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ट्रेन दुर्घटना ने सूरज के पैर-हाथ भले ही छीन लिये लेकिन हौसला नहीं छीन सकी, यूपीएससी परीक्षा में हासिल की 971वीं रैंक

-मैनपुरी के सूरज तिवारी ने उत्‍तीर्ण की प्रतिष्ठित आईएएस की परीक्षा

सूरज तिवारी

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। …कौन कहता है कि आसमां में छेद हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो… जी हां विपरीत परिस्थितियों में भी अपना हौसला न छोड़ने वाले दोनों पैर व हाथ गंवा चुके दिव्‍यांग सूरज तिवारी ने यूपीएससी की परीक्षा उत्‍तीर्ण कर 971वीं रैंक हासिल की है।

उत्‍तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की कुरावली तहसील के मोहल्‍ला घरनाजपुर के रहने वाले साढ़े 26 वर्षीय दिव्यांग सूरज तिवारी जब बीएससी कर रहे थे उसी दौरान 24 जनवरी 2017 को दादरी गाजियाबाद में ट्रेन दुर्घटना में सूरज अपने दोनों पैर, कुहनी तक दाहिना हाथ एवं बाएं हाथ की दो उंगलियां गंवा बैठे थे। इस दुर्घटना के बाद सूरज ने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई को जारी रखते हुए उन्होंने 2021 में जेएनयू दिल्ली से ग्रेजुएशन किया, वर्तमान में वह पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के साथ-साथ देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा आई ए एस की तैयारी भी कर रहे थे।

रोजाना 18 घंटे पढ़ने वाले सूरज के पिता राजेश तिवारी टेलरिंग का काम करते हैं और उसी से घर का खर्च चलता है। विपरीत परिस्थितियों में भी अपना हौसला ना छोड़ने वाले सूरज की जिंदगी में आज का सूरज सुनहरे भविष्य की रोशनी लेकर आया और उन्‍हें यूपीएससी के परिणाम में सफलता की रोशनी से सराबोर कर दिया। सूरज की मां आशा देवी एक गृ‍हि‍णी हैं तथा छोटा भाई राघव बीएससी तथा छोटी बहन प्रिया बीटीसी कर रही है, सूरज के बड़े भाई राहुल तिवारी की 2017 में मृत्यु हो गई थी।

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