-वरिष्ठ संकाय सदस्यों के साथ ही रेजीडेंट डॉक्टर व कर्मचारियों ने किया सांकेतिक प्रदर्शन

सेहत टाइम्स
लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नये नियमों को लेकर देश भर में विरोध तेज होता जा रहा है। इसके विरोध की आवाज बुधवार 28 जनवरी को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय केजीएमयू से भी उठ गयी हैं। बहस और विरोध के बाद से केजीएमयू में अंदर ही अंदर सुलग रही विरोध की आग आज प्रदर्शन के रूप में सामने आयी है। सामान्य वर्ग की फैकल्टी, चिकित्सकों, कर्मचारियों ने आज विद्या की देवी सरस्वती के मंदिर प्रांगण में स्थित पार्क में बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर नये नियमों पर विरोध जताया।
स्टेथोस्कोप, सर्जरी के औजार पकड़ने वाले डॉक्टरों ने आज हाथों में नये नियमों के विरोध वाले पोस्टर थाम रखे थे। काला कानून वापस लो…यह तो बस अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है… जैसे नारों के साथ सांकेतिक प्रदर्शन किया गया। हालांकि संकेत ही संकेत में डॉक्टरों ने यह संदेश तो दे ही दिया कि फिलहाल मरीजों के हितों को देखते हुए सांकेतिक विरोध जताया गया है।
नयी नियमावली पर आक्रोश जताने के लिए केजीएमयू में शिक्षकों, रेजिडेंट और कर्मचारियों ने मिलकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का मानना है कि यह नीति कैंपस में जाति-आधारित भेदभाव को कम करने के बजाय बढ़ावा देने वाली हो सकती है, उनका कहना है कि ये प्रावधान गैर-समावेशी हैं, और ये जाति-आधारित भेदभाव पैदा करने वाले हैं। केजीएमयू में इसका विरोध करने पहुंचे चिकित्सकों में डॉ मनीष बाजपेयी, डॉ संदीप तिवारी, डॉ समीर मिश्रा, डॉ अनिल कुमार गुप्ता, डॉ प्रेमराज सिंह, डॉ अविनाश अग्रवाल, डॉ अमिय अग्रवाल, डॉ बृजेश कुमार, डॉ दिव्य नारायण उपाध्याय, डॉ विभा सिंह, डॉ तन्मय तिवारी, डॉ नवनीत चौहान आदि शामिल रहे।
डॉ. समीर मिश्रा ने कहा कि जिस तरह के प्रावधान रखे गये हैं उससे तो यह लगता है कि जैसे पहले से निश्चित हैं कि सामान्य वर्ग के लोग ही अत्याचार करेंगे, क्योंकि जो कमेटी बनाने की बात कही गयी है उसमें सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व रखा ही नहीं गया है। ऐसे में इस बिल को वापस लेना चाहिए। डॉ. मनीष बाजपेयी ने कहा कि जहां तक बिल में संशोधन की बात है तो इस बिल में संशोधन की कोई गुंजाइश छोड़ी ही नहीं गयी है, यह पूरी तरह से सामान्य वर्ग के खिलाफ है।
डॉ. अमिय अग्रवाल ने कहा है कि यह बिल एक तरह से सामान्य वर्ग के खिलाफ है, कांग्रेस भी पहले कम्युनल वायलेंस बिल लाना चाह रही थी, उसी बिल का स्वरूप इस बिल में दिख रहा है। उन्होंंने इस बिल को वापस लेने की मांग की। डॉ.नवनीत चौहान ने भी कहा कि सामान्य वर्ग के प्रति सोच पहले से ही तैयार रखी गयी है कि यही वर्ग गलत करेगा। यह बिल कतई स्वीकार नहीं है, यह बिल वापस होना ही चाहिये।
प्रो.विभा सिंह ने भी बिल पर विरोध जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। डॉ संदीप तिवारी ने कहा कि विडम्बना है कि जब समाज में समरसता आ रही है तो ऐसे में इस प्रकार का बिल लाकर उचित नहीं किया गया है, यह भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हम सामान्य वर्ग से हैं, हमने कभी भी इलाज करते समय किसी की जाति और धर्म को नहीं देखा। सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ यूजीसी का नया नियम अन्यायपूर्ण हैं।

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