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सम्प्रदाय नहीं, पूरे विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम की दिव्यता प्रदान करने की ताकत रखने वाली सोच है हिन्दू

-नववर्ष चेतना समिति के नवसंवत्सर कार्यक्रम के प्रथम दिन महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द ने बहायी ज्ञान की गंगा

सेहत टाइम्स

लखनऊ। वस्तुत: हिन्दू कोई एक शब्द नहीं है, कोई एक सम्प्रदाय भी नहीं है। हिन्दू बहुत व्यापक, बहुत उदार, बहुत खुद्दार ऐसी परम्परागत प्रेरणा है, जो जीवनमूल्यों के साथ-साथ मानवीय मूल्यों तक और स्वयं के भीतर स्थापित चेतना को दूसरोें की चेतना के साथ अभिन्नता से जोड़कर पूरे विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम की दिव्यता प्रदान करने की ताकत रखने वाली सोच है। वस्तुत: यह सोच आज सिर्फ भारत नहीं, अपने समाज नहीं, बल्कि बिना किसी संकीर्णता के, तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के, तुष्टिकरण की संकीर्ण सी सोच को आवरणों को हटाकर खुले मन से सोचे-विचारें तो लोगों को लगेगा और स्वीकार करना पड़ेगा कि हिन्दू किसी एक वर्ग नहीं, किसी एक क्षेत्र की नहीं, किसी एक देश की नहीं, अपितु पूरे विश्व की आवश्यकता है।

ये विचार महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज ने नवसंवत्सर 2083 के प्रथम दिन चैत्र प्रतिपदा शुक्ल पक्ष (19 मार्च को) को राजधानी लखनऊ में रायबरेली रोड स्थित डॉ भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में नववर्ष चेतना समिति द्वारा प्रतिवर्ष हिन्दू नववर्ष के आगमन के मौके पर आयोजित किये जाने वाले वार्षिक समारोह के प्रथम दिन व्यक्त किये। समिति द्वारा स्वामी ज्ञानानंद जी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने की। समारोह का आयोजन बीबीएयू के सहयोग से किया गया।

हिन्दू नववर्ष विक्रमी सम्वत को मनाने की भावना जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य की पूर्ति के लिए 17 वर्ष पूर्व गठित नववर्ष चेतना समिति के नवसंवत्सर के आगमन पर होने वाले दो दिवसीय वार्षिक समारोह की औपचारिक शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 (गुरुवार 19 मार्च, 2026) को हुई। इस दिन के कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्दजी महाराज उपस्थित रहे।

स्वामीजी ने कहा कि एक समय था जब ऐसा वातावरण बना दिया गया था कि हिन्दू शब्द बोलना, हिन्दू शब्द लिखना, हिन्दू कहना मुश्किल था, ये वातावरण ऐसे लोगों द्वारा बना दिया गया था, जिन्होंने कभी पढकर नहीं देखा, कभी सोच कर नहीं देखा, कभी अपने संकीर्णता के उपनेत्रों को उतार कर नहीं देखा। उन्होेंने समझने का प्रयास ही नहीं किया कि हिन्दू के पीछे कितनी गहराई है, कितनी ऊंचाई है, कितनी व्यापकता है, कितना विराट दर्शन है।

उन्होंने कहा कि सूर्य के आगे प्राय: बादल आ जाते हैं, लेकिन बादल सूर्य को सदा-सदा के लिए आच्छादित करके रख पायें, यह क्षमता बादलों में नहीं है, कभी न कभी अनुकूल हवाएं चलती हैं, बादल छिन्न-भिन्न हो जाते हैं, और सूर्य का प्रकाश सबके सामने आता है। इसी प्रकार एक कालखंड में तुष्टीकरण की नीतियों के बादल, स्वार्थगत राजनीति के बादल, संकीर्णता के बादल, भारतीयता के आलोक के बादल, अपनी सनातनी परम्परा के सूर्य के आगे छंटते हैं, यही इस समय भारत में हो रहा है।

