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केजीएमयू को विश्‍व में अव्‍वल बनायें, संसाधन क्‍या चाहिये बतायें

-विशेषज्ञों के साथ मंथन करके अगले 10 साल का विजन डॉक्‍यूमेंट बनाने को कहा

-केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति राज्‍यपाल आनंदी बेन पटेल ने किया आह्वान

-मेधावी छात्र-छात्राओं को मे‍डल व सार्टीफि‍केट देकर किया सम्‍मानित

-ब्रजेश पाठक ने स्‍टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी की सूची में नाम दर्ज कराने वाले चिकित्‍सकों को दी बधाई

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश की राज्‍यपाल व कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने कहा है कि विश्‍व में अपना विशेष स्‍थान रखने वाले संस्‍थान किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी को विश्‍व के अव्‍वल संस्‍थान का दर्जा दिलाने की दिशा में कार्य करें, इसके लिए विशेषज्ञों की एक समिति बना कर मंथन कर 10 वर्ष का विजन डॉक्‍यूमेंट तैयार करें कि इसके लिए कैसे कार्य करना है, और किन संसाधनों की आवश्‍यकता होगी।

कुलाधिपति ने यह बात आज यहां अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफि‍क कन्‍वेंशन सेंटर में आयोजित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी केजीएमयू के 18वें दीक्षांत समारोह में अपने उद्बोधन में कही। उन्‍होंने कहा कि किसी भी संस्‍थान को लगातार इतने साल प्रतिष्‍ठा के सा‍थ चलाना मुश्किल होता है लेकिन मुझे खुशी है कि केजीएमयू लगातार अपग्रेड होता रहा है। उन्‍होंने कहा कि ज्‍यादा से ज्‍यादा एमओयू होने से हम दूसरों से कितने कमजोर हैं और हम दूसरों से कितने बेहतर हैं, इसका पता चलता रहता है। अपनी खामियों से हमें सीखकर आगे बढ़ना चाहिये।  

कुलाधिपति ने आह्वान किया कि केजीएमयू विशेषज्ञों की एक समिति गठित करके मंथन कर अगले 10 वर्षों का विजन डॉक्‍यूमेंट तैयार करें जिससे विश्‍व के संस्‍थानों में अव्‍वल स्‍थान प्राप्‍त कर सकें। उन्‍होंने कहा कि संस्‍थान द्वारा अच्‍छा कार्य किये जाने के बाद भी कमी तो है और  यह आप भी जानते हैं, क्‍योंकि प्रदेश से मरीज मुम्‍बई या विदेश में इलाज कराने क्‍यों जाते हैं, इस पर विचार करने की और अपनी खामियों को दूर करने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि संसाधनों की उपलब्‍धता के लिए सरकार तो आपके साथ है ही, इसके साथ ही उद्योगपतियों के सम्‍पर्क में भी रहें, क्‍योंकि सभी कम्‍पनियों में सीएसआर फंड होता है, इससे केजीएमयू के लिए आवश्‍यक संसाधन जुटायें।

उन्‍होंने कहा कि छात्र रिसर्च पर ध्‍यान दें। भारत जी-20 की अध्‍यक्षता कर रहा है। यूपी में चार बड़े शहरों लखनऊ, काशी, आगरा और नोएडा में शिखर सम्‍मेलन होगा, इन सम्‍मेलनों में स्‍टूडेंट्स अपनी रिसर्च प्रस्‍तुत करें, अगर बुक लिखी हो तो उसे प्रस्‍तुत करें। उन्‍होंने कहा कि आपने सेवा का प्रोफेशन चुना है। देश की 130 करोड़ की आबादी के स्‍वास्‍थ्‍य की जिम्‍मेदारी आपकी है। उन्‍होंने रिसर्च करने का आह्वान करते हुए कहा कि कोरोना काल में भारत ने एक साल में वैक्‍सीन बनाकर दुनिया को दिखा दिया कि स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में हम दुनिया से बेहतर हैं, यह सब आपके सेवाभाव से सम्‍भव हो पाया।

उन्होंने ऑर्गन डोनेशन करके जरूरतमंद को नया जीवन देने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि यदि डॉक्‍टर कह दे कि मरीज में अ‍ब कोई सुधार नहीं हो सकता है तो उसके अंगों को दान कर देना चाहिये। उन्‍होंने इसके लिए अपने परिवार का एक उदाहरण भी दिया जिसमें लिवर और किडनी से तीन मरीजों को जिन्‍दगी मिली।

