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यूरिनरी ब्लैडर के ट्यूमर को रेडियोथेरेपी व कीमोथेरपी से छोटा कर सर्जरी से भी निकालना संभव

पेशाब से खून आने पर दूरबीन विधि से ट्यूमर निकालना सबसे ज्यादा सुरक्षित

 

लखनऊ. यूरिनरी ब्लैडर में अगर ट्यूमर हो गया है तो यह आवश्यक नहीं हैं कि पूरा ब्लैडर निकलना पड़े. ऐसे केस भी हैं जिसमें इसे रेडियो थेरेपी और कीमो थेरेपी के माध्यम से आकार में छोटा कर लिया जाता है फिर उसके बाद सर्जरी करके उस छोटे से हिस्से को निकालकर ब्लैडर ट्यूमर रहित कर दिया जाता है. जिससे पूरे ब्लैडर को निकालने की जरूरत नहीं पड़ती जिससे मरीज जीवन का स्तर बढ़ जाता है।

 

यह महत्वपूर्ण जानकारी आज 29 अप्रैल को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कंवेंशन सेंटर में यूरो-अंकोकान 2018, दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल के डॉ0 राहुल कृष्नार्ति  तथा डॉ0 गणेश बख्शी द्वारा यूरिनरी ब्लैडर के ट्यूमर के संदर्भ में दी गयी.

 

डॉ एचएस पाहवा

सम्मेलन के आयोजन सचिव व सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान, लखनऊ के चिकित्सा अधीक्षक डॉ0 एच0एस0 पाहवा ने बताया कि उपरोक्त अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी में यूरो-जेनिटल कैन्सर के 4 अंतर्राष्ट्रीय एवं 40 से अधिक राष्ट्रीय विशेषज्ञो द्वारा भारतीय परिपेक्ष्य में मूत्र रोग सम्बंधी विकारो के संदर्भ में नए सस्ते परंतु कारगर तरीकों, और अन्य उपलब्ध अत्याधुनिक निदानों पर चर्चा की गयी.

 

सम्मेलन में डॉ0 संजीव मिश्रा, निदेशक, एम्स, जोधपुर  द्वारा यूरिनरी ब्लैडर के विभिन्न आधुनिक तरीकों के संदर्भ में बताया गया। केजीएमयू के डॉ0 अपुल गोयल ने बताया कि बेहतर यही रहता है कि यदि पेशाब से खून आये तो शुरूआती स्टेज में ही ब्लैडर के ट्यूमर को दूरबीन विधि से निकाल सकते हैं, जिससे मरीजों को इनवेसिव सर्जरी नहीं करानी पड़ती है।

 

डॉ0 अनंत कुमार, मैक्स अस्पताल, नई दिल्ली द्वारा रोबेटीक सर्जरी द्वारा ब्लैडर के ट्यूमर को निकालने की विधि के संदर्भ में बताया गया। राजीव गाँधी कैंसर इंस्टिट्यूट दिल्ली के डॉ0 सुधीर रावल ने बताया कि एडवांस स्टेज के यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर के मरीजों की सर्जरी में ब्लैडर निकलने के पश्चात आँतों से और अन्य जगह के ऊतकों से  नया ब्लैडर बनाया जाता है जिससे मरीज का जीवन स्तर बढ़ जाता है.

 

डॉ0 प्रमोद कुमार गुप्ता, कैंसर विशेषज्ञ, सुपर स्पेशिएलिटी कैंसर संस्थान, लखनऊ द्वारा मेटास्टेटिक प्रोस्टेट कैंसर के उपचार की आधुनिक विधि के संदर्भ में बताया गया। उन्होंने बताया कि कीमोथैरेपी, रेडियो थैरेपी एवं इम्यूनोथेरेपी के द्वारा मेटास्टेटिक प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों के जीवन में नई आशा जगी है एवं जीवन स्तर बढ़ गया है।

 

सम्मेलन में प्रोस्टेट कैंसर की बीमारी में interactive ट्यूमर बोर्ड का आयोजन किया गया जिसमें करीब 60 चिकित्सकों द्वारा आपस में बातचीत करके भारतीय परिपेक्ष्य में  कॉस्ट इफेक्टिव अत्याधुनिक उपचार देने के संदर्भ में चर्चा की गई। सम्मेलन में चिकित्सकों द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार का संगोष्ठी किए जाने हेतु सहमति प्रदान की गई। उत्तर प्रदेश राज्य में प्रथम बार जेनाइटल यूरिनरी जैसे   गुर्दा, यूरिनरी ब्लैडर, टेस्टिस, प्रोस्टेट और पेनिस के कैंसर के ऊपर सम्मिलित रूप से यूरोलॉजिस्ट, रेडिएशन ऑंकोलॉजिस्ट, मेडिकल ऑंकोलॉजिस्ट, सर्जिकल ऑंकोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट द्वारा विस्तार से विचार विमर्श किया गया l सम्मेलन के दौरान जर्मनी से आए हुए डॉक्टर आर्नुल्फ स्टेंजल ने महिलाओं में ब्लैडर ट्यूमर की सर्जरी के उपरांत पेशाब की थैली के पुनर्निर्माण तथा नव निर्माण की की सर्जरी की विधियों के बारे में चिकित्सकों को अवगत कराया.

 

सम्मेलन का आयोजन किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, सुपर स्पेशलिटी कैन्सर संस्थान, सी0जी0 सिटी, लखनऊ, एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ, जेनिटो-यूरिनरी कैन्सर सोसाइटी ऑफ़ इंडिया लखनऊ और लखनऊ यूरोलॉजी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है।

 

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