उन्होंने कहा कि ईश्वर का आसन भी हिला होगा, जब 2013 में सरकार द्वारा संसद में एक बिल पेश कर दिया गया साम्प्रदायिक हिंसा निरोधक बिल। मुझे लगता है कि तब ईश्वर ने सोचा होगा कि अगर पांच साल और ऐसे लोगों के हाथों में उस देश की सत्ता चलती रही जो देश मेरी भी अवतरण स्थली है, जहां मैं अवतार लेकर आता हूं, ये लोग ऐसे देश की परम्परा ही नष्ट कर देंगे और फिर 2014 में परिवर्तन की बयार कहें या अनुकूलता की हवा चली। उस हवा ने तुष्टीकरण की नीतियों के बादल को हटाया, संकीर्णताओं के आवरण को क्षिन्न-भिन्न किया। आज हम देख रहे हैं कि हमारा राम मंदिर किस गरिमा के साथ हमारे राष्ट्र का सम्मान, हिन्दुत्व का सम्मान बनकर पूरे विश्व के सामने आया।

उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि इस वर्ष जब वंदेमातरम को 150 वर्ष हो चुके हैं, ऐसे समय मेेें नववर्ष चेतना समिति ने इस वर्ष के कार्यक्रम को इस विषय पर समर्पित किया है। समिति द्वारा 17 साल से किये जा रहे कार्य वास्तव में उसकी आदर्श पहल है। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि अंग्रेजी नववर्ष अच्छे-भलों को बहकाने वाला नववर्ष है लेकिन हमारा नववर्ष जब आता है तो बहके हुए भी ठहर जाते हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने बच्चों के लिए मकान, प्रतिष्ठान दें यह अच्छी बात है लेकिन इससे भी बढ़कर आज जरूरत इस बात की है कि हम अपने बच्चों को सनातन संस्कार दें। इस नववर्ष में यह संकल्प लें कि हम केंद्रों को खोलकर, अपने संस्थानों में ऐसा वातावरण बनायें जहां अपनी भारतीयता, राष्ट्रीयता, सनातन को बच्चों तक पहुंचायें।

युवाओं को ऐसे कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी दिखाने की जरूरत : डॉ गिरीश गुप्ता

कार्यक्रम की शुरुआत नववर्ष चेतना समिति के बारे में बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म के प्रदर्शन के साथ हुई। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन की परम्परा का निर्वहन किया गया। समिति के अध्यक्ष डॉ गिरीश गुप्ता ने अपने स्वागत भाषण में नववर्ष चेतना समिति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार 2009 में समिति के गठन के समय डॉ एससी रॉय ने उन्हें अध्यक्ष का दायित्व सौंपा। उन्होंने समिति द्वारा पिछले 17 वर्षों में किये गये विशेष प्रयासों से प्राप्त उपलब्धियों का संक्षेप में वर्णन करते हुए बताया कि आजाद भारत में सम्राट विक्रमादित्य को लोग भूल गये, अंग्रेजों ने उन्हें इतिहास में नहीं रखा। उन्होंने कहा कि समिति ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन गवर्नर राम नाइक के सहयोग से 2016 में विक्रम संवत के जनक सम्राट विक्रमादित्य पर डाक टिकट का विमोचन जारी कराने, लखनऊ में तत्कालीन महापौर संयुक्ता भाटिया के सहयोग से कोरोना काल के दौरान रायबरेली रोड पर सम्राट विक्रमादित्य पार्क की स्थापना की गयी।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा सम्राट विक्रमादित्य के बारे में उनके इतिहास के बारे में कैसे पता चले इसके लिए लखनऊ विश्वविद्यालय में तत्कालीन कुलपति प्रो एसपी सिंह के सहयोग और उनकी प्रेरणा मालवीय सभागार में सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें पूरे भारत वर्ष से आठ इतिहासकार, जिन्होंने विक्रमादित्य पर शोध किया, को बुलाया गया। उनसे मिली अधिकृत जानकारी को एकत्र करके एक पुस्तक सम्राट विक्रमादित्य का प्रकाशन किया गया। उन्होंने कहा कि एक और उपलब्धि, जो अभी पूरी नहीं हुई है लेकिन कोशिशों के अंतिम चरण में है, वह है सम्राट विक्रमादित्य की मूर्ति की स्थापना। उम्मीद है कि शीघ्र ही वह भी पूरी हो जायेगी।