उन्‍होंने कहा कि मैं अब तक जितने भी दीक्षांत समारोहों में गयी हूं, सभी जगह बेटियों ने ही बाजी मारी है, केजीएमयू में यही हुआ है। ज्ञात हो आज 41 मेधावियों को मेडल दिए गए जिसमें 23 लड़कियां 18 लड़के हैं। राज्‍यपाल ने अपने प्रबोधन में कहा कि मेडल एवं अवार्ड प्राप्त करने के लिए छात्रों से पहले उनके माता पिताओं को बधाई जिन्होंने कितनी मेहनत करके आप सब को इस पढ़ाई के योग्य बनाया। राज्यपाल ने कहा माता-पिता को हमेशा याद रखें एवं उनका आशीर्वाद प्राप्त करते रहें यही असली गोल्ड मेडल है। कार्यक्रम में 41 मेधावियों को मेडल दिए गए जिसमें 23 लड़कियां 18 लड़के हैं।

इस वर्ष एमबीबीएस की छात्रा डॉ मेहविश अहमद ने प्रतिष्ठित हीवेट मे‍डल सहित 13 गोल्‍ड मेडल, 2 सिल्‍वर मेडल और 2 बुक प्राइज जीतकर सर्वश्रेष्‍ठ स्‍थान पर अपना नाम लिखाया है। जबकि बीडीएस में डॉ गुंजन मेहता ने 8 गोल्‍ड मेडल, 2 सर्टीफि‍केट तथा 1 कैश प्राइज हासिल कर टॉप किया है। एमबीबीएस में दूसरे स्‍थान पर डॉ दीपक बंसल ने 6 गोल्‍ड मेडल, 1 सिल्‍वर मेडल तथा एक सर्टीफि‍केट हासिल किये हैं और तीसरे स्‍थान पर डॉ अदिति चंद्रा को एक गोल्‍ड मेडल हासिल हुआ है। इसके अतिरिक्‍त डेंटल में दूसरे स्‍थान पर रहने वाली बीडीएस की डॉ नेहा रानी को 2 गोल्‍ड, चार सिल्‍वर तथा बेस्‍ट डेंटल इंटर्न डॉ प्रदीप जयाना को गोल्‍ड मेडल मिला है।

सर्वाधिक अंक पाने वाली डॉ देविशा अग्रवाल को कान, नाक, गला ईएनटी के बेस्‍ट स्‍टूडेंट के लिए सम्‍मानित किया गया।   

डॉक्‍टरी पेशा जीविकोपार्जन का माध्‍यम नहीं बल्कि मानव सेवा का मार्ग : ब्रजेश पाठक

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपने प्रबोधन में मेडल एवं अवार्ड प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि आपने जिस पेशे को चुना है वह काई जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं बल्कि मानव सेवा का मार्ग है। उन्होंने कहा केजीएमयू का इतिहास बहुत गौरवशाली है, उन्होंने कहा आप सब डाक्टर्स, नर्सेस के कार्यों की बदौलत ही हम सब का एवं उत्तर प्रदेश का सम्मान बढ़ता है। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि स्टेनफोर्ड द्वारा प्रकाशित टॉप डॉक्टर्स की सूची में लखनऊ के 23 डॉक्‍टर्स और उन 23 में भी 10 केजीएमयू के हैं। उप मुख्यमंत्री ने सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश से अंग दान के लिए जागरूक होने की अपील की।

मरीज से बात करके करें रोग की पहचान : मयंकेश्‍वर शरण सिंह

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि यूपी के संसदीय कार्य , चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य , परिवार कल्याण तथा मात्र एवं शिशु कल्याण मयंकेश्वर शरण सिंह  ने मेडल से अलंकृत सभी छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए शुभकामनायें दीं। उन्होंने पास आउट डाक्टर्स को मरीजों से ज्यादा बात करके डाइग्नोस करने की सलाह दी। उन्‍होंने कहा कि  एक चिकित्सक के पास मरीज बेहद तनाव और दुखी होकर आता है और इस विश्वास के साथ आता है कि आप ही उन्हें स्वस्थ कर सकते हैं।

कुलपति ने गिनायीं उपलब्धियां

इस अवसर पर केजीएमयू के कुलपति ले0जन0(डा0) बिपिन पुरी द्वारा स्वागत सम्बोधन के साथ ही चिकित्सा विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। उन्होंने विगत एक वर्ष में चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त की गई उपलब्धियों का उल्लेख किया। 

उन्होंने कहा कि इतने कम समय में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में सुधार लाने के उद्देश्य से मेडिकल कॉलेजों की संख्या को दोगुना करना, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना, पीजी और पोस्ट-डॉक्टोरल पाठ्यक्रमों को बढ़ाना और बॉन्ड देनदारियों को स्थापित करना एक दुर्जेय और अत्यंत प्रशंसनीय कार्य रहा है, इसके लिए मैं मुख्‍यमंत्री, उपमुख्‍यमंत्री, विभागीय मंत्रियों सहित सभी का आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

