Monday , December 6 2021

बच्‍चों को बिना वैक्‍सीनेशन स्‍कूल खोलने के खिलाफ हैं विशेषज्ञ

-अभिभावकों की सहमति जरूरी लेकिन न भेजने पर ऑनलाइन क्‍लासेज का विकल्‍प नहीं

-संक्रमण के खतरे की सारी जिम्‍मेदारी अभिभावकों पर डाल अपना पल्‍ला झाड़ने की तैयारी में स्‍कूल

-स्‍कूल में घंटों मास्‍क और दस्‍ताने पहनना अनिवार्य, ऐसे में हो सकती है तबीयत खराब  

डॉ नरेश त्रेहन

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। और आखिरकार धीरे-धीरे वह घड़ी नजदीक आ गई है जब छोटे बच्‍चों के भी स्‍कूल खुल रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 1 सितंबर से छोटे बच्चों के भी स्कूल खोलने की तैयारी है। अभिभावक अपने कलेजे के टुकड़े को स्‍कूल भेजने को लेकर बेहद चिंतित हैं, इस बीच देश के नामी चिकित्सकों में एक मेदांता हॉस्पिटल के एमडी डॉ नरेश त्रेहन ने साफ कहा है कि वैक्सीनेशन के बिना बच्चों के स्कूल कतई नहीं खोले जाने चाहिए।

डॉ.नरेश त्रेहन ने बच्चों के स्कूलों को खोले जाने पर ऐतराज जताते हुए अभी कुछ दिनों तक सब्र करने की सलाह दी है। डॉ.त्रेहन ने साफ कहा है कि वैक्सीन आने वाली है, बच्चों को वैक्सीन लगने तक किसी प्रकार की लापरवाही से बचनी चाहिए, क्योंकि अगर बड़ी संख्या में बच्चे बीमार पड़ गए तो इलाज के लिए संसाधन कम पड़ जाएंगे।

अभिभावकों का कहना है कि‍ जब अभिभावक के बिना सहमति बच्चों को स्कूल नहीं भेजने का फैसला लिया गया है तो बच्चों को स्कूल न भेजे जाने की स्थिति में ऑनलाइन क्लासेस का विकल्प भी देना चाहिए। इस बारे मे अभिभावकों का साफ कहना है कि‍ यह कहां तक जायज है कि‍ संक्रमण को लेकर पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों के ऊपर ही डाल दी गई है, जबकि स्कूलों में साफ-सफाई, कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराना स्कूल प्रबंधन के हाथ में है। अभिभावकों ने बताया कि‍ बच्चे को स्कूल में लगातार मास्क और ग्लव्स पहनने की अनिवार्यता रखी गई है। अभिभावकों ने कहा कि इस उमस भरी गर्मी के मौसम में बच्चा लगातार कई घंटे मास्क और दस्ताने पहने रहेगा तो उसकी तबीयत खराब हो सकती है इसका जिम्मेदार कौन होगा।

डॉ पि‍याली भट्टाचार्य

इस मसले पर जब संजय गांधी पीजीआई की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ पि‍याली भट्टाचार्य से बात की गई तो उनका भी साफ कहना था कि बिना वैक्सीनेशन बच्चों को स्कूल आने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। अगर स्कूल खोलना बहुत आवश्यक है तो ऑनलाइन क्लासेस का विकल्प भी देना चाहिए। उन्होंने कहा जहां तक बच्चों को लगातार दस्ताने पहनना अनिवार्य किया गया है तो ऐसी स्थिति में लेटेक्‍स के लगातार संपर्क में रहने से बच्चों के हाथों में तकलीफ हो सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

sixteen − 6 =

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.