Wednesday , June 10 2026

पोस्ट-कोविड मरीजों में लम्बे समय तक ऑक्सीडेटिव तनाव, डीएनए की क्षति बने रहना संभव

-केजीएमयू और आईआईटीआर की स्टडी में सामने आयी महत्वपूर्ण जानकारी

-रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की डॉ नंदिनी दीक्षित व अन्य ने किया अध्ययन

-अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Naunyn-Schmiedeberg’s Archives of Pharmacology में प्रकाशित हुई स्टडी

डॉ. नंदिनी दीक्षित

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), लखनऊ तथा सीएसआईआर-आईआईटीआर, लखनऊ के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण अध्ययन में यह पाया गया है कि कोविड-19 संक्रमण से उबर चुके मरीजों में ऑक्सीडेटिव तनाव, एंटीऑक्सीडेंट की कमी तथा डीएनए क्षति लंबे समय तक बनी रह सकती है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Naunyn-Schmiedeberg’s Archives of Pharmacology में प्रकाशित हुआ है।

40 स्वस्थ और 40 पोस्ट कोविड मरीजों पर हुई स्टडी

अध्ययन में 40 पोस्ट-कोविड मरीजों और 40 स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि पोस्ट-कोविड मरीजों में शरीर की प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, जिससे कोशिकाओं पर ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ता है और डीएनए को नुकसान पहुंचता है।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्षों में पाया गया कि कुल एंटीऑक्सीडेंट क्षमता (TAA), सुपरऑक्साइड डिस्म्यूटेज़ (SOD) तथा ग्लूटाथायोन रिडक्टेज़ (GR) जैसे महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट्स का स्तर पोस्ट-कोविड मरीजों में उल्लेखनीय रूप से कम था। वहीं लिपिड पेरॉक्सिडेशन (LPO), जो कोशिकीय क्षति का संकेतक है, बढ़ा हुआ पाया गया। साथ ही डीएनए क्षति के सभी प्रमुख संकेतकों में भी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई।

महिलाओं की अपेक्षा पुरुष ज्यादा प्रभावित

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि स्वस्थ व्यक्तियों में बढ़ती आयु के साथ शरीर ऑक्सीडेटिव तनाव की भरपाई करने की क्षमता विकसित करता है, लेकिन पोस्ट-कोविड मरीजों में यह प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र बाधित हो जाता है। अध्ययन में पुरुष मरीजों में एंटीऑक्सीडेंट की कमी महिलाओं की तुलना में अधिक पाई गई।

अध्ययन के अनुसार पोस्ट-कोविड सिंड्रोम केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर की कोशिकाओं और आनुवंशिक सामग्री (डीएनए) को भी प्रभावित कर सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि एंटीऑक्सीडेंट आधारित उपचार रणनीतियां, जैसे एन-एसिटाइलसिस्टीन (NAC) और अन्य ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने वाले उपाय, पोस्ट-कोविड मरीजों के दीर्घकालिक प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं।

इस अध्ययन के प्रमुख लेखकों में डॉ. नंदिनी दीक्षित, डॉ. सूर्य कांत त्रिपाठी, डॉ. ज्योति बाजपेयी, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. कौसर महमूद अंसारी, डॉ. चमनप्रीत कौर, डॉ. इशरत जहां, डॉ. संजीव कुमार वर्मा, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. आर. ए. एस. कुशवाहा, डॉ. राजीव गर्ग, डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डॉ. दर्शन बाजपेयी तथा डॉ. अंकित कटियार शामिल हैं।