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जानिये, कैसे फैलते हैं जानवरों से मनुष्‍यों में होने वाले जूनोटिक रोग

विश्व पशुजन्य रोग दिवस (6 जुलाई) पर बलरामपुर अस्‍पताल में जागरूकता गोष्‍ठी का आयोजन

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। जूनोटिक रोगों से मानव और पशु दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रत्‍येक वर्ष 6 जुलाई को विश्व पशुजन्य रोग दिवस  (World Zoonoses Day)  मनाया जाता है। जानवरों से मनुष्‍यों में होने वाले संक्रामक जूनोटिक रोगों से बचने के लिए सावधानियां बरतना बहुत आवश्‍यक है। जूनोटिक रोग डायरेक्ट सम्‍पर्क में आने से, संक्रमित पशुओं के  मांस एवं दूध  के सेवन से, उनके द्वारा विसर्जित मल-मूत्र से संक्रमित सब्जियों, फलों आदि  के सेवन से तथा संक्रमित पशुओं से वेक्टर (मच्छरों, मक्खियों आदि) द्वारा मनुष्यों में  फैलते हैं।

यह जानकारी विश्व पशुजन्य रोग दिवस के अवसर पर बलरामपुर चिकित्सालय लखनऊ के ओपीडी भवन में आयोजित एक गोष्ठी में वरिष्ठ परामर्शदाता एवं फिजीशियन डॉ विष्णु कुमार ने दी। निदेशक एवं प्रमुख चिकित्सक डॉ ए के सिंह की अध्‍यक्षता में आयोजित गोष्ठी में इन रोगों के बारे में ओपीडी में आये मरीजों व तीमारदारों को भी जागरूक किया गया।

उन्‍होंने बताया कि मानव और पशु दोनों के स्वास्थ्य पर ज़ूनोटिक रोगों से पड़ने वाले  प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 6 जुलाई को विश्व ज़ूनोसिस दिवस मनाया जाता है। फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पाश्चर की सफलता का सम्मान करने के लिए हर साल इस दिन विश्व ज़ूनोसिस दिवस मनाया जाता है, जिन्होंने जूनोटिक बीमारी रेबीज के खिलाफ पहला टीका छोटे लड़के जोसेफ मिस्टर को 6  जुलाई 1885 को दिया था, जिसे एक पागल कुत्ते ने काट लिया था।

उन्‍होंने बताया कि विश्व ज़ूनोसिस दिवस पर इस वर्ष 2023 की थीम भविष्य में COVID-19 जैसी महामारी को रोकने के लिए जूनोटिक ट्रांसमिशन की शृंखला को तोड़ने की तात्कालिकता पर जोर देती है। इसमें व्यक्तिगत और सरकारी दोनों स्तरों पर जागरूकता बढ़ाने और निवारक कार्रवाई करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। डॉ विष्‍णु ने कुछ महत्वपूर्ण ज़ूनोटिक रोग जैसे रेबीज, लेप्टोस्पायरोसिस, जेपनीस एनसेफ्लाइटिस आदि के बारे में विस्तार से चर्चा की।

उन्‍होंने मानव-पशु-पर्यावरण इंटरफेस पर सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों को समझने और प्रबंधित करने और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में सुधार के लिए क्रॉस-सेक्टोरल सहयोग के महत्व के बारे भी जानकारी दी।  उन्‍होंने इसके बचाव के  साथ ही रेबीज के प्री-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस  एवं पोस्ट एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस के बारे भी बताया।

इन रोगों के बचाव के लिए उन्‍होंने सुझाव देते हुए कहा कि

-प्रमुख रूप से  पशु आवास क्षेत्रों को मानव आबादी से दूर सुव्यवस्थित एवं स्वच्छ रखें।

-मल के संचय से बचें तथा  सही से निस्तारण सुनिश्चित करें।

-पानी आदि को खुला रखने एवं जल भराव होने से रोकें

-साफ-सुथरे कमरों में क्षैतिज या जूनोटिक स्थानांतरण की संभावना कम होती है। उचित वेंटिलेशन जानवरों और मनुष्यों  की सुरक्षा करता है।

-खाने से पहले अच्छी तरह से हाथों की सफाई पर ध्यान देने को कहा तथा नंगे पैर पशुओं के संपर्क में आने से बचने के लिए बताया गया

सब्जियों, फलों आदि को अच्छी तरह से धुलकर एवं पका कर खाने पर जोर दिया तथा पके हुए भोजन को ढंककर रखने को कहा।

इस कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक  डॉ  अतुल मेहरोत्रा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ  हिमांशु चतुर्वेदी, डॉ नीरज श्रीवास्‍तव सहित अन्य चिकित्सक, अधिकारी कर्मचारी भी उपस्थित रहे।