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माइग्रेन, अल्जाइमर्स जैसी नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों का उपचार योग से सम्भव

-लखनऊ विश्वविद्यालय में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का नर्वस सिस्टम पर प्रभाव विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

सेहत टाइम्स

लखनऊ। माइग्रेन, अल्जाइमर्स जैसी नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों का उपचार योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा बड़ी सरलता से किया जा सकता है। भारत में माइग्रेन से पीडितों की संख्या 213 मिलियन है। योग का शरीर एवं मानसिक स्तर पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

यह महत्वपूर्ण जानकारी आज 30 नवम्बर को लखनऊ विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ योग एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन, इंडियन योग फेडरेशन,यू.पी.नेचरोपैथी एंड योग टीचर्स एंड फिजिशियन एसोसिएशन, इंडियन योग एकेडमी वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में विश्वकर्मा ऑडिटोरियम, द्वितीय परिसर, लखनऊ विश्वविद्यालय में दीक्षांत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का नर्वस सिस्टम पर प्रभाव विषय पर 19वें राष्ट्रीय सेमिनार में दी गयी। सेमिनार के मुख्य अतिथि सदस्य राज्यसभा डॉ.अशोक बाजपेई, विशिष्ट अतिथि प्रो.आर.जी.सिंह (पूर्व निदेशक, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी) प्रो.राजेंद्र प्रसाद(पूर्व निदेशक,पटेल चेस्ट संस्थान दिल्ली विश्वविद्यालय), प्रो.पी.सी.सक्सेना (निदेशक आयुर्वेदिक सेवाएं आयुष विभाग उत्तर प्रदेश) डॉ.अमरजीत यादव (कोऑर्डिनेटर/ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री) उपस्थित रहे, संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो.एम.एल.बी.भट्ट (पूर्व कुलपति,किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय,लखनऊ) ने की।

डॉ.अशोक वाजपेई द्वारा संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए अपने संबोधन में योग के शरीर एवं मानसिक स्तर पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव पर प्रकाश डाला, उन्होंने बताया कि वर्तमान में कई तरह की बीमारियां जो की नर्वस सिस्टम से संबंधित हैं, जिसका उपचार योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा बड़ी सरलता से किया जा सकता है, माइग्रेन जो कि आम बीमारियों की तरह फैलती चली जा रही है इसका प्रबंधन योगासनों द्वारा मुख्य रूप से शवासन, पवनमुक्त आसन तथा अनुलोम विलोम, शीतली प्राणायाम के अभ्यास से किया जा सकता है तथा इन अभ्यास द्वारा माइग्रेन से उत्पन्न होने वाले दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। डॉ वाजपेई ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का प्रचार-प्रसार कराए ताकि जनमानस को शारीरिक और मानसिक रूप से कल्याणकारी लाभ प्राप्त हो सके तथा प्रदेश में प्रशिक्षित योग एवं प्राकृतिक चिकित्सकों को लिए रोजगार के अवसर प्रदान करे।

डॉ.अमरजीत यादव ने योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के वैज्ञानिक अध्ययन से प्राप्त आंकड़ों को प्रस्तुत किया डॉ.यादव ने बताया कि नर्वस सिस्टम से संबंधित कई तरीके के रोग उत्पन्न होते हैं जिनमें मुख्य रूप से माइग्रेन, हृदय घात एवं अल्जाइमर मुख्य है, डॉ.यादव ने बताया कि पूरे संसार में एक महीने के भीतर 15 दिन या उससे कुछ अधिक समय तक सिर दर्द होने पर जांच के दौरान 1.7% से 4% युवाओं में माइग्रेन पाया गया, भारतवर्ष में माइग्रेन से पीड़ित की संख्या 213 मिलियन है, जिसमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं अधिक है। भारत में वर्ष 2031 तक 20 करोड लोग अल्जाइमर के रोग से ग्रसित हो जाएंगे इस अल्जाइमर से स्वयं को बचाने के लिए योग के कुछ प्रमुख आसन जैसे वज्रासन, पश्चिमोत्तानासन, शीर्षासन एवं सूर्य नमस्कार तथा अनुलोम-विलोम व उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास प्रमुख रूप से करना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि प्रो.राजेंद्र प्रसाद ने संगोष्ठी में संबोधन की शुरुआत योग एक अनुशासन से की, उन्होंने बताया कि नियमित दिनचर्या से तनाव के प्रबंधन में काफी लाभ प्राप्त होता है यह तनाव हृदय रोग का प्रमुख कारण है, तनाव को दूर करने के लिए वृक्षासन, भुजंगासन, सुखासन तथा अनुलोम-विलोम प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। इनके अभ्यास से नर्वस सिस्टम से संबंधित मानसिक रोगों में प्रमुख लाभ प्राप्त होता है, उन्होंने कहा कि वह स्वयं 40 वर्षों से योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कर लाभ प्राप्त कर रहे हैं, संतुलित आहार-विहार जीवनचार्य का विशेष अंग है।

प्रो.पी.सी.सक्सेना ने बताया कि पिछले कुछ सालों से मिर्गी के रोगियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है 5 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं, भारतवर्ष में प्रति 100 व्यक्तियों में 6 से 10 मिर्गी के रोगी पाए जाते हैं, इसके उपचार के लिए उन्होंने अनुलोम-विलोम को एक रामबाण माना है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्रो. एम.एल.बी.भट्ट ने अपने संबोधन में कहा कि नर्वस सिस्टम एक बहुत महत्वपूर्ण सिस्टम है जिससे अनेक रोग उत्पन्न होते हैं, पूरे संसार में एक अरब से अधिक लोग नर्वस सिस्टम से उत्पन्न होने वाली बीमारियों से ग्रसित हैं, उनका कहना था कि इस तरह के रोगियों के उपचार के लिए आसान, प्राणायाम और ध्यान प्रमुख भूमिका निभाता है। यदि व्यक्ति प्रतिदिन कुछ प्रमुख आसन जो कि वज्रासन, श्वसन पश्चिमोत्तानासन, हलासन आदि करे तो उसको विशेष लाभ होगा यदि वह इन आसनों को नहीं कर सकते तो अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, प्राणायाम का अभ्यास अवश्य करें।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षकगण तथा विषय विशेषज्ञ, विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।

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