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कला के मंच पर चिकित्‍सा को सम्‍मान

-‘राम की शक्ति पूजाकी नौटंकी विधा में मनमोहक तरीके से प्रस्‍तुति

-होम्‍योपैथी में रिसर्च व उपचार में उत्‍कृष्‍ट कार्य के लिए डॉ गिरीश गुप्‍ता को सम्‍मान

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। बिम्‍ब सांस्‍कृतिक समिति लखनऊ के तत्‍वावधान में शुक्रवार 3 फरवरी को यहां गोमती नगर स्थित संगीत नाटक अकादमी की बाल्‍मीकि रंगशाला में सूर्यकान्‍त त्रिपाठी ‘निराला’ की चर्चित रचना पर आधारित लोककला नौटंकी के रूप में ‘राम की शक्ति पूजा’ का मंचन किया गया। इस रंगमंच की खास बात यह रही कि कला के इस मंच से चिकित्‍सा की होम्‍योपैथी विधा में रिसर्च और उपचार पर 40 वर्षों से कार्य कर रहे वरिष्‍ठ होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक गौरांग क्‍लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्‍योपैथिक‍ रिसर्च के संस्‍थापक डॉ गिरीश गुप्‍ता को आज की प्रस्‍तुति के लेखक राम किशोर नाग द्वारा सम्‍मानित किया गया। कला के मंच से चिकित्‍सक को सम्‍मान आमतौर पर नहीं होता है, इस बात का जिक्र सम्‍मान ग्रहण करने के बाद डॉ गिरीश ने मंच से अपने सम्‍बोधन में भी किया।

डॉ गिरीश गुप्‍ता

डॉ गुप्‍ता ने कहा कि मुझे नहीं पता कि किस लिए आपने सम्‍मानित किया। 40 साल से मेरे द्वारा किये जा रहे काम का सम्‍मान इस मंच से होगा, यह मेरी कल्‍पना से परे है। इसके लिए मैं हृदय से धन्‍यवाद देता हूं। उन्‍होंने कहा कि आपने इस मंच से शक्ति पूजा का जो संदेश दिया है, मुझे लगता है कि आज की तारीख में भारत वर्ष में इसकी सबसे ज्‍यादा आवश्‍यकता है। सभी को शक्ति पूजा में मन लगाकर अपने भारत वर्ष को, अपनी सनातन संस्‍कृति का भारत और विश्‍व में ऐसा झंडा लहराना चाहिये कि भारत फि‍र से विश्‍व गुरु बन जाये।

‘राम की शक्ति पूजा’ में सीता स्‍वयंवर सहित अनेक प्रसंगों की प्रस्‍तुति कलाकारों ने बहुत अच्‍छे ढंग से दी, अंत में रावण को मारने के लिए राम द्वारा देवी दुर्गा यानी शक्ति की पूजा से नौटंकी का समापन हुआ। कलाकारों ने मंच पर इतने सुन्‍दर तरीके से प्रस्‍तुत किया कि उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्‍ध होकर शुरुआत से अंत तक शांत बैठे देखते रहे, दर्शकों के बीच शांति की लय प्रस्‍तुति के अंत में तालियों की गड़गड़ाहट से टूटी। गुरुदत्‍त पाण्‍डेय द्वारा निर्देशित तथा महर्षि कपूर द्वारा सहनिर्देशित इस प्रस्‍तुति में प्रत्‍येक कलाकार ने अपनी भूमिका के साथ न्‍याय किया। कुछ कलाकारों ने दोहरी भूमिका भी निभायी।

कलाकारों में राम की भूमिका बृजेश कुमार चौबे ने तथा सीता की भूमिका इशिता वार्ष्‍णेय ने निभायी जबकि शिव की भूमिका में चंद्रकांत सिंह तथा पार्वती और दुर्गा की दोहरी भूमिका कंचन शर्मा ने निभायी। इसके अतिरिक्त लक्ष्मण की भूमिका शुभरेश कुमार शर्मा, हनुमान की भूमिका महर्षि कपूर, रावण की भूमिका गिरिराज शर्मा, विभीषण की सुशील पटेल, जामवंत की राकेश खरे ने तथा बाल गणेश की भूमिका दक्ष कपूर ने निभायी। इसी प्रकार राम पक्ष के सैनिकों की भूमिका डॉ अरुण त्रिपाठी, सुहेल शेख, गौरव वर्मा, उत्कर्ष मणि त्रिपाठी और सूर्यांश प्रताप सिंह ने जबकि रावण पक्ष के सैनिकों की भूमिका राहुल गौतम, रोहित कुमार, अजीत कुमार ने निभाई, सीता की सखी की भूमिका में सरिता कपूर, हरि‍तिमा जायसवाल, नियति नाग और खुशी अरोड़ा ने निभाई।

मंच के पीछे से जिन लोगों की खास भूमिका रही उनमें सेट आशुतोष विश्वकर्मा, मेकअप शहीर अहमद, लाइट तमाल बोस, निर्देशन के साथ ही संगीत संयोजन एवं दृश्य परिकल्पना गुरुदत्त पाण्‍डेय ने सम्‍भाला।  संगीत वाद्य में हारमोनियम पर अरविंद कुमार वर्मा, नक्कारा पर मोहम्मद सिद्दीकी, ढोलक पर मोहम्मद माजिद थे। इसी प्रकार शंख वादक नीलेश बनर्जी, संगीत गायन गुरुदत्त पाण्‍डेय व मोनिका अग्रवाल, मंच व्यवस्था गिरिराज शर्मा, गौरव वर्मा, वस्त्र विन्यास इशिता वार्ष्णेय का था।  

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