-लिवर सिरोसिस के मरीजों को अब उनकी जरूरत के अनुरूप दवा का डोज देना होगा आसान
-मेडिसिन विभाग की लिवर एवं पित्त रोग इकाई ने डॉ सुधीर वर्मा के नेतृत्व में की HVPG प्रक्रिया

सेहत टाइम्स
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में हेपेटोलॉजी सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, मेडिसिन विभाग की लिवर एवं पित्त रोग इकाई ने लिवर सिरोसिस के रोगियों के लिवर की स्थिति का सटीक आकलन करने की लिवर प्रेशर का प्रत्यक्ष मापन प्रक्रिया पहली बार केजीएमयू में हेपेटिक वेनस प्रेशर ग्रेडिएंट (HVPG) द्वारा सफलतापूर्वक की गयी। इस प्रक्रिया की सुविधा शुरू होने से अब सिरोसिस के इलाज में प्रेशर के अनुरूप दवाओं की खुराक निर्धारित करना संभव हो सकेगा।
यह प्रक्रिया डॉ. सुधीर वर्मा के नेतृत्व में उनकी समर्पित टीम द्वारा संपन्न की गई। मुख्य चिकित्सकीय टीम में डॉ. अमित आनंद, प्रो. विवेक कुमार, डॉ. अजय कुमार पटवा, डॉ. संजीव वर्मा एवं डॉ. उमंग महेश्वरी शामिल थे। नर्सिंग असिस्टेंस में नर्सिंग इंचार्ज सीमा सोनकर, नर्सिंग ऑफिसर मनोज गौतम एवं शीतल की भूमिका महत्वपूर्ण रही। तकनीकी सहयोग में आकाश वर्मा एवं मुन्ना गुप्ता शामिल थे।
डॉ सुधीर वर्मा ने बताया कि 40 वर्षीय मरीज को अत्यधिक शराब के सेवन से लिवर की खराबी (Alcoholic Hepatitis) के कारण एक्यूट-ऑन-क्रॉनिक लिवर फेल्योर (ACLF) की स्थिति में लिवर एवं पित्त रोग इकाई में भर्ती किया गया था। उन्होंने बताया कि जीवन शैली में बदलाव, ज्यादा शराब के सेवन के चलते फैटी लिवर, हेपेटाइटिस बी, सी होने से लिवर सिरोसिस की समस्या बढ़ती जा रही है, इसके मरीज लेट स्टेज मेे आ रहे हैं, जिससे लिवर सिरोसिस की गंभीर स्थिति हो जाती है, उन्होंने बताया कि लिवर सिरोसिस में खून की नलियां सिकुड़ने से और लिवर में सूजन होने से लिवर का प्रेशर बढ़ जाता है, लिवर का प्रेशर बढ़ने से लिवर के चारों ओर वेसल्स होती हैं वे फट जाती हैं, इससे ब्लीडिंग, खून की उल्टी होती है, और ज्यादा प्रेशर बढ़ने पर पेट में पानी और दूसरी तरह की समस्याएं बढ़ जाती हैं।
डॉ वर्मा ने बताया कि अभी तक हम लोग प्रेशर को घटाने की दवा तो देते थे, लेकिन प्रेशर की माप न होने से दवा के डोज को अनुमान के आधार पर फिक्स करते थे, अब इस प्रेशर को नापने के लिए हमारे संस्थान में मशीन उपलब्ध होने से HVPG प्रक्रिया शुरू की गयी है।
उन्होंने बताया मरीज पिछले 10 वर्षों से शराब का अत्यधिक सेवन कर रहे थे। जिस वजह से उनका पीलिया बहुत ज्यादा बढ गया, पेट में पानी आ गया था। उन्होंने बताया कि फिर हम लोगों ने एंडोस्कोपी करके देखा तो लिवर की नसें फूली हुई थीं, इनका दवा दी गयी, जिसके बाद उस दवा से कितना असर हुआ इसे देखने के लिए प्रेशर को मापने की HVPG प्रक्रिया की। इस प्रक्रिया के तहत गर्दन की नस से एक छोटा सा कैथेटर डाल कर लिवर का प्रेशर मापा जाता है। इसी प्रक्रिया से पता चला कि इस मरीज के लिवर के प्रेशर का मान 17 mmHg था, जबकि एक सामान्य व्यक्ति में यह प्रेशर 5 mmHg तक होता है, यानी मरीज का लिवर प्रेशर तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ा हुआ था। डॉ वर्मा ने बताया कि सटीक प्रेशर पता होने से मरीज की दवा के डोज को बढ़ाया गया है।
यह उपलब्धि केजीएमयू के इतिहास में पहली बार है जब लिवर प्रेशर का प्रत्यक्ष मापन किया गया। HVPG मापन की शुरुआत लिवर सिरोसिस के मूल्यांकन एवं प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद एवं मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. वीरेन्द्र आतम ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर टीम को बधाई दी और केजीएमयू में उन्नत लिवर सिरोसिस उपचार सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में इस प्रयास की सराहना की।

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