थान के नियोनेटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. कीर्ति एम. नारंजे के नेतृत्व में संपूर्ण देश के बालरोग विशेषज्ञों, नियोनेटोलॉजिस्ट, नर्सों और पोषण विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से किया गया था, जिससे नवजात पोषण से संबंधित ज्ञान और कौशल संबंधी कमियों को दूर किया जा सके।

कार्यशाला की आयोजन सचिव डॉ. अनीता सिंह और डॉ. आकांक्षा वर्मा, डॉ. अभिषेक पॉल, डॉ. अभिजीत रॉय तथा रेजिडेंट डॉक्टरों के प्रयासों के परिणामस्वरूप कार्यशाला एक बड़ी सफलता थी। आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागियों और संकाय सदस्यों का उनकी उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया गया।

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