उन्होंने बताया केजीएमयू 1905 में बनाया गया था, और पिछले कुछ वर्षों में शिक्षाविदों, अनुसंधान और रोगी देखभाल में योगदान के लिए राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतिष्ठा हासिल की है। एमबीबीएस छात्रों के पहले बैच ने अक्टूबर 1911 में तत्कालीन किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में 31 छात्रों के साथ प्रवेश किया। तब से, केजीएमयू ने 30,000 से अधिक पूर्व छात्र दिए हैं जो इस कॉलेज का गौरव हैं और भारत और दुनिया भर में चिकित्सा पेशे की सेवा कर रहे हैं।

अब हम 50 भवनों और 4 संकायों (चिकित्सा, दंत चिकित्सा, पैरामेडिकल और नर्सिंग) में 55 से अधिक शिक्षण विभागों के साथ भारत में सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालय हैं। हमारा वार्षिक सेवन 250 मेडिकल और 70 डेंटल अंडरग्रेजुएट, 100 नर्सिंग अंडरग्रेजुएट, 445 पैरामेडिकल छात्र, 300 से अधिक मेडिकल पोस्टग्रेजुएट और 40 से अधिक सुपर स्पेशलिटी प्रशिक्षु हैं। इसके अलावा विवि विभाग एमफिल और पीएचडी प्रोग्राम भी चला रहा है। किसी भी समय विश्वविद्यालय में लगभग 400 फैकल्टी, 750 रेजिडेंट डॉक्टर और 5000 कर्मचारी होते हैं।

गांधी मेमोरियल और संबद्ध अस्पतालों में किसी भी समय भर्ती (ऑन-बेड) रोगियों की एक समान संख्या के साथ 4000 से अधिक कार्यात्मक बिस्तर हैं और प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले लगभग 6000-7000 नए रोगियों का आगमन हो रहा है।

संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के माध्यम से अखिल भारतीय रैंकिंग की घोषणा के माध्यम से आई, जिसमें केजीएमयू को 2022 में 11वें सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थान के रूप में स्थान दिया गया था।

उन्‍होंने कहा कि केजीएमयू को वर्ष 2021 में स्टैनफोर्ड मूल्यांकन द्वारा शीर्ष 2% वैश्विक वैज्ञानिकों में फैकल्टी होने पर गर्व है, इनमें प्रोफेसर रश्मि कुमार (सेवानिवृत्त), बाल रोग विभाग; प्रोफेसर शैली अवस्थी, प्रमुख, बाल रोग विभाग; प्रो. आर.के. गर्ग, प्रमुख, न्यूरोलॉजी विभाग; प्रो. अमिता जैन, प्रमुख, माइक्रोबायोलॉजी विभाग; प्रो. सूर्यकांत, प्रमुख, श्वसन चिकित्सा विभाग; प्रो. अब्बास अली महदी, प्रमुख, जैव रसायन विभाग; प्रो. राजेश वर्मा, न्यूरोलॉजी विभाग; प्रो. दिव्या मेहरोत्रा, ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग; डॉ. सुजीत कुमार कर, मनोरोग विभाग शामिल हैं।

कुलपति ने बताया कि वर्ष 2022 में केजीएमयू ने अंग प्रत्यारोपण में बड़ी प्रगति की है। कुल 7 लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए गए, जिनमें 3 लिविंग डोनर और 4 कैडेवरिक डोनर लिवर ट्रांसप्लांट शामिल हैं। दो गुर्दा प्रत्यारोपण भी सफलतापूर्वक किए गए, एक मृत व्यक्ति और एक जीवित दाता। लिवर और किडनी के संयुक्त प्रत्यारोपण का एक मामला किया गया, जो अपनी तरह का पहला मामला था। एनाटॉमी विभाग में 30 शरीर दान और शरीर दान के लिए 140 और पंजीकरण हुए। नेत्र विज्ञान विभाग में कुल 158 कॉर्नियल प्रत्यारोपण किए गए और 150 नेत्रदान का संकल्प लिया गया।

उन्होंने कहा  प्रो. अनिल कोहली और प्रो. मोने जैदी को अपने पेशे में अद्वितीय योगदान और मानवता की सेवा के लिए इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से डी.एससी. मानद उपाधि प्राप्त की, हमें उन पर गर्व है।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रति कुलपति डा0 विनीत शर्मा , डा0 पुनीता मानिक ,डा0 ए के टिक्कू ,डा0 ए के त्रिपाठी , डा0अनिल निश्चल एवं कुलसचिव रेखा एस चौहान उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डा0 अमिता पाण्डेय तथा डा0 सौमेंद्र विक्रम सिंह द्वारा किया गया।

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