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आमजन में होम्योपैथी की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए दिये सुझाव

एशियन होम्योपैथिक मेडिकल लीग ने आयोजित किया अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार

सेहत टाइम्स
लखनऊ।
वैज्ञानिक कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरने वाली, कोरोना काल में अपनी उपयोगिता सिद्ध कर चुकी, अनेक असाध्य रोगों को जड़ से खत्म करने की ताकत रखने के बावजूद होम्योपैथी आमजन के बीच वह स्थान नहीं बना पा रही है, जिसकी वह हकदार है।


एशियन होम्योपैथिक मेडिकल लीग द्वारा इस महत्वपूर्ण विषय how to improve image of homeopathy in public पर शनिवार को एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। वेबिनार में भारत के साथ ही रूस, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि देशों से जुड़े करीब एक दर्जन विशेषज्ञों ने इस मसले पर विचार रखते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।


सर गंगा राम हॉस्पिटल ट्रस्ट के पूर्व सचिव व एशियन होम्योपैथिक मेडिकल लीग के president of honour डॉ ए के सेठ जो वर्तमान में अमेरिका में हैं, की अध्यक्षता में लगभग 2 घंटे चले इस वेबिनार की शुरुआत एशियन होम्योपैथिक मेडिकल लीग के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ गिरीश गुप्त के स्वागत भाषण से हुयी।

इस मौके पर विशेषज्ञों ने होम्योपैथी की लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए जो सुझाव दिये उनमें एक महत्वपूर्ण सुझाव था कि साक्ष्य आधारित प्रैक्टिस की जानी चाहिए यानी हम जो उपचार करें उसका साक्ष्य मौजूद रहे जिससे लोगों का होम्योपैथी पर विश्वास बढ़ेगा। एक अन्य में सुझाव में कहा गया जिस रोग को होम्योपैथी में ठीक नहीं किया जा सकता है उसके बारे में शुरू में ही मरीज को मना कर दिया जाए कि इस रोग का इलाज होम्योपैथी में नहीं हो सकता है। मरीज को