-एक अच्छी नींद आपको बचा सकती है कई प्रकार की गंभीर बीमारियों से
– केजीएमयू के पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने आयोजित किया जागरूकता कार्यक्रम
-विश्व नींद दिवस के मौके पर जुटे कई रोगों के विशेषज्ञ
सेहत टाइम्स
लखनऊ। विश्व नींद दिवस 13 मार्च के अवसर पर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्व नींद दिवस की इस वर्ष की थीम “अच्छी नींद लें, बेहतर जीवन जिएं” है। जागरूकता कार्यक्रम में इस महत्वपूर्ण विषय पर बात करने के लिए प्रो0 राजेन्द्र प्रसाद (पूर्व विभाग अध्यक्ष पलमोनरी मेडिसिन विभाग केजीएमयू, पूर्व निदेशक पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट), प्रो0 वेद प्रकाश (विभागाध्यक्ष पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग), प्रो0 ऋषि सेठी (विभागाध्यक्ष लारी कार्डियोलाॅजी), प्रो0 श्रीकान्त श्रीवास्तव (विभागाध्यक्ष वृद्धावस्था मानसिक विभाग), प्रो0 राजेश वर्मा (विभागाध्यक्ष न्यूरोलाॅजी विभाग), प्रो0 वीरेन्द्र वर्मा (ई0एन0टी0 विभाग), प्रो0 पूरन चन्द्र ( विभागाध्यक्ष प्रॉस्थोडोंटिक्स विभाग) सम्मिलित हुए और अपनी-अपनी विशेषज्ञता के ज्ञान से निद्रा विकारों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के आयोजक प्रो वेद प्रकाश ने बताया कि विश्व नींद दिवस हर वर्ष नींद को लेकर विभिन्न प्रकार की बीमारियो के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन World Sleep Society द्वारा सन् 2008 से मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य समाज में नींद सम्बन्धित विकारों को कम करना है ।
उन्होंने बताया कि यह दिन हर वर्ष शुक्रवार को उस दिन मनाया जाता है जब दिन और रात का समय लगभग बराबर होता है। वर्ष 2026 में विश्व नींद दिवस शुक्रवार, 13 मार्च को मनाया जा रहा है।
प्रो राजेन्द्र प्रसाद ने नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए 10–3–2–1–0 नियम अपनाने की सलाह दी। एचडीएचडी एचडीइस नियम के अनुसार: सोने से 10 घंटे पहले – कैफीन और अन्य उत्तेजक पदार्थों का सेवन न करें। सोने से 3 घंटे पहले – भारी भोजन और शराब से बचें। सोने से 2 घंटे पहले – काम या तनावपूर्ण गतिविधियाँ बंद कर दें। सोने से 1 घंटा पहले – मोबाइल फोन, टीवी और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाए रखें, तथा 0 – सुबह उठते समय स्नूज़ बटन का उपयोग न करें।
प्रो. ऋषि सेठी ने कहा कि पर्याप्त नींद हृदय के स्वास्थ्य और रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. श्रीकांत श्रीवास्तव ने बताया कि मेलाटोनिन हार्मोन नींद को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सूर्यास्त के बाद इसका स्तर बढ़ने लगता है और रात के समय यह अपने अधिकतम स्तर पर पहुंच जाता है।
डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने कहा कि ऊपरी श्वसन मार्ग की संरचनात्मक समस्याएं, जैसे नाक का अवरोध या वायुमार्ग का संकुचन, स्लीप एपनिया और खर्राटों का कारण बन सकती हैं।
डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि नींद और मिर्गी (एपिलेप्सी) के बीच द्विदिश संबंध होता है। नींद की कमी से मिर्गी के दौरे बढ़ सकते हैं।
प्रो वेद प्रकाश ने बताया कि केजीएमयू में हमारे पलमोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में इस उभरती और जल्दी ना पकड में आने वाली बीमारी के समुचित Diagnosis और इलाज के लिए सभी संसाधन उपलब्ध है। हमारे विभाग में State of Art 64 channel वाली अत्यन्त विकतित Sleep Lab है जहाँ पर Level -1 Sleep Study की जाती है इसके लिये सम्बन्धित मरीज को एक रात आकर सोना होता है और इस बीमारी के सभी पहलुओं की जांच की जाती है और रिपार्ट आने पर इसका समुचित निराकरण किया जाता है।
प्रो. वेद प्रकाश ने कहा कि नींद की कमी और अनियंत्रित स्लीप एपनिया के कारण दिन में अत्यधिक नींद आने लगती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।
कार्यक्रम में डा0 सचिन कुमार, डा0 मो0 आरिफ, डा0 अनुराग त्रिपाठी , डा0 रिचा त्यागी, डा0 यश जगधारी, डा0 दीपक शर्मा, डा0 शुभ्रा श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे।

Sehat Times | सेहत टाइम्स Health news and updates | Sehat Times