पारम्परिक चूल्हे पर खाना पकाना, उचित वेंटीलेशन भी नहीं, ये तो खतरनाक है

एम्‍स नयी दिल्‍ली के निदेशक डॉ रनदीप गुलेरिया ने कहा कि महिलाओं और बच्चों में खांसी, ब्रोंकाइटिस, श्‍वास की बीमारियों एवं बच्चों में निमोनिया का खतरा

लखनऊ। यहां चल रहे 3rd ACP India chapter के दूसरे दिन वैज्ञानिक सत्र में एम्‍स नयी दिल्‍ली के निदेशक डॉ रनदीप गुलेरिया द्वारा एयर पॉल्युशन एवं लंग की बीमारियों पर व्‍याख्यान दिया गया। डॉ0 गुलेरिया ने बताया कि वातावरण में दो तरह का एयर पॉल्युशन है, घर के अंदर और घर के बाहर का एयर पॉल्युशन।  सेंट्रल इंडिया के 60-70 प्रतिशत आबादी के घरों कर रसोईघर में चूल्हे का इस्तेमाल होता है तथा इनके घरों में उचित वेंटिलेशन का अभाव है। ऐसी अवस्था में घर के सदस्यों खास तौर पर महिलाओं और बच्चों में खांसी, ब्रोंकाइटिस, श्‍वास की बीमारियों एवं बच्चों में निमोनिया आदि की परेशानियां होने लगती हैं।

 

आउटडोर एयर पॉल्युशन में सेंट्रल इंडिया में साल के ज्यादातर PH वैल्यू WHO के मानकों से ज्यादा रहती है। उन्‍होंने बताया कि एयर पॉल्यूशन की वजह से दमा, ब्रोंकाइटिस सांस की नली में सूजन, खून की नली सिकुड़ने लगती हैं हार्ट पर असर पड़ता है, हार्ट अटैक की समस्या बढ़ जाती है। सिगरेट एवं बढ़े कोलेस्ट्रॉल के साथ एयर पॉल्यूशन भी हार्ट के लिए बहुत खतरनाक है। यह एक साइलेंट किलर है। इससे फेफड़ों के इंफेक्शन के चांसेज रहते हैं। एयर पॉल्यूशन को रोकने के लिए हमें आगे आना होगा । सरकार द्वारा भी इस पर काफी ध्यान दिया जा रहा है। घर के अन्दर के पॉल्यूशन को कम करने में सरकार द्वारा संचालित उज्ज्वला योजना बहुत कारगर है। किसानों को पुआली जलाने से रोकना होगा, सरकार द्वारा इसके लिए भी विभिन्न इंसेंटिव दिया जा रहा है। देश मे 12 करोड़ लोग बीड़ी पीते है,  वो उसका 30% धुआं ही लेते है बाकी के 70% धुआं वातावरण को नुकसान पहुंचाता है।

अब 90 मिनट में डायग्‍नोस हो रही है टीबी

पल्‍मोनरी विशेषज्ञ डॉ राजेंद्र प्रसाद ने अपने उद्बोधन में कहां गया ट्यूबरकुलोसिस का शत-प्रतिशत निदान है विश्व में जितने ट्यूबरकुलोसिस के मरीज है उसके 28% मरीज भारत में है पूरे विश्व में पिछले वर्ष 17 लाख लोग की मृत्यु ट्यूबरकुलोसिस की वजह से हुई। भारत में 4.5 लाख मरीजों की मृत्यु ट्यूबरकुलोसिस की वजह से हुई। इंडिया में प्रत्येक दिन लगभग 1000 से 1200 मरीज ट्यूबरकुलोसिस की वजह से मृत्यु को प्राप्त होते हैं। इसका मुख्य कारण ट्यूबरकुलोसिस का उचित प्रकार से मैनेजमेंट ना हो पाना है। सरकारी अस्पतालों में ट्यूबरकुलोसिस इलाज पूर्णतः फ्री है किंतु 50% मरीज सरकारी अस्पतालों में जा रहे हैं जो सरकार से बाहर अपना इलाज करा रहे वह कहां कैसे किस प्रकार का इलाज करा रहे हैं पता नहीं है। इसलिए सरकार प्राइवेट सेक्टर को भी इन्वॉल्व कर टीबी के खात्मे का प्रयास कर रही है। वर्तमान में टीबी के इलाज की नई गाइडलाइन आ गई है। मॉलिक्यूलर डायग्नोसिस जिसे हम जीन एक्सपर्ट भी कहते हैं इसके द्वार टीबी का 90 मिनट में पता चल जाता है इसके द्वारा ड्रग रजिस्टेंस टीबी भी डायग्नोस  हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 2016 में सेकंड लाइन एलपीए को बताया गया जिसके माध्यम से 2 दिन के अंदर एच डी आर टीबी  का भी पता लग जाता है। इन सब की वजह से सप्ताह भर में मरीज की बीमारी का पता लग जाता है जो पहले कई महीनों बाद पता चलता था। सरकार द्वारा इन नई टेक्नोलॉजी को अडॉप्ट कर लिया गया है इससे 2025 तक टीबी के खात्मे का जो मिशन है उसको प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

वायु प्रदूषण रोकने के लिए वृक्षारोपण जरूरी

डॉ0 सूर्यकांत, विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, केजीएमयू ने बताया कि विश्व के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में 14वां स्‍थान भारत का है। कानपुर पहले एवं लखनऊ सातवें स्थान पर है। उन्‍होंने बताया कि वायु प्रदूषण रोकने के लिए वृक्षारोपण करना होगा, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकना होगा, गरीब महिलाओं को स्वच्‍छ ईंधन प्रदान करना होगा। उज्ज्वला योजना इसमे महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।