… तो चल निकलेगी गाड़ी विश्वास की पटरी पर

केजीएमयू में बरेली से आये डॉ बृजेश्वर सिंह ने दिया व्याख्यान

लखनऊ। आज स्थिति यह हो गयी है कि मरीजों व चिकित्सकों के बीच पहले जैसा विश्वास नहीं रहा है। दोनों के बीच कम होता जा रहा विश्वास चिंता का विषय हो गया है, इसका कारण यह है कि इसके पीछे दोनों की अपनी-अपनी सोच है और इस सोच में दोनों की एक-दूसरे से अपेक्षाएं इतनी बढ़ी हुई हैं जो व्यवहारिक नहीं है, इसलिए जरूरी है कि चिकित्सक और मरीज दोनों को ही अपनी सोच में बदलाव लाना होगा।

यह बात आज यहां केजीएमयू आयोजित एक कार्यक्रम में अपने व्याख्यान के दौरान बरेली के सिद्धि विनायक अस्पताल ट्रॉमा सेंटर के मैनेजिंग डाइरेक्टर व वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ बृजेश्वर सिंह ने मेडिकल छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने पुटिंग ह्यूमैनिटी एंड ह्यूमैनिटीज बैक टू मेडिसिन विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि दरअसल डॉक्टर और मरीज के बीच आयी कटुता के व्यवहार की वजह यह है कि डॉक्टर अपने मरीज को प्रॉब्लम की तरह देखते हैं और मरीज भी डॉक्टर को परफेक्ट मानते हुए उनसे गलती की उम्मीद नहीं करते।

उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि मरीज यह माने कि डॉक्टर कोई भगवान नहीं इंसान ही है और अपनी पूरी कोशिश करने के बाद भी कभी-कभी मरीजों को बचा नहीं पाता है। इसी प्रकार डॉक्टर भी अपने मरीज को प्रॉब्लम न मानकर उसके साथ आत्मीय संबंध स्थापित कर उसका विश्वास जीतने की कोशिश करे तो दोनों के बीच एक सकारात्मक सम्बन्ध स्थापित हो सकता है।

डॉ. बृजेश्वर सिंह एक व्यस्ततम हड्डी रोग विशेषज्ञ होने के साथ ही एक लेखक भी हैं। उन्होंने अपने चिकित्सकीय जीवन के कुछ अनुभव 31 कहानियों के रूप में साझा किए हैं। उन्होंने अपने व्याख्यान के दौरान एक डॉक्टर की मौत तथा पैच एडम्स की कहानी भी सुनायी। उन्होंने कहा कि किताबी पढ़ाई के साथ-साथ फिल्मों और साहित्य का भी हमारे व्यक्तित्व को संवारने में बड़ा योगदान है। डॉ सिंह ने आजकल के दौर के कुछ आदर्श डॉक्टर्स का उदाहरण देकर छात्रों को डॉक्टर बनने के बाद अपने कर्तव्यों का पालन करने की नसीहत दी।
ज्ञात हो डॉ सिंह इसी तरह अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में जाकर भविष्य के चिकित्सकों को अपने व्याख्यान के जरिये अच्छे डॉक्टर बनने के साथ अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा देते रहते हैं। आज के इस समारोह में मेडिकल छात्र-छात्राओं के साथ ही कई फैकल्टी मेम्बर्स भी उपस्थित रहे।