जानिये, तांबे के बरतन में खाने-पीने से किसको हो सकता है खतरा

केजीएमयू के सर्जन प्रोफेसर विनोद जैन की स्टडी, स्विटजरलैंड में प्रस्तुत किया शोध पत्र

लखनऊ। तांबे के बरतन में खाना और पीना यूं तो बहुत फायदेमंद माना गया है लेकिन जिन महिलाओं को स्तन कैंसर का खतरा हो उन्हें इसका प्रयोग नहीं करना चाहिये। यह कहना है केजीएमयू के प्रोफेसर और सर्जन डॉ विनोद जैन का।

डॉ विनोद जैन ने पिछले दिनों स्विटजरलैंड में आयोजित वल्र्ड कांग्रेस ऑफ सर्जरी में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया था, इसका विषय बे्रस्ट कैंसर में एंटी ऑक्सीडेंट्स और ट्रेस मैटीरियल यानी अतिसूक्ष्म धातु जो हमारे शरीर में पायी जाती है, की भूमिका था। सेहत टाइम्स से बात करते हुए कहा कि उन्होंने अपने शोध में यह पाया कि जिन महिलाओंं को स्तन कैंसर की शिकायत थी उनके शरीर में ंकॉपर यानी तांबा की मात्रा ज्यादा थी साथ ही ऐसी महिलाओं में एंटी ऑक्सीडेंट्स की कमी पायी गयी, उन्होंने बताया कि यही नहीं जिन महिलाओं में कैंसर की अधिकता ज्यादा थी उन महिलाओं में कॉपर की भी अधिकता थी, साथ ही एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा कम पायी गयी।

डॉ जैन ने कहा कि अब शहरी क्षेत्रों में कैंसर में ब्रेस्ट कैंसर सबसे ज्यादा पाया जा रहा है, जबकि ग्रामीण् इलाकों में आज भी सर्विक्स कैंसर नम्बर वन तथ ब्रेस्ट कैंसर नम्बर दो पर है। उन्होंने बताया कि आम जनता के समझने के लिए यह आवश्यक है कि जिन महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा हो उन्हें तांबे के बरतन में पानी पीने, तांबे के बरतन में पकाये हुए खाने का सेवन नहीं करना चाहिये। उन्होंने कहा कि एंटी ऑक्सीडेंट की कमी दूर करने के लिए विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन ई तथा सेलीनियम धातु का सेवन लाभप्रद है। उन्होंने बताया कि विटामिन ए की कमी के लिए गाजर, दूध, अंडा जैसी चीजें, विटामिन सी के लिए खट्टे फल, हरी सब्जियां, विटामिन ई के लिए अंकुरित अनाज बहुत उपयोगी हैं, इसके अलावा सेलीनियम धातु जो हमारे शरीर में होती है, उसकी कमी पूरी करने के लिए दवा लेनी पड़ती है।

यह पूछने पर कि बे्रस्ट कैंसर का खतरा किन महिलाओं को ज्यादा होता है, इस बारे में उन्होंने बताया कि जिन महिलाओं के परिवार में किसी की रहा हो, गर्भ निरोधक की गोलियों का ज्यादा सेवन करने वाली, हारमोनल गोलियों का सेवन करने वाली महिलाओं, मासिक धर्म की जल्दी शुरुआत, मासिक धर्म देर से बंद होने यानी देर से रजोनिवृत्ति वाली महिलाओं, जिन महिलाओं के संतान न हो, बच्चों को स्तनपान न कराने वाली महिलाओं, ज्यादा उम्र होने के बाद जवान दिखने के लिए हारमोनल गोलियों का सेवन करने वाली महिलाओं को स्तन कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है।