उत्कृष्ट एवं गुणवत्तायुक्त आयुर्वेद औषधि का निर्माण करें कम्पनियां

‘जन स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद’ विषय पर संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में मंत्री ने कहा

 

लखनऊ। कोई भी चिकित्सा तभी सफल है, जबकि उसमें प्रयुक्त होने वाली औषधियों का निर्माण शास्त्र के निर्देशों के अनुरूप हो तथा उच्च कोटि के मानक अपनाये जायें। गुणवान और वीर्यवान औषधियों का प्रयोग किया जाय। प्रदेश में स्थापित आयुर्वेद औषधि निर्माण शालाओं से अपेक्षा है कि उत्कृष्ट एवं गुणवत्ता युक्त औषधि का निर्माण करें, जो सभी को स्वस्थ रखने में उपयोगी हो सकें।

यह विचार प्रदेश के आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. धर्म सिंह सैनी ने आज विश्व आयुर्वेद परिषद (अवध प्रान्त) के तत्वावधान में आयोजित ‘‘जन स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद’’ विषय पर संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में व्यक्त किये। डा. सैनी ने कहा कि आयुर्वेद जैसी विशिष्ट चिकित्सा विधा का विश्व भर में प्रचार-प्रसार करने वाली संस्था विश्व आयुर्वेद परिषद द्वारा अत्यन्त समीचीन जन स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि वस्तुत: वर्तमान परिवेश में यह विषय अत्यन्त ही महत्वपूर्ण हो गया है, जबकि लगभग प्रत्येक दो माह में एक न एक रोग समाज के सभी वर्गों को आक्रान्त कर रहा है। ऐसे समय में आयुर्वेद में वर्णित दो उद्देश्यों में प्रथम व्यक्ति के स्वास्थ्य का संरक्षण निहित है, के माध्यम से रोगों से बचाव हेतु सम्यक आहार-विहार, ऋतुचर्या, दिनचर्या का प्रचार-प्रसार किया जाना अत्यावश्यक है।

आयुष राज्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की वर्तमान लोकप्रिय एवं कल्याणकारी सरकार ने भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर आयुर्वेद के साथ-साथ होम्योपैथी, यूनानी तथा योग जैसी चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण एवं संवद्र्धन हेतु पहली बार स्वतंत्र आयुष मंत्रालय की स्थापना कर यह जिम्मेदारी मुझ पर सौंपी है और यह कार्य तभी पूरा हो सकता है, जब इन पद्धतियों के विकास में आप सभी लोग पूर्ण मनोयोग से पूरी निष्ठा से अपनी-अपनी पद्धतियों को लोकप्रिय बनायेंगे।

डा. सैनी ने कहा कि भारत सरकार ने सबको स्वास्थ्य का जो लक्ष्य रखा है वह तभी पूरा हो सकता है, जबकि पूरक चिकित्सा पद्धतियों के रूप में अलग-थलग पड़ी हुई आयुर्वेद, होम्योपैथी तथा यूनानी जैसी चिकित्सा पद्धतियों को सुदृढ़ एवं मूल स्वरूप में स्थापित किया जा सके। इसके लिए भी हम सबको मिलकर कार्य करना होगा तथा चरणबद्ध तरीके से चिकित्सालयों का निर्माण, अच्छी औषधियों का निर्माण एवं उपलब्धता के साथ-साथ सुयोग्य शिक्षकों, चिकित्सकों की उपलब्धता पर योजना तैयार कर लागू किया जाये।

आयुष राज्यमंत्री नं प्रदेश में कार्यरत चिकित्सक बन्धुओं से कहा है कि नियमित एवं समय से चिकित्सालयों में जाये तथा सद्व्यवहार के साथ रोगियों की चिकित्सा सेवा करें। उन्होंने कहा कि अक्सर समय से चिकित्सकों एवं शिक्षकों के उपलब्ध न रहने की शिकायतें प्राप्त होती हैं, इस हेतु एक कार्य योजना तैयार की जा रही है, जिससे कि चिकित्सकों एवं शिक्षकों की कार्य स्थल पर उपलब्धता सुनिश्चित करायी जा सके।

कार्यक्रम में केजीएमयू के कुलपति डा. एम.एल.बी. भट्ट, सचिव आयुष विभाग सुधीर दीक्षित, निदेशक आयुर्वेद आर.आर. चौधरी, विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डा. सुरेन्द्र चैधरी, अवध प्रान्त के अध्यक्ष डा. अजय दत्त शर्मा, संस्थापक सदस्य डा. वाचस्पति त्रिवेदी एवं क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी डा. शिव शंकर त्रिपाठी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।