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एआई : भागें नहीं, सामना करें, समझदारी अर्श पर और नासमझी फर्श पर पहुंचा देगी

-एआई को लेकर युवाओं को विधायक डॉ राजेश्वर सिंह ने दिया अत्यन्त महत्वपूर्ण संदेश

डॉ राजेश्वर सिंह

सेहत टाइम्स

लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में युवाओं की भूमिका, जिम्मेदारी और तैयारी को लेकर एक अत्यंत विचारोत्तेजक एवं मार्गदर्शक संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किया है। यह संदेश केवल तकनीक की चर्चा नहीं, बल्कि आने वाले समय में मानवीय गरिमा, रोजगार की प्रकृति और भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता से जुड़ा एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

डॉ. सिंह ने अपने संदेश में रेखांकित किया कि AI अब भविष्य की अवधारणा नहीं, बल्कि वर्तमान की निर्णायक शक्ति बन चुका है जो नौकरियों, कौशल, शासन और अर्थव्यवस्थाओं को आज ही पुनर्परिभाषित कर रहा है। वैश्विक अध्ययनों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 तक 86% नियोक्ता अपने बिज़नेस मॉडल में AI आधारित बदलाव की अपेक्षा कर रहे हैं, वहीं 48% छात्र स्वयं को AI-आधारित कार्यस्थल के लिए तैयार नहीं मानते। अनुमान है कि AI का वैश्विक आर्थिक प्रभाव 4.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है, परंतु यदि कौशल असमान रहे तो इसके लाभ भी असमान रूप से वितरित होंगे।

AI और नौकरियाँ – भय नहीं, यथार्थ 

डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि AI न तो मानवता को समाप्त करेगा और न ही सभी नौकरियाँ खत्म करेगा। AI वास्तव में पुराने, अप्रासंगिक कौशल को समाप्त करेगा और अनुकूलनशील, कुशल व नैतिक सोच रखने वाले युवाओं को आगे बढ़ाएगा। उनका संदेश साफ है, AI मनुष्यों को नहीं बदलेगा, बल्कि AI का सही उपयोग करने वाले मनुष्य, दूसरों को पीछे छोड़ देंगे।

उन्होंने आगाह किया कि वे कार्यक्षेत्र जहाँ काम दोहराव वाला है, जैसे नियमित लेखन, साधारण रिपोर्टिंग, रूटीन डेटा प्रोसेसिंग, अनुमानित ग्राहक संवाद और केवल क्लेरिकल विश्लेषण – AI के कारण अधिक जोखिम में हैं, क्योंकि इन्हें आसानी से स्वचालित किया जा सकता है।

भविष्य में सुरक्षित भूमिकाएँ 

इसके विपरीत, जिन भूमिकाओं में मानवीय निर्णय, विश्वास, नेतृत्व, रचनात्मकता, नैतिकता, सहानुभूति और भौतिक उपस्थिति आवश्यक है, वे भविष्य में अधिक सुरक्षित रहेंगी। स्वास्थ्य सेवा, क़ानून (रणनीतिक भूमिका), इंजीनियरिंग, शिक्षण (मेंटॉरशिप), शासन, रक्षा और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि इन क्षेत्रों में भी AI साक्षरता अब अनिवार्य हो चुकी है।

युवाओं के लिए अनिवार्य कौशल 

डॉ. राजेश्वर सिंह ने युवाओं से आग्रह किया कि वे मानवीय कौशल जैसे आलोचनात्मक सोच, प्रभावी संवाद, नैतिक जिम्मेदारी, नेतृत्व और टीमवर्क के साथ-साथ AI कौशल भी विकसित करें। AI कैसे काम करता है, AI टूल्स का उत्पादक उपयोग, AI आउटपुट की सत्यता की जाँच और AI से जुड़े जोखिम व पूर्वाग्रहों की समझ ये सभी आने वाले समय की मूलभूत आवश्यकताएँ हैं।

क्या छोड़ना होगा 

उन्होंने युवाओं को चेताया कि केवल डिग्री के पीछे अंधी दौड़, रटंत शिक्षा, तकनीक की अनदेखी और समय को भटकाव व विभाजनकारी सोच में नष्ट करना ये सब भविष्य के लिए घातक सिद्ध होंगे।

भारत के पास ऐतिहासिक अवसर 

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी है, यह पीढ़ियों में एक बार मिलने वाला अवसर है। यदि युवाओं का कौशल बढ़ेगा तो भारत नेतृत्व करेगा; यदि कौशल ठहर गया, तो अवसर हाथ से निकल जाएगा। उनके शब्दों में, “AI आपका भविष्य नष्ट नहीं करेगा, अज्ञान करेगा। आज की तैयारी ही कल की गरिमा तय करेगी।” यह संदेश भाजपा नेता द्वारा सरोजनीनगर से उठकर पूरे देश के युवाओं के लिए एक स्पष्ट आह्वान है, जहाँ कौशल नई डिग्री है और अनुकूलनशीलता ही नई जॉब सिक्योरिटी है।

 

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