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दृष्टिवंचित लोगों के जीवन में महादान की कार्निया से रोशनी बिखेरने की मुहीम एक कदम आगे बढ़ी

-उत्तर प्रदेश सरकार ने डॉ राजेश हर्षवर्द्धन की अध्यक्षता में गठित की उच्च स्तरीय टास्क फोर्स

डॉ. राजेश हर्षवर्द्धन

सेहत टाइम्स

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेते हुए नेत्रदान एवं प्रत्यारोपण पर उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टास्क फोर्स चिकित्सा अधीक्षक, एसजीपीजीआईएमएस संयुक्त निदेशक SOTTO-UP डॉ. राजेश हर्षवर्द्धन की अध्यक्षता में गठित इस फोर्स में प्रदेश के प्रमुख कॉर्नियल प्रत्यारोपण विशेषज्ञों एवं शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के विभागाध्यक्षों को शामिल किया गया है।

अध्यक्ष डॉ हर्षवर्द्धन ने यह जानकारी देते बताया कि शासन द्वारा गठित इस फोर्स में डॉ. अल्का गुप्ता (एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ) को सह-अध्यक्ष, डॉ. शालिनी मोहन (जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर) को सदस्य सचिव तथा डॉ. शैफाली मजूमदार (एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा) को संयोजक नियुक्त किया गया है।
टास्क फोर्स के सदस्यों में डी०जी०एम०ई० चिकित्सा शिक्षा के महानिदेशक अथवा उनके द्वारा नामित व्यक्ति, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के महानिदेशक अथवा उनके द्वारा नामित व्यक्ति के अलावा प्रो० विकास कनौजिया, एच०ओ०डी० नेत्र, एस०जी०पी०जी०आई०, लखनऊ, डा० (कर्नल) मधु भदौरिया, निदेशक, नेत्र चिकित्सालय सीतापुर, के साथ विभागाध्यक्ष नेत्र रोग विभाग, के०जी०एम०यू०, लखनऊ, विभागाध्यक्ष नेत्र रोग विभाग, बी०एच०यू०, वाराणसी, विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग, डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ, विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग, ए०एम०यू०, अलीगढ़, डा० अभिषेक चन्द्रा, निदेशक नेत्रोदय आई सिटी, वाराणसी के अतिरिक्त आवश्यकतानुसार विशेष आमंत्रित सदस्य को शामिल किये जाने का प्रावधान है।

डॉ हर्षवर्द्धन ने बताया कि स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTTO-UP) एवं एसजीपीजीआईएमएस के हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग द्वारा बीती 28 फरवरी को आयोजित हुए नेत्रदान एवं प्रत्यारोपण पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण विमर्श कार्यक्रम ‘नेत्रमंथन’ के दौरान हुई पैनल चर्चा के क्रम में फोर्स का गठन किया गया है। पैनल चर्चा का आयोजन स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTTO-UP) एवं एसजीपीजीआईएमएस के हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग द्वारा किया गया था। इसी अवसर पर अपर मुख्य सचिव अमित घोष द्वारा टास्क फोर्स के गठन की औपचारिक घोषणा भी की गई थी।

उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य में रोके जा सकने वाले अंधत्व को समाप्त करने तथा नेत्र चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चिकित्सा शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित यह टास्क फोर्स राज्य में कॉर्नियल दान, आई बैंकिंग तथा कॉर्नियल प्रत्यारोपण की संपूर्ण व्यवस्था का मूल्यांकन कर उसे सुदृढ़ बनाने के लिए कार्य करेगी।

कॉर्नियल अंधत्व भारत सहित उत्तर प्रदेश में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो दृष्टिहीनता से पीड़ित हैं, जबकि कॉर्नियल प्रत्यारोपण के माध्यम से उनकी दृष्टि पुनः स्थापित की जा सकती है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में प्रगति और विशेषज्ञ सर्जनों की उपलब्धता के बावजूद, दाता कॉर्निया की मांग और आपूर्ति के बीच एक बड़ा अंतर बना हुआ है। इस अंतर के प्रमुख कारणों में नेत्रदान के प्रति सीमित जन-जागरूकता, सामाजिक भ्रांतियां, तथा आई बैंकिंग प्रणाली में संरचनात्मक एवं परिचालन संबंधी चुनौतियां शामिल हैं। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस टास्क फोर्स का गठन किया है, ताकि वर्तमान स्थिति का समग्र मूल्यांकन कर व्यावहारिक एवं प्रभावी समाधान सुझाए जा सकें।

उन्होंने बताया कि टास्क फोर्स को कॉर्नियल दान एवं प्रत्यारोपण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए जिन प्रमुख उद्देश्यों के साथ कार्य करने का दायित्व सौंपा गया है उसमें राज्य में कॉर्नियल दान की दर, आई बैंकों के कार्यकलाप, प्रत्यारोपण की संख्या एवं उनके परिणामों का विस्तृत मूल्यांकन करना, ऐसे संस्थागत, परिचालन, लॉजिस्टिक एवं सामाजिक कारणों की पहचान करना, जो प्रभावी नेत्रदान एवं प्रत्यारोपण में बाधा उत्पन्न करते हैं। इसके अतिरिक्त कॉर्नियल दान तंत्र को सुदृढ़ करने, आई बैंकों की कार्यक्षमता बढ़ाने एवं प्रत्यारोपण दर में वृद्धि के लिए साक्ष्य-आधारित एवं व्यवहारिक नीतिगत सुझाव प्रस्तुत करना, स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए सुझाव देना, जन-जागरूकता एवं सहभागिता, नेत्रदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी रणनीतियां सुझाना है।

उन्होंने कहा कि टास्क फोर्स कॉर्नियल दान एवं प्रत्यारोपण से संबंधित सभी पहलुओं का अध्ययन करेगी, जिनमें शामिल हैं:
– राज्य में आई बैंकों का कार्य एवं उनका वितरण
– दाता कॉर्निया की उपलब्धता एवं उपयोग
– हॉस्पिटल कॉर्निया रिट्रीवल प्रोग्राम (HCRP) का क्रियान्वयन
– अंग एवं ऊतक दान से संबंधित विधिक एवं प्रक्रियात्मक ढांचा
– अस्पतालों, आई बैंकों एवं प्रत्यारोपण केंद्रों के बीच समन्वय
– डेटा प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली

उन्होंने कहा कि इस पहल की सफलता में जन-जागरूकता एवं सहभागिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे नेत्रदान के लिए आगे आएं एवं इस पुनीत कार्य में योगदान दें। नेत्रदान एक महान दान है, जो किसी के जीवन में पुनः प्रकाश ला सकता है। समाज की सक्रिय भागीदारी से दाता कॉर्निया की उपलब्धता एवं मांग के बीच की दूरी को कम किया जा सकता है।