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बच्‍चों की मौतों की एक बड़ी वजह हैं झोलाछाप डॉक्‍टर

-जेई, एईएस की तरह बाल मृत्‍यु के दूसरे कारकों के खिलाफ भी चलेगा अभियान

आलोक कुमार

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आलोक कुमार ने आज कहा कि प्रदेश में गत तीन वर्षों में संचारी रोग नियंत्रण अभियानों के परिणामस्वरूप एक्यूट एन्सीफेलाइटिस सिन्ड्रोम, जापानी एन्सीफेलाइटिस तथा दिमागी बुखार पर नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि इन अभियानों से प्रेरणा लेकर बाल मृत्यु के कारक अन्य रोगों जैसे डिप्थीरिया, डायरिया और निमोनिया की रोकथाम के लिए भी अभियान चलाकर जानकारी और प्रचार की योजना बनायी जाय।

आलोक कुमार आज यहां लाल बहादुर शास्त्री भवन (एनेक्सी) स्थित सभाकक्ष में संचारी रोग नियंत्रण अभियान से जुड़े चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे। बैठक में उन्होंने अधिकारियों से अन्य बाल रोगों से प्रभावित होने वाले प्रदेश के क्षेत्रों का भौगोलिक चार्ट बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बाल मृत्यु के आंकड़ों में कमी लाने के लिए अन्य रोगों पर भी नियंत्रण आवश्यक है, इसलिए बाल मृत्यु के कारणों का विस्तृत आंकलन भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिस रोग के उपचार के लिए सरकारी संसाधन उपलब्ध हैं उस रोग की जानकारी, बचाव और उपचार का प्रचार भी आवश्यक है। उन्होंने बाल मृत्यु के बड़े कारण, डायरिया और निमोनिया जैसे रोगों पर नियंत्रण के लिए विशेष बल दिया।

विशेष सचिव स्वास्थ्य, हेकाली झिमोमी ने बैठक में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के निर्देश पर इस संदर्भ में व्यवस्था बनाये जाने को कहा। एडिशनल डायरेक्टर परिवार कल्याण डॉ लिली सिंह ने बैठक में अवगत कराया कि ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टर बाल मृत्यु की बहुत बड़ी वजह बनते हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों को बच्चों को डायरिया में कौन सा फ्लूड कितनी मात्रा में देना है इसकी जानकारी नहीं होती और गलत इलाज बच्चे के लिए घातक हो जाता है।

बैठक में डॉ वेद प्रकाश, अनुप्रिया, डॉ कपूर ने भी इस संदर्भ में तथ्यों एवं आंकड़ों से अवगत कराया। संयुक्त निदेशक डॉ विकासेन्दु अग्रवाल ने बैठक में संचारी रोग नियंत्रण अभियान के जनपदवार विवरण की जानकारी दी।