Tuesday , July 27 2021

विभिन्‍न संक्रमणों की खोज में केजीएमयू ने लगायी लम्‍बी छलांग

-माइक्रोबायोलॉजी विभाग में MALDI-TOF MS मशीन का उद्घाटन
प्री ट्रायल में 3000 टेस्‍ट सफल रहने के बाद किया गया उद्घाटन

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय (केजीएमयू) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने विभिन्‍न प्रकार के संक्रमण की खोज में लम्‍बी छलांग लगायी है, मैट्रिक्स-असिस्टेड लेजर डेसोरेशन इओनाइजेशन-टाइम ऑफ फ्लाइट मास स्पेक्ट्रोमेट्री (MALDI-TOF MS) विधि से अनेक प्रकार के ऐसे संक्रमण खोज निकाले हैं जिनके बारे में अभी तक पता ही नहीं था, इसका सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि मरीजों को सटीक इलाज मिल सका जिससे वे स्‍वस्‍थ हो गये।

आज बुधवार को केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा मैट्रिक्स-असिस्टेड लेजर डेसोरेशन इओनाइजेशन-टाइम ऑफ फ्लाइट मास स्पेक्ट्रोमेट्री  (MALDI-TOF MS)  इन क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी विषय पर कार्यशाला एवं सी0एम0ई0 का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एमएलबी भट्ट ने चिकित्सा विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में नवीन विकसित MALDI-TOF MS सुविधा का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह सुविधा चिकित्सा विश्वविद्यालय के लिए मील का पत्थर साबित होगी जिससे अब मरीजों को सटीक जांचे और बेहतर उपचार उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने इसी प्रकार के प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं के आयोजन पर जोर दिया।

इस अवसर पर माइक्रोबायोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो0 अमिता जैन ने बताया कि नई मशीनों एवं तकनीकों से विभाग में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं, साथ ही बैक्टिेरियल, फंगल एवं क्षय रोग जैसे संक्रमणों की पहचान एवं निदान करने में ये उपयोगी साबित हुई हैं। MALDI-TOF MS तकनीक अन्य तकनीकों के मुकाबले कम खर्चीली एवं शीघ्र परिणाम देने वाली है।

कार्यक्रम की आयोजन सचिव एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग की सह-आचार्य डॉ शीतल वर्मा ने बताया कि उनके विभाग द्वारा MALDI-TOF MS मशीन के उद्घाटन से पूर्व तीन हजार टेस्ट प्री ट्रायल के तौर पर किये जा चुके हैं। नई मशीन द्वारा नए संक्रमणों जैसे कि Candida auris, Elizabethkingia anopheles, Pseudomonas oryzihabipans, kocuria kristinae, , Onchrobactrum anthropi इत्यादि का सटीक इलाज किया गया तथा भविष्य में नए जीवाणुओं को पहचान किए जाने के साथ ही उसका इलाज किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि मशीन के शीघ्र निदान करने की वजह से केजीएमयू का संक्रमण नियंत्रण कार्यक्रम सशक्त होगा और मशीन के प्रयोग से एंटीबायोटिक्स के गलत इस्तेमाल पर भी नियंत्रण किया जा सकेगा तथा मृत्यु दर, स्वास्थ्य सुविधाओं पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी।

आज की सीएमई में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिनमें से अधिकांश ने मशीन को संचालित करने का प्रशिक्षण लिया। उक्त कार्यक्रम में डॉ विमला वैंकटेश, डॉ आरके कल्याण, डॉ प्रशांत गुप्ता एवं डॉ शीतल वर्मा ने वक्ता के तौर पर प्रतिभाग किया। इस अवसर पर चिकित्सा विश्वविद्यालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो0 एसएन संखवार, डीन, रिसर्च सेल प्रो आरके गर्ग, प्रॉक्टर प्रो0 आरएएस कुशवाहा, एसजीपीजीआई की प्रो0 उज्‍ज्‍वला घोषाल, डॉ रंगमई मारक तथा राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की डॉ विनीता मित्‍तल सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे।

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