Saturday , February 4 2023

एनक्‍यूए प्रमाणपत्र वाले जिला अस्‍पतालों की श्रेणी में यूपी को प्रथम स्‍थान

-अब तक 46 जनपदों की 79 चिकित्सा इकाइयां NQA  सर्टिफिकेशन प्राप्त कर चुकीं : ब्रजेश पाठक

सेहत टाइम्‍स


लखनऊ। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि ‘नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैण्डर्ड‘ के अन्तर्गत नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन के तहत जिला चिकित्सालय श्रेणी में प्रदेश को पूरे राष्ट्र में ‘प्रथम’ स्थान प्राप्त करने का गौरव प्राप्त हुआ है।

उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश के 46 जनपदों की 79 चिकित्सा इकाइयां NQA  सर्टिफिकेशन प्राप्त कर चुकी हैं जिसमें 42 जनपद स्तरीय, 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 21 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सम्मिलित हैं। साथ ही जनपद स्तरीय चिकित्सालय श्रेणी में 35 तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र श्रेणी में 15 चिकित्सा इकाइयां ‘लक्ष्य‘ सर्टिफिकेशन (लेबर रूम एवं ऑपरेशन थियेटर) प्राप्त कर चुकी हैं।


श्री पाठक ने प्रदेश की जनता को आश्वस्त किया कि आगामी समय में अधिक से अधिक चिकित्सा इकाइयों के सर्टिफिकेशन के लिए रणनीति तैयार की जायेगी जिससे कि प्रदेश की जनता गुणवत्तापरक उपचार ‘जीरो पॉकेट खर्च‘ के रूप में हो सके। चूंकि गम्भीर मरीजों का इलाज जनपद स्तरीय चिकित्सा इकाइयों में ही संभव है इस कारण से जनपद स्तरीय चिकित्सा इकाइयों में क्वालिटी पैरामीटर्स को पूर्ण करने की प्राथमिकता दी गयी जिसके फलस्वरूप जनपद स्तरीय चिकित्सालय श्रेणी में प्रदेश को देश में प्रथम स्थान का गौरव प्राप्त हुआ है।

    
ब्रजेश पाठक ने बताया कि चिकित्सा इकाइयों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैण्डर्ड‘ के अन्तर्गत नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन वर्ष 2013 में प्रारम्भ किया गया। NQA सर्टिफिकेशन के लिए तीन चरणों में असेसमेंट निर्धारित चेकलिस्ट के माध्यम से किया जाता है।


उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अन्तिम चरण का असेसमेंट भारत सरकार द्वारा नामित राष्ट्रीय स्तर पर इम्पैनल्ड एक्सटर्नल असेसर्स द्वारा सघन रूप से किया जाता है। चिकित्सा इकाइयों में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य में सुधार एवं प्रमाणीकरण के लिए ‘लक्ष्य‘ सर्टिफिकेशन तथा ‘मुस्कान‘ सर्टिफिकेशन कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है।

श्री पाठक ने बताया कि सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में गतिशीलता लाने के लिए बेसलाइन-असेसमेंट कराने के उपरान्त चिकित्सा इकाइयों में क्वालिटी टीम का गठन, प्रशिक्षण तथा वर्चुअल माध्यम से नियमित रूप से गैप क्लोजर की प्रगति समीक्षा की। उन्होनें बताया कि सर्टिफाइड चिकित्सा इकाइयों में मरीजों एवं तीमारदारों की संन्तुष्टि का स्तर बढ़ा है तथा मरीजों का विश्वास सरकारी चिकित्सालयों के प्रति सकारात्मक हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

four × 4 =

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.