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केजीएमयू में 20-24 सालों से एमबीबीएस उत्‍तीर्ण न करने वाले 37 छात्रों के लिए अंतिम मौका

-कुलपति ले.ज. डॉ बिपिन पुरी ने दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर आयोजित की प्रेस वार्ता

-पेशेंट केयर से लेकर स्‍टूडेंट की शिक्षा तक के क्षेत्र में बेहतरी के लिए उठाये कदमों के बारे में दी जानकारी

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय केजीएमयू में पिछले 20-24 सालों से एमबीबीएस परीक्षा उत्‍तीर्ण न कर पाने वाले छात्रों के लिए चेतावनी है कि उन्‍हें परीक्षा पास करने के लिए एक मौका और दिया जायेगा, अगर उसमें उन्‍होंने परीक्षा पास नहीं की तो बाहर का रास्‍ता दिखा दिया जायेगा जिससे उनका डॉक्‍टर बनने का सपना हमेशा के लिए सपना ही रह जायेगा।

यह जानकारी केजीएमयू के कुलपति ले.ज. डॉ बिपिन पुरी ने पत्रकारों से वार्ता में जानकारी देते हुए कही। उन्‍होंने बताया कि केजीएमयू में ऐसे स्‍टूडेंट की संख्‍या 37 हैं, इन विद्यार्थियों द्वारा अब तक एमबीबीएस उत्‍तीर्ण न कर पाना एक बड़ी दिक्‍कत है। उन्‍होंने अपील की कि उन्‍हें दिये जा रहे एक और मौका अंतिम होगा। उन्‍होंने कहा कि इतने लम्‍बे समय से परीक्षा पास न कर पाना एक गंभीर विषय है, इसके लिए सरकार से 2019 में गाइडलाइन्‍स भी जारी हो चुकी हैं। डॉ पुरी ने कुलपति के रूप में अपने दो साल के कार्यकाल पूर्ण होने के मौके पर आयोजित पत्रकार वार्ता में अपने दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हमने पेशेंट केयर से लेकर स्‍टूडेंट की पढ़ाई तक के क्षेत्र में बेहतरी के लिए अनेक कदम उठाये हैं, यह कदम लगातार आगे बढ़ रहे हैं, आने वाले एक से डेढ़ माह का समय हमारे लिए अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि इसी अवधि में नैक की टीम का दौरा होना है जो कि विश्‍वविद्यालय का ग्रेड तय करती है।

नैक की ग्रेडिंग का सर्वाधिक महत्‍व है क्‍योंकि उनकी टीम विश्‍वविद्यालय द्वारा किये जा रहे कार्यों की परख करती है और उसके अनुसार रिपोर्ट तैयार करती है। उन्‍होंने कहा कि हमने अपने शिक्षकों, पैरामेडिकल स्‍टाफ, नर्सों सहित सभी कर्मियों से अपील की है कि हम अपने कार्य को पूरी लगन और ईमानदारी से करें जिससे नैक की टीम के इंस्‍पेक्‍शन की इस अग्निपरीक्षा में सफल हो सकें, उन्‍होंने इस सम्‍बन्‍ध में मीडिया से भी सहयोग की अपील की।

केजीएमयू की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्‍होंने कहा कि यह हमारी कार्यक्षमता का परिणाम है कि यहां लिवर ट्रांसप्‍लांट शुरू होने के बाद से हमने अब तक 16 लिवर ट्रांसप्‍लांट किये हैं, यह प्रगति दिल्‍ली एम्‍स से भी बेहतर है। इसी प्रकार मंकी पॉक्‍स के लिए केजीएमयू को नोडल सेंटर बनाया गया है, यहां मंकी पॉक्‍स की पुष्टि के लिए जांच की सुविधा है। इसी प्रकार हम न्‍यूरो क्रिटिकल केयर में थ्रॉम्‍बोसिस को ठीक करने का कार्य कर रहे हैं, यानी हम ब्रेन स्‍ट्रोक वाले मरीज, जो कि अटैक पड़ने के बाद गोल्‍डन आवर में हमारे पास पहुंच जाते हैं उनको पूर्व स्थिति में लाने में सफल होते हैं। उन्‍होंने बताया कि इसी प्रकार कार्डियोथोरेसिक और वैस्‍कुलर सर्जरी में हमारा सेटअप लगभग तैयार है, बस थोड़ा सा कार्य बाकी है, इसके बाद इसका उद्घाटन करके हम ये सुविधा दे सकेंगे।