उन्होंने मंच से ही खुले मन से स्वीकार किया कि आज के कार्यक्रम में मेहमानों की उपस्थिति उतनी नहीं है जितनी उन्होंने उम्मीद की थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के बौद्धिक कार्यक्रमों में युवाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी होनी चाहिये क्योंकि वे ही देश के भविष्य हैं। साथ ही कहा कि यहां कार्यक्रम में भाग लेने आया प्रत्येक व्यक्ति 10 लोग के बराबर हैं।

वंदेमातरम के खिलाफ की गयी थी साजिश : संजयजी

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संजयजी ने वंदे मातरम पर एक विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार के परिस्थितिकाल में अंग्रेजों के समय में वंदेमातरम की रचना हुई और फिर बाद में देश की आजादी का यह एक मूल मंत्र बन गया। उन्होंने बताया​ कि किस तरह तमिलनाडु विधानसभा में वंदे मातरम से पहले उर्दू का गीत गाने पर समझौता हुआ, फिर आधा गाने पर समझौता हुआ बाद में धीरे-धीरे
पूरा वंदेमातरम गायन ही समाप्त कर दिया गया। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ में जब यह विषय आया तो वहां से राष्ट्रगान की धुन मांगी गयी, लेकिन पता नहीं किस तरह की साजिश हुई कि संयुक्त राष्ट्र को वंदेमातरम की जगह जन गण मन…भेज दिया गया। जब पूछा गया कि कैसे इसकी अनुमति दे दी गयी तो कहा गया कि वंदेमातरम में कोई राग नहीं है और यह ऑर्क्रेस्ट्रा के साथ नहीं बज सकता है जबकि जन गण मन बज सकता है।

माता-पिता की जिम्मेदारी है कि बाबा को आउटडेटेड न समझें पौत्र : पवन सिंह चौहान

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने अपने सम्बोधन में अच्छे समाज और देश के निर्माण के लिए परिवार को समय देने का आह्वान किया, उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देना हमारी जिम्मेदारी है। आज जरूरत इस बात की है कि पौत्र बाबा को आउटडेटेड न समझें इसलिए यह माता-पिता की जिम्मेदारी है कि पौत्र को बाबा के साथ समय बिताना सिखाया जाये, इससे जहां बच्चा अपनी जड़ों को हमेशा याद रखेगा वहीं अच्छे संस्कारों को सीखेगा, परिवार के मूल्यों को जानेगा, अपनी संस्कृति को समझने का उसे अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि मेडीटेशन करें, एकादशी का व्रत रखें इससे आहार-विहार अच्छा रहेगा।

बाहरी नेटवर्क के चक्कर में अंदरूनी नेटवर्क से कट रहे : प्रो आके मित्तल

कार्यक्रम में बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्ववि​द्यालय के कुलपति प्रो आरके मित्तल ने आये हुए सभी लोगों का अभार जताते हुए कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि आप लोग हमारे विश्वविद्यालय परिसर में आये और हमें इस पुनीत कार्य में सहयोग देने का मौका दिया। प्रो मित्तल ने कहा कि आज हम बाहरी नेटवर्क को सर्च करते- करते अंदरूनी नेटवर्क से कट गये हैं। उन्होंने बताया कि वे अपने विश्वविद्यालय में छात्रों को किस प्रकार अपनी संस्कृति को बनाये रखने के लिए उन्हें नैतिक मूल्यों का निर्वहन करना सिखाने की दिशा में कदम उठाये जा रहे हैं। नववर्ष चेतना समिति के सचिव डॉ सुनील अग्रवाल ने कार्यक्रम में आये हुए अतिथियों को सम्बोधित करते हुए कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आभार जताया।

इस अवसर पर कंचन शुक्ला ने हिन्दू नववर्ष पर एक कविता पाठ कर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। कार्यक्रम में मंच संचालन की जिम्मेदारी समिति की सदस्य प्रियंका चौहान ने निभायी।