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आज के प्रतियोगी समय में बहुत महत्‍व है भगवद् गीता की शिक्षा का

‘भगवद् गीता-सेइंग इट द सिंपल वे’ के लेखक विजय सिंगल की किताब का विमोचन

 

लखनऊ आज के प्रतियोगी समय में भगवद् गीता की शिक्षाओं का बड़ा महत्व है। इसमें जीवन के उद्देश्य, मानव अस्तित्व, भौतिक उपलब्धियों और आध्यात्मिक संतुष्टि आदि के बारे में विस्तार से व्याख्या की गयी है।

 

लेखक विजय सिंगल ने लखनऊ में मंगलवार को यहां अपनी पुस्‍तक ‘भगवद् गीता-सेइंग इट द सिंपल वे’ के विमोचन के मौके पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कहा कि अर्जुन को अपना कर्तव्य निभाने की शिक्षा देते हुए, भगवान कृष्ण ने आत्म-साक्षात्कार के कई तरीकों का वर्णन किया है, जैसे कि कर्म योग, ज्ञान योग, ध्यान योग आदि। हालांकि, उनके अनुसार, पथ बहुत ही आसान और प्रभावी है और वह है भक्ति या भक्ति योग। ईश्वर के समक्ष पूर्ण समर्पण से ही वास्तविक मानसिक शांति प्राप्त होती है। उन्‍होंने कहा कि गीता का संदेश किसी एक वर्ग विशेष के लिए नहीं है, वरन् इसकी शिक्षाएं सभी पर समान रूप से लागू होती हैं, भले ही कोई किसी भी लिंग, जाति या संप्रदाय का हो।

 

उन्‍होंने कहा कि गीता में आत्म-साक्षात्कार के लिए वर्णित पथ एक्सक्लूसिव नहीं हैं। इसमें कृष्ण पूरे विश्वास से कहते हैं- सभी पथ मेरी ही ओर आते हैं। व्यक्ति अपनी प्रकृति और परिस्थितियों के अनुसार किसी भी पथ को चुनने के लिए स्वतंत्र है। किसी पर कोई बात थोपी नहीं गयी है। महाप्रभु, जैसा कि श्लोक 18.63 के अंत में अर्जुन से कहते भी हैं- मैंने यह ज्ञान तुम्हें बता दिया है, जो कि सभी रहस्यों से बड़ा रहस्य है। इसके बारे में गंभीरता से सोचो, और फिर जैसा चाहो वैसा करो। इस प्रकार, महाप्रभु श्री कृष्ण ने मानव जाति को एक जागरूक, संतुलित, सक्रिय और समर्पित जीवन जीने का मंत्र गीता के माध्यम से दिया है।

 

आपको बता दें कि पूर्व ब्यूरोक्रेट, विजय सिंगल आध्यात्मिकता, दर्शन,  मनोविज्ञान,  धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में कई किताबें लिख चुके हैं। वे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखते हैं। इनकी पहली किताब, बिहाइंड साइकोलॉजीः सर्चिंग फॉर द रूट्स का प्रकाशन वर्ष 2002 में हुआ था। तब से, इन विषयों पर वे कई किताबें लिख चुके हैं।