आरएसएस के संयुक्त क्षेत्र कार्यवाह विजय अग्रवाल को दी गयी श्रद्धांजलि

-साथ बिताये पलों, समाज हित में किये गये उनके कार्यों को याद किया गया

विजय अग्रवाल

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड) के संयुक्त क्षेत्र कार्यवाह विजय अग्रवाल को आज 7 मई को वर्चुअल बैठक के माध्‍यम से श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। विजय अग्रवाल का बीती 25 अप्रैल को निधन हो गया था।

यहां जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी देते हुए बताया गया है कि इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संघ की विचारधारा से जुड़े लोगों ने उनके साथ बिताये हुए पलों, उनकी विचारधारा, उनके द्वारा समाज हित में किये गये दूरदर्शी कार्यों के बारे में याद करते हुए उनके विचारों के अनुरूप जीवन व्‍यतीत करने की बात कही। श्रद्धांजलि सभा में अंतर्राष्‍ट्रीय ख्‍यातिप्राप्‍त होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक डॉ. गिरीश गुप्ता, सामाजिक कार्यकत्री रेशु भाटिया, अलीगढ़ से कर्नल निशि‍थ सिंघल, एसजीपीजीआई के लाइब्रेरियन डॉ.सुनील अग्रवाल, संघ के अधिकारी डॉ. हरमेश सिंह चौहान, प्रतापगढ़ से समाजसेवी अरुणेश कुमार, तरुणेश कुमार, सुल्तानपुर से वैभव पांडे (अपर शासकीय अधिवक्ता), सुरेंद्र कुमार, डॉ. देव व्रत (शिक्षाविद), शोभा द्विवेदी, अब्राहिम मिएराज (मीडिया स्कालर एवं टी.वी. पत्रकार) मुदित रस्तोगी और सत्य पाठक ‘राज्य सलाहकार अधिवक्ता हाई कोर्ट लखनऊ’ भी शामिल हुए। वर्चुअल बैठक का संचालन पत्रकार व समाजसेवी सतीश कुमार दीक्षित द्वारा किया गया।

श्रद्धांजलि सभा में डॉ. गिरीश गुप्ता ने विजय अग्रवाल के साथ बिताए उन क्षणों को याद करते हुए कहा कि श्री अग्रवाल से मेरी मुलाकात सन् 1990 में प्रथम बार लखनऊ में हुई थी। जब वह प्रवास के दौरान सरस्वती शिशु मंदिर निराला नगर में ठहरे हुए थे। मैं सदैव उनके विचारों से बहुत प्रभावित रहा हूं। आज भी उनकी प्रेरणा से समाज और राष्ट्र हित में कार्य करते रहना मेरी आदत में शामिल है और भविष्य में सदैव इसी प्रकार से समाज के बीच कार्य करते हुये राष्ट्र भक्त कार्यकर्ताओ के निर्माण कार्य में लगा रहूंगा। यही संकल्प मेरे लिए उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

रेशू भाटिया ने भावुक होते हुए कहा कि वह स्वयं और उनके परिवार ने 24 वर्षों से विजय अग्रवाल के संपर्क में रहकर समाज कार्य में उनके मार्गदर्शन मे काम किया है। मैं समझती हूं, वे जिस प्रकार से प्रत्येक पल समाज के व्यक्तियों के निर्माण के बारे में सोचते और उन्हें राष्ट्रहित के कार्यों के लिए प्रेरित करते थे। आज उनके जैसे स्वभाव वाले इस धरती पर बहुत ही कम लोग है। हम सबके बीच से ऐसे महान पुरुष का जाना नि:संदेह समाज हित में रिक्‍तता पैदा कर गया है। हमारे लिए उनकी कमी सदैव बनी रहेगी इसलिए उनके विचारों को समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी बनाये रखूंगी।

अलीगढ़ से कर्नल निशीथ सिंघल ने विजय अग्रवाल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा- निसंदेह मैं उनके संपर्क में तो नहीं रहा लेकिन जैसा कि मुझे मालूम हुआ कि वे अपने नियमों और जीवन में समय का महत्व अधिक रखते थे। आज वह हमारे बीच से ऐसे समय गए, जब पूरी दुनिया प्रकृति के प्रकोप को झेल रही है। इस समय हमें इस संकट से बचने के लिए कोरोना की सरकारी गाइडलाइन के नियम का पालन करना होगा क्योंकि हमारे जीवन मे समय और स्‍वास्‍थ्‍य बहुमूल्य है। इसलिए हम सब इस समय अपने चारों तरफ का वातावरण इस प्रकार बनाएं ताकि हमारा शहर, हमारा प्रदेश, हमारा देश, कोरोना संक्रमण से मुक्त हो सके।

एसजीपीजीआई के लाइब्रेरियन एवं प्रान्त संगठन सचिव आरोग्य भारती अवध प्रान्त डॉ. सुनील अग्रवाल ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि विजय अग्रवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साधारण कार्यकर्ता का दायित्व निभाते हुए कई बड़े पदों के दायित्वों को निभाने में महती भूमिका निभाई है। समाज की आवश्यकता के अनुसार सदैव भविष्य को लेकर चिंतित रहते थे। वे संघ की अनेक नई योजनाओं के जन्मदाता थे। लखनऊ के जियामऊ में स्थापित विश्व संवाद केंद्र हो या प्रकृति भारती हो, इत्यादि भवनों की कल्पना उन्‍हीं की थी, जिसका साकार रूप हम सबके समक्ष दिखाई पड़ रहा है। अभी हाल ही में उन्होंने सुल्तानपुर रोड पर लगभग 20-25 बीघे भूमि पर एक ऐसे छात्रावास की कल्पना की थी, जहां हजारों की संख्या में छात्र/छात्राएं अध्ययन एवं संस्कार प्राप्त कर राष्ट्रीय भाव से ओतप्रोत होकर वहां से अच्छे मनुष्य बनकर देश हित मे अपना योगदान दे सकें और उनकी यह सोच थी कि यहां से छात्रों का निर्माण इस प्रकार से हो ताकि वे भविष्य में राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकें।

अंत मे संघ के अधिकारी डॉ. हरमेश सिंह चौहान ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए बताया कि विजय अग्रवाल मूल रूप से आगरा के रहने वाले थे। वर्तमान में वह जानकीपुरम के अपने आवास पर रह रहे थे। मुझे याद है कि जब उन्होंने मुझे फोन करके यह सूचना दी कि वह घर में गिर पड़े और चोट आ गई है। सुबह उन्हें देखने के लिए गया, एक अस्पताल में ऑपरेशन था, कोरोना प्रोटोकॉल के कारण उनसे भेंट नहीं हो पाई। उनके शरीर में एक-दो बीमारियां भी थीं। फिर भी, वह सदैव समाज हित, राष्ट्र हित में चिंतन-मंथन इत्यादि के संघ कार्य किया करते थे। संगठन के अधिकांश लोग अपने कार्यों को प्रारंभ करने के पूर्व मार्गदर्शन लेने के लिए उनसे सलाह करने अवश्य जाते थे। डॉ. चौहान ने बताया- ऐसे महान पुरुष ने अपने जीवन में अनेक परेशानियां उठायी थीं। देश में जब आपातकाल की स्थिति थी, उन्हें जेल की सलाखों में रहना पड़ा। डॉ.चौहान ने कहा- हम सब के लिए विजय अग्रवाल के लिए सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि आज से हम भी अपना भविष्य उनके बताए हुए मार्ग पर ले जाएं, ताकि शिक्षित, समाज हित, राष्ट्रहित की विचारधारा वाले युवकों का अधिक से अधिक निर्माण हो सके।