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मरीजों को तकलीफ हो, ऐसा कदम मजबूरी में उठाना पड़ेगा

संजय गांधी पीजीआई कर्मचारी महांसंघ की अध्‍यक्ष ने सीएम से की मुलाकात, कर्मचारियों का दुखड़ा सुनाया

लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई कर्मचारी महासंघ की अध्‍यक्ष सावित्री सिंह ने कहा है कि संस्‍थान को दिल्‍ली एम्‍स की तरह समतुल्‍यता प्राप्‍त हैं लेकिन अफसोस यह है कि प्रावधान होने के बाद भी नयी व्‍यवस्‍था के तहत कर्मचारियों को दिनों नहीं महीनों अपने हक के लिए न सिर्फ इंतजार करना पड़ रहा है बल्कि बार-बार लिख कर निवेदन करने के बावजूद नतीजा शून्‍य है। मजबूर होकर हम कर्मचारियों को आंदोलन का रास्‍ता अपनाने पर विचार करना पड़ रहा है, जबकि दूर-दूर से पीजीआई में इलाज कराने आने वाले मरीजों के हित को देखते हुए हम आंदोलन की स्थिति को लम्‍बे समय से टाल रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि इस सम्‍बन्‍ध में उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री को भी ज्ञापन सौंपा है तथा मुख्‍यमंत्री ने शीघ्र कार्रवाई का आश्‍वासन दिया है।

 

सावित्री सिंह ने एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि हमारे संस्थान PGI को दिल्ली एम्स की समतुल्यता प्राप्त है इसके अनुसार हमें जो भी सुविधाएं दिल्ली एम्स में लागू होती हैं उसी के हिसाब से हमारे संस्थान में भी वह सुविधाएं हम कर्मचारियों को मिलती हैं यह सुविधा हमें 2011 से पहले जैसे ही दिल्ली एम्स में लागू होती थी कोई भी कर्मचारियों से जुड़ी सुविधाएं जैसे भत्ते DA या सैलरी में बढ़ोतरी आदि वह हमारे संस्थान में 10 दिन के अंदर-अंदर अपने आप इम्‍प्‍लीमेंट हो जाती थी लेकिन 2011 में एक नियम बना दिया गया था कि हमारे संस्थान को दिल्ली एम्स की समतुल्यता तो प्राप्त होगी यानी कि दिल्ली एम्स की सारी सुविधाएं तो हमें मिलेगी लेकिन राज्य सरकार की घोषणा करने के बाद, यानी कि मौजूदा सरकार अपने हिसाब से 1 महीने 2 महीने 6 महीने या साल भर में जब भी अपने राज्य कर्मचारियों को सुविधाएं देगी उसी के उपरांत हमारे संस्थान को सुविधाएं प्राप्त होंगी दिल्ली एम्स के अनुसार अब यह राज्य सरकार पर निर्भर है कि वह कितने दिन में यह घोषणा करती है उसके लिए हम कर्मचारी इंतजार करते हैं।

 

 

सावित्री सिंह ने कहा है कि कब हम लोगों को दिल्ली एम्स में वाली सुविधाएं कब से मिलना शुरू होगी इसी इंतजार में रहते हैं। उन्‍होंने कहा है कि इसी परेशानी में वह लोग मरीजों की सेवा दिन रात किया करते हैं ऐसे में हम नेता लोग कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल के तौर पर शासन प्रशासन तक लेटर लिख लिख कर लिख लिख कर के कर्मचारियों की हिम्मत को बढ़ाते रहते हैं कि जल्द ही मिलने वाला है जल्दी मिलने वाला है कर्मचारियों के बातों का जवाब दे देंकर हम लोग थक जाते हैं हम लोग यह चाहते हैं कि दूर दूर से आ रहे मरीजों को कोई असुविधा का सामना ना करना पड़े लेकिन पत्राचार, शासन प्रशासन में दौड़ भाग करने के बाद हार मान कर के अपनी सुविधाओं के लिए अपने ही हक के लिए हमें राज्य सरकार का मुंह देखना पड़ता है ऐसे में हम महीने भर दो महीने 3 महीने साल भर इंतजार करने के बाद थक हार कर के हमें अपना आखिरी हथियार इस्तेमाल करना पड़ता है जो है कि धरना प्रदर्शन, जो हम किसी हाल में करना नहीं चाहते हैं क्योंकि हमारा संस्थान एक गरिमामयी संस्थान है यहां हमें दुखियों की सेवा करना होता है, दूर-दूर से लोग रोगी आते हैं, उनकी सुविधाओं को देखते हुए हम यह कदम नहीं उठाना चाहते लेकिन शासन-प्रशासन हमें मजबूर कर देता है कि हम आंदोलन के लिए बाध्य हो जाते है। हमारे संस्थान में मरीज बहुत दूर-दूर से एक आशा के साथ आते हैं कि PGI उन्हें एक नया जीवन देगा ऐसे में कर्मचारियों का एक गलत कदम या कोई भी आंदोलन संस्थान हित में और मरीज हित में किसी भी तरह से ठीक नहीं है।

 

अतः हम केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार तथा अपने प्रशासन से बस इतना कहना चाहते हैं कि 2011 के नियम से पहले जो हम लोगों को सुविधाएं दिल्ली एम्स की मिलती थी दिल्ली एम्स में लागू होते ही 10 दिन के अंदर हमारे संस्थान में इंप्लीमेंट हो जाती थी उसी नियमावली को फिर से हमारे संस्थान में लागू किया जाए ताकी हमारे कर्मचारी अपने हक के लिए कोई भी आंदोलन करने के लिए बाध्य ना हों और अपना काम दिलो दिमाग लगाकर के पूरी ईमानदारी के साथ करते रहें।

 

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