Sunday , August 1 2021

उम्‍मीदों का बोझ लेकर मत चलिये, न ही कोई भी बात दिल से लगाइये

-स्‍वस्‍थ एवं सुखी डॉक्‍टर’ विषय पर संगोष्‍ठी में मेडिकल विद्यार्थियों को दिये गये टिप्‍स
-डॉ एपीजे अब्‍दुल कलाम की जयंती पर स्वामी विवेकानंद यूथ ऑफ मेडिकोज़ ने रक्‍तदान शिविर भी लगाया
डॉ दिव्य नारायण उपाध्‍याय

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। उम्‍मीदों का बोझ लेकर मत चलिये, साथ ही कोई भी बात दिल से न लगाइये, सबसे बड़ा काम है अपने जीवन की रक्षा। हमें दिन भर में जो भी कार्य करना है उस दौरान यह ध्यान रखना है की यह काम मुझे संतुष्टि दे सकता है या नहीं?

ये वे टिप्‍स हैं जो आज केजीएमयू में भारतरत्न डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम की जयंती पर स्वामी विवेकानंद यूथ ऑफ मेडिकोज़ की तरफ से सेल्‍बी हॉल में आयोजित ‘स्‍वस्‍थ एवं सुखी डॉक्‍टर’ विषय पर आयोजित संगोष्‍ठी में मुख्‍य वक्‍ता केजीएमयू के प्‍लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ दिव्‍य नारायण उपाध्‍याय ने एमबीबीएस व बीडीएस के छात्रों को दिये। संगोष्‍ठी से पूर्व सुबह केजीएमयू के ब्‍लड बैंक में रक्‍तदान शिविर का आयोजन किया गया था जिसमें 95 छात्रों ने रक्‍तदान किया।

संगोष्‍ठी में उपस्थि‍त मेडिकल के छात्र-छात्राओं को सम्‍बोधित करते हुए बेस्टसेलर बुक “पंचवटी” के लेखक डॉ दिव्‍य नारायण ने आगे कहा कि हम सभी इस समय तनाव में अपना जीवन बिता रहे हैं जिससे सफलता तो मिल रही है लेकिन उससे संतुष्टि और खुशी नहीं मिल पा रही है।

उन्‍होंने कहा कि संभवतः हम सभी दुनिया भर की और चीजों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं लेकिन अपने आपको महत्व देना बन्द कर दिया है। उन्‍होंने कहा कि हम सबके जीवन में दिनभर जो तनाव होता है उसे समाप्त करने के लिए एक अच्छी मित्र मंडली जरूर बनानी चाहिए जहां पर हम सभी एक साथ बैठकर एक दूसरे के साथ सुख-दुख साझा कर सकें, जब तक अकेले रहेंगे समस्या बनी रहेगी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्र सरकार के नेहरू युवा केन्द्र के बोर्ड ऑफ गवर्नर के मेम्बर एवं युवाकुम्भ के राष्ट्रीय संयोजक रहे शतरुद्र प्रताप ने बताया कि‍ डॉ कलाम किस तरह से हर कठिन परिस्थिति से उबरकर देश की धरोहर बन गये। उन्‍होंने कहा कि पहले डॉक्‍टर को भगवान माना जाता था, लेकिन आजकल इन मूल्‍यों का ह्रास हुआ है। उन्होनें कहा कि चिकित्सकों को अपनी अत्यधिक व्यस्तता के बावजूद संवेदनशील रहना सीखना होगा। उन्‍होंने कहा अपने अंदर के देवत्‍व को जगाइये, समाज की सेवा करेंगे तो मेवा नहीं मिलेगी, हो सकता है अपमान मिले लेकिन इससे आपके अंदर का ईश्‍वर जगेगा, उन्‍होंने कहा कि परमार्थ का काम कीजिये।

कार्यक्रम के अन्त में एक इंटरैक्शन सेशन भी रखा गया जिसमें छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एम एल बी भट्ट एवं प्रो संदीप तिवारी से खुलकर प्रश्न पुछे। अच्छे प्रश्न पूछने वाले सभी छात्र-छात्राओं को कुलपति ने सम्मानित भी किया। इन छात्र-छात्राओं में केजीएमयू के अलावा लोहिया आयुर्विज्ञान संस्‍थान के भी विद्यार्थी शामिल थे। इस अवसर पर नेशनल मेडिकोज़ आर्गेनाइजेशन अवध प्रांत की तरफ से आयोजित विभिन्न मेडिकल कॉलेज के छात्र छात्राओं के बीच आयोजित शतरंज प्रतियोगिता के पदक विजेताओं को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने एक पेड़ का स्टाल लगाया था जिस पर विभिन्न संकाय सदस्यों तथा छात्रों ने पेङ़ों की खरीददारी भी की। इस कार्यक्रम का संचालन मेधा गुप्ता, अनुराग अग्रवाल, विवेक सोनी एवं अमुल्य राय ने किया। धन्यवाद प्रस्ताव डॉ भूपेंद्र सिंह ने प्रस्तुत किया।

95 विद्यार्थियों ने किया रक्‍तदान

इससे पूर्व सुबह आयोजित कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय के ब्लड बैंक में एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस रक्तदान शिविर में विश्वविद्यालय के 95 छात्रों ने रक्तदान किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डीन प्रो जी पी सिंह, न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो आर के गर्ग, चीफ प्रॉक्टर प्रो आर ए एस कुशवाहा तथा गैस्ट्रोलॉजी के विभागाध्यक्ष प्रो सुमित रूंगटा ने अपने विचार रखे। उपस्थित वक्ताओं ने रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रक्तदान न केवल रक्त पाने वाले के लिए फायदेमंद है बल्कि देने वालों के शरीर में भी नया खून बनाने का एक माध्यम है।

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