डॉ पुरी ने बताया कि इसी प्रकार हमारे यहां कई विभागों में अलग-अलग कैंसर का इलाज किया जाता है, लेकिन इनमें आपस में तालमेल नहीं था, अब हमने इन सबका एक साथ समन्‍वय के साथ कार्य करना प्रारम्‍भ किया है। उन्‍होंने बताया कि कैंसर का इलाज कराने वाले मरीजों को अपनी प्रगति दिखाने या फॉलोअप के लिए बार-बार केजीएमयू के चक्‍कर न लगाने पड़ें इसके लिए हमने टेलीमेडिसिन के माध्‍यम से उन्‍हें यह सुविधा उनके घर के नजदीक दी है। उन्‍होंने बताया कि इसके तहत वे अपने घर की नजदीक की पीएचसी-सीएचसी में जाकर वहां मौजूद डॉक्‍टर की मदद से टेलीमेडिसिन के जरिये हम तक अपनी बात पहुंचाता है, जिससे उसे हर बार केजीएमयू आने की आवश्‍यकता नहीं पड़ती है।

उन्‍होंने बताया कि केजीएमयू से अंदर एक विभाग से दूसरे विभाग तक जाने में दूरी एक बड़ी समस्‍या है, इस समस्‍या के समाधान के लिए ही हमने गोल्‍फ कार्ट की व्‍यवस्‍था की है, इस समय परिसर में दान में मिलीं छह गोल्‍फ कार्ट मरीजों को इधर से उधर ले जाने के कार्य में लगी हैं, उन्‍होंने कहा कि मैं मीडिया के माध्‍यम से अपील करना चाहता हूं कि कम्‍पनियां हमें और गोल्‍फ कार्ट दान दें।

उन्‍होंने बताया कि अब फैकल्‍टी की चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया गया है। उन्‍होंने बताया कि अपनी कमियों को सुधारने के दृष्टिकोण से हमने पेशेंट से फीड बैक लेना पहले ही शुरू कर दिया था जिसमें मरीज से इलाज के दौरान केजीएमयू में उन्‍हें कैसा अनुभव हुआ यानी डॉक्‍टर, कर्मचारियों का व्‍यवहार आदि कैसा था, इसी प्रकार अब स्‍टूडेंट से भी फीडबैक लेना शुरू किया गया है जिसमें उससे पूछा जा रहा है कि उन्‍हें शिक्षा के दौरान किन प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ा, किन बातों में दिक्‍कत आयी।

उन्‍होंने बताया कि केजीएमयू को चिकित्‍सा शिक्षा की ट्रेनिंग का नोडल सेंटर बनाया गया है। इसके जरिये ट्रेनिंग करने के लिए हमारे यहां बाहर से स्‍टूडेंट्स आते हैं। उन्‍होंने बताया कि हमने एक प्‍लेसमेंट सेल बनाया है जिसमें यहां से उत्‍तीर्ण होने वाले चिकित्‍सा शिक्षा, पैरामेडिकल, नर्सिंग आदि के छात्रों को उनके पुनर्वास के लिए उनके लिए बेहतर नौकरी आदि के बारे में उनकी मदद की जायेगी। उन्‍होंने कहा कि केजीएमयू के कम्‍युनिटी रेडियो ‘केजीएमयू गूंज’ के लिए मैं विज्ञापनदाताओं से अपील करता हूं कि वे विज्ञापन का सहयोग दें, ताकि इसका संचालन होता रहे, क्‍योंकि अब इसे विश्‍वविद्यालय अपने खर्च से नहीं चला सकता है।

उन्‍होंने पिछले दिनों एक संकाय सदस्‍य की गंभीर बीमारी से हुई मौत का जिक्र करते हुए कहा कि हमने डॉक्टरों व सभी कर्मियों के लिए हेल्‍थ चेकअप की व्‍यवस्‍था शुरू की है, जिसके तहत 35 वर्ष की आयु के बाद कौन से चेकअप कब होने हैं, इसे कराना सभी के लिए अनिवार्य है। इसकी वजह हमें अपने चिकित्‍सकों व कर्मचारियों के स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर रखना है, क्‍योंकि जब वे ही अस्‍वस्‍थ रहेंगे तो मरीजों की सेवा कैसे करेंगे। इस दौरान पत्रकारों ने कुलपति के समक्ष केजीएमयू पर मरीजों का लोड, एक्‍मो मशीन, डेंटल में परचा बनने की प्रक्रिया में अव्‍यवहारिकता, केजीएमयू की रैकिंग, ट्रॉमा सेंटर में मरीजों के परिजनों से दुव्‍यर्वहार जैसे कई मुद्दों पर सवाल रखे जिनके बारे में कुलपति ने शीघ्र समाधान करने की बात कही।पत्रकार वार्ता में प्रति कुलपति प्रो विनीत शर्मा व रजिस्‍ट्रार आशुतोष द्विवेदी भी उपस्थित थे। इनके अतिरिक्‍त मुख्‍य चिकित्‍सा अधीक्षक प्रो एसएन संखवार, प्रो एके त्रिपाठी, प्रो एपी टिक्‍कू, डॉ डी हिमांशु, डॉ सुधीर सिंह सहित कई अन्‍य फैकल्‍टी भी इस दौरान उपस्थित थीं।

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