Friday , August 6 2021

आखिर एक बच्‍ची, दूसरी बच्‍ची को जन्‍म कैसे दे सकती है…

किशोरावस्‍था में गर्भधारण बाल विवाह की परम्‍परा के कारण नहीं

डॉ सूर्यकांत ने पीसीपीएनडीटी एक्‍ट के चलते दूसरे अंगों के अल्‍ट्रासाउंड में होने वाली दिक्‍कत पर चिंता जतायी

 

लखनऊ। सीधी सी बात है समझने की और समझाने की। 21 वर्ष की आयु तक मनुष्य का शरीर विकसित होता है ऐसे में शरीर के पूर्ण विकास के बाद ही गर्भ धारण करना बेहतर है। क्‍योंकि एक बच्‍ची जो अभी खुद भी बच्‍ची है वह दूसरी स्‍वस्‍थ बच्‍ची को जन्‍म कैसे दे सकती है?

 

यह बात केजीएमयू के पल्मोनरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकांत ने बुधवार को केजीएमयू स्थित कलाम सेंटर में आयोजित किशोरियों पर मातृत्व का बोझ विषय पर कार्यशाला में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि फीमेल में कई ऐसे ऑर्गन्‍स, जैसे बच्‍चेदानी, हैं जिनका सीधा सम्‍बन्‍ध उसकी प्रजनन क्षमता से होता है। जाहिर सी बात है स्वस्थ बच्चेदानी होने वाले शिशु को सेहतमंद होने में पूरी मदद करती है, ऐसे में जब वह पूर्ण रूप से विकसित नहीं हुई है तो स्‍वस्‍थ शिशु को कैसे जन्‍म दे सकेगी?

उन्होंने कहा कि अक्‍सर यह कहा जाता है कि किशोरावस्था में विवाह और गर्भधारण के कारण अशिक्षा, गरीबी, परम्‍परा हैं जो हमें विरासत में मिली हैं। डॉ सूर्यकांत ने कहा कि मेरा मानना है ये सही नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि अगर हम बात अशिक्षा की करें तो दुनिया को पहला विश्वविद्यालय तक्षशिला विश्वविद्यालय के रूप में भारत ने दिया।अगर गरीबी की बात करें तो भारत के आजाद होने के समय 1947 में एक रुपए की कीमत 1 डॉलर के बराबर थी और आज स्थिति यह है लगभग 70 रुपये में 1 डॉलर मिलता है। उन्होंने कहा अब रही बात पुराने समय में किशोरावस्था में शादी की, तो इस विषय में मेरा मानना है कि शादी भले ही जल्दी हो जाती थी लेकिन गौना 5 साल बाद ही होता था, यानी पति पत्नी के गर्भधारण का समय किशोरावस्था नहीं बल्कि किशोरावस्था को पार करने के बाद होता था।

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डॉ सूर्यकांत ने कहा कि इसके पीछे के उचित कारणों को तलाश कर हमें उनका निवारण करना होगा क्योंकि किशोरावस्था में विवाह और गर्भधारण किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि लिंगानुपात में अंतर के लिए अल्ट्रासाउंड के जरिए लड़का या लड़की का पता लगाकर कन्‍या भ्रूण हत्‍या को लेकर चिकित्सक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। उन्‍होंने मौजूद लोगों से कहा कि किसी ने भी नहीं देखा होगा कि अल्ट्रासाउंड सेंटर के बाहर या उसके प्रचार में यह लिखा हो कि यहां पर गर्भ में लड़का-लड़की का पता लगाया जाता है। तो फि‍र वहां इस कार्य के लिए आने वाले वे लोग कौन हैं। इसके लिए हमें डॉक्टरों पर लगाम कसने के साथ ही इसकी मुख्य वजह समाज में जागरूकता फैलाने की ओर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा इसके लिए कानून बना हुआ है उसमें गलत करने वाले लोग लोगो के खिलाफ कार्यवाही भी होती है।

 

उन्होंने कहा कि इस कानून को लागू करते समय इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि इसके लिए बनाये गये कानून के कारण उचित अल्‍ट्रासाउंड करने में भी दिक्‍कतें आती है। उदाहरण के लिए कोई डॉक्‍टर सीने के अल्ट्रासाउंड के लिए, आंख के अल्‍ट्रासाउंड के लिए बहुत दिक्‍कतें आती हैं।

 

उन्होंने आयोजकों को इस प्रकार का कार्यक्रम आयोजित करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यह बहुत अच्छी बात है किशोरावस्था की बेटियों की उम्र जिसमें उन्हें अपना कैरियर बनाने की तरफ ध्यान देना होता है, लेकिन दकियानूसी या परि‍स्थिति‍यों के चलते वे गर्भधारण करने जैसी जानलेवा प्रक्रिया में फंस जाती है। मेरा मानना है इस सभी के प्रयास से व्यापक जागरूकता फैलाकर हम अपनी बेटियों को न सिर्फ स्वस्थ जीवन दे सकते हैं बल्कि देश की प्रगति में उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दे सकते हैं।

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