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A 200-gram smartphone is putting a 25-kilogram load on your neck

लखनऊ। क्या आप जानते हैं कि आपका स्मार्टफोन आपके हाथों को भले ही 200 ग्राम का वजन देता है, लेकिन यही स्मार्टफोन आपकी गर्दन को 25 किलो का बोझ देता है। ऐसे में मोबाइल पर घंटों बिताने वाले लोग सिरदर्द के साथ गर्दन-कंधे के दर्द के शिकार हो रहे हैं। ऐसे मरीजों को दर्द से स्थायी निजात दिलाने का कार्य संजय गांधी पीजीआई के एनेस्थीसिया विभाग द्वारा संचालित पेन क्लिनिक में किया जा रहा है।

इसकी जानकारी एनेस्थीसिया विभाग द्वारा शुक्रवार 13 मार्च को आयोजित पत्रकार वार्ता में विभागाध्यक्ष प्रो. संजय धीराज, प्रो संदीप खुबा, प्रो सुजीत गौतम तथा प्रो चेतना शमशेरी ने दी। विशेषज्ञों ने बताया कि दर्द विशेषज्ञ 14–15 मार्च को आयोजित SPARC 2026 के दौरान युवा दर्द विशेषज्ञों के साथ Headache, गर्दन और चेहरे के दर्द से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा चिकित्सकों के क्लिनिकल अनुभव को बढ़ाना, जागरूकता बढ़ाना और इन रोगों के बेहतर निदान और उपचार को बढ़ावा देना है।

उन्होंने बताया कि साथ ही उत्तर प्रदेश की आम जनता में भी इन दर्द संबंधी समस्याओं की पहचान और उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। विशेषज्ञों ने कहा कि आज सिरदर्द, गर्दन का दर्द और चेहरे का दर्द बहुत सामान्य स्वास्थ्य समस्याएँ बनती जा रही हैं। बढ़ता हुआ तनाव और लंबे समय तक मोबाइल फोन का उपयोग इन समस्याओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारत में लगभग 60–65% लोगों को अपने जीवन में कभी न कभी सिरदर्द की समस्या होती है। इनमें टेंशन-टाइप सिरदर्द सबसे आम प्रकारों में से एक है, जो लगभग 30–35% लोगों में पाया जाता है। इसी तरह माइग्रेन भी भारत में लगभग 30–35% लोगों को प्रभावित करता है और यह काम करने की क्षमता तथा जीवन की गुणवत्ता को काफी कम कर सकता है।

 

विशेषज्ञों ने कहा कि एक अन्य महत्वपूर्ण लेकिन कम पाया जाने वाला रोग ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया है। यह 1% से भी कम लोगों में होता है, लेकिन इसमें चेहरे में बहुत तेज और असहनीय दर्द होता है, जिससे रोजमर्रा की गतिविधियाँ प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा सर्वाइकोजेनिक Headache, जो गर्दन की हड्डियों (सर्वाइकल स्पाइन) की समस्या से होता है, अक्सर सही तरीके से पहचाना नहीं जाता और इसे दूसरे प्रकार के Headache समझ लिया जाता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ अन्य बीमारियाँ भी ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया जैसी लग सकती हैं, जैसे ट्राइजेमिनल न्यूरोपैथी और एटिपिकल फेसियल पेन। इसलिए सही निदान बहुत जरूरी है। जिन मरीजों को सामान्य दवाइयों से आराम नहीं मिलता, उनके लिए स्फेनोपैलेटाइन गैंग्लियन ब्लॉक और रेडियोफ्रीक्वेंसी लेज़निंग जैसे आधुनिक दर्द उपचार से राहत मिल सकती है।