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दीपोत्सव व गीत-संगीत-संवाद से बुनी ‘राम कहानी’ से हुआ नव संवत्सर का स्वागत

-गोमती किनारे खाटू श्याम मंदिर प्रांगण में बही भक्ति एवं उल्लास की प्रेम धारा

-15 वर्षों से भारतीय नव वर्ष मनाने की चेतना जगा रही है नव वर्ष चेतना समिति

धर्मेन्द्र सक्सेना

लखनऊ। 15 वर्षों पूर्व विक्रम संवतत्सर को भारतीय नव वर्ष के रूप में मनाने की जन-जन में चेतना जगाने के लिए गठित की गयी समिति नव वर्ष चेतना समिति ने अत्यन्त धूमधाम के साथ संवत 2082 का स्वागत दो दिवसीय समारोह से किया। नवसंवत की पूर्व संध्या पर प्रथम दिन नव चैतन्य पत्रिका के लोकार्पण के बाद अगले दिन विक्रम संवत् 2082 के प्रथम दिवस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (रविवार 30 मार्च) को सायं दीपोत्सव व संगीत, गायन व संवाद के माध्यम से ‘राम कहानी’ की मनमोहक एवं कर्णप्रिय प्रस्तुति से इस नववर्ष स्वागत कार्यक्रमों का समापन किया गया।

बीरबल साहनी मार्ग स्थि​त खाटू श्याम मंदिर परिसर में मन को शीतल करती गोमती नदी के किनारे बहती बयार के बीच आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या की मुख्य अतिथि रिटायर्ड आईएएस अनीता भटनागर जैन तथा विशिष्ट अतिथि प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, लखनऊ की राजयोग-शिक्षिका ब्रह्मकुमारी राधा व सेंट जोजेफ स्कूल, लखनऊ की संस्थापक-अध्यक्ष पुष्पलता अग्रवाल थीं, जबकि समारोह की अध्यक्षता सेवानिवृत्त मुख्य आयकर आयुक्त उषा गुप्ता ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत मंच पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, इस प्रज्ज्वलित दीप की ज्योति से इसी परिसर में रंगोली के बीच कलात्मक रूप से सजाये गये मिट्टी के दीयों की ज्योति को भी प्रज्ज्वलित कर दीपोत्सव कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि अनीता भटनागर जैन के साथ ही समिति की संरक्षक रेखा त्रिपाठी, अध्यक्ष डॉ गिरीश गुप्ता, कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ एसपी सिंह, सचिव डॉ सुनील अग्रवाल के साथ ही समिति के अन्य पदाधिकारियों ने दीयों को प्रज्ज्वलित किया।

इसके पश्चात कथा रंग फाउंडेशन, लखनऊ के कलाकारों द्वारा गीत-संगीत-संवाद की कर्णप्रिय प्रस्तुति ‘राम कहानी’ आरंभ हुई। लंबी राम कहानी को अति महत्वपूर्ण कथानकों के माध्यम से एक सूत्र में पिरोकर उसे रोचक शैली में मात्र एक से डेढ़ घंटे में अत्यन्त सुन्दर तरीके से समाहित कर प्रस्तु​त किया गया। कार्यक्रम की परिकल्पना जानी-मानी कलाकार नूतन वशिष्ठ की थी, जबकि शोध एवं आलेख विनीता मिश्रा ने तैयार किया। इस कहानी में संगीत निर्देशन राहुल अवस्थी और संयोजन पुनीता अवस्थी का था जबकि इसका निर्देशन अनुपमा शरद ने किया। राम सियाराम सियाराम जै जै रामहरि अनंत हरि कथा अनंतागुरु गृह गये पढ़न रघुरायीजेहि कें जेहि पर सत्‍य सनेहूश्री रघुवर कोमल कमल नयन को पहनाओ जयमालारघुकुल रीति सदा चली आयी तापस बेष बिसेषि उदासी, चौदह बरिस रामु बनबासीराम सिया भेज दयी वन मेंरघुराई हे रघुराई पग धोकर नांव चढ़ियो जैसी चौपाइयों, भजनों और बीच-बीच में संवादों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर झूमने पर मजबूर कर दिया।

नये वर्ष पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया अनीता भटनागर जैन ने

इसके पश्चात मुख्य अतिथि अनीता भटनागर जैन ने अपने सम्बोधन में उपस्थित लोगों से इस नव संवत में पर्यावरण को बचाने की दिशा में प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारी अपनी हिंदू परंपरा में पर्यावरण को और प्रकृति को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। हम पृथ्वी मां की संतान कहलाते हैं। हम पृथ्वी को अपनी मां कहते हैं, हम तो गंगा मैया को भी मां कहते हैं लेकिन अपनी इस मां को संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए कितना प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने पिछले 22 वर्ष से प्लास्टिक की बोतल का उपयोग नहीं किया 1 हम सब्जी लेने जाते हैं तो क्यों नहीं एक थैला साथ में ले जायें, जिससे प्लास्टिक की पन्नी का उपयोग बंद हो। उन्होंने कहा कि जो पेड़ हमें जीवित रखने के लिए ऑक्सीजन प्रदान करता है, उस पेड़ को हम कितना लगाते हैं, यही नहीं अगर नगर निगम घर के बाहर पेड़ लगा दे तो कितने लोग ऐसे हैं जो उसकी देखभाल करते हैं। उन्होंने कहा कि इस नए साल को हम नए तरीके से प्रारम्भ करें, उन्होंने कहा कि मैं बच्चियों से कहना चाहूंगी कि आजकल के बिल्कुल पहनें लेकिन कभी-कभी साड़ी भी पहनें ताकि हम लोग अपनी परंपराओं को अपनी संस्कृति को अपने परिवार में अपने जीवन में जागृत रख सकें। उन्होंने सभी को नव संवत की शुभकामनाएं दीं।

 

कथाओं तक ही नहीं, जीवन में भी राम राज्य का संकल्प लें : ब्रह्मकुमारी राधा

विशिष्ट अतिथि ब्रह्म कुमारी राधा ने नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि से होता है जीवन के भिन्न-भिन्न अंगों में आज्ञाकारी, ईमानदारी, सच्चाई, सफाई, निर्मलता जैसे गुणों के प्रतीक श्री राम की कहानी बचपन से न जाने कितनी बार सुनी है, हमें पता होता है कि राम कहानी में अब अगली लाइन में क्या आने वाला है लेकिन हम फिर भी उत्सुकता, भावुकता के साथ राम कहानी सुनते हैं। उन्होंने कहा कि हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे राम राज्य को दुनिया में लायें उन्हें सिर्फ कथा तक सीमित न रखें। आज के दिन राम राज्य स्थापित करने का संकल्प बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि हम सब इस प्रकृति को एक नयी सोच, एक नये दृष्टिकोण से देखें और सोचें कि हम सभी उपभोग के लिए आए हैं या उपयोग के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि राम राज्य के लिए कहा गया है कि राम राजा राम प्रजा। उन्होंने कहा कि हम इस दुनिया को ऐसा सुंदर राम राज्य बनाकर आने वाली पीढ़ी को देने का संकल्प लें। कहा गया है कि जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि, ब्रह्मा जी ने संकल्प से सृष्टि रची। हम सबके पास संकल्प की शक्ति है तो क्यों न नयी चेतना के आगे रामराज्य बनाने का संकल्प लें।

अंत में समिति की पदाधिकारी डॉ रंजना द्विवेदी ने आये हुए सभी अतिथियों के साथ ही खाटू श्याम मंदिर परिवार का अत्यन्त आभार व्यक्त करते हुए उनका धन्यवाद अदा किया। इस मौके पर समिति की ओर से मुख्य अतिथि, विशि​ष्ट अतिथियों, सभी कलाकारों आदि को अध्यक्ष डॉ गिरीश गुप्ता, कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ एसपी सिंह, सचिव डॉ सुनील अग्रवाल, संरक्षिका रेखा त्रिपाठी, अजय सक्सेना, पुनीता भटनागर, डॉ रंजना द्विवेदी, डॉ संगीता शुक्ला व अन्य पदाधिकारियों ने स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र से सम्मानित किया। विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने कार्यक्रम में पहुंचकर इस भव्य आयोजन के लिए समिति की सराहना की। इस आयोजन के मौके पर सुमित तिवारी, नव वर्ष चेतना समिति की बाराबंकी इकाई के संयोजक राम स्वरूप यादव, राकेश कुमार यादव, अरुण कुमार मिश्र, प्रियंका चौहान, डॉ हरेन्द्र श्रीवास्तव, इं. हेमन्त कुमार, संजीव श्रीवास्तव, राधेश्याम सचदेवा, भारत सिंह, कुमकुम अग्रवाल, शोभित नारायण अग्रवाल, श्याम किशोर त्रिपाठी, श्यामजी त्रिपाठी, समीर चंदेल सहित अनेेक पदाधिकारी, उनके परिजन व अन्य लोग शामिल रहे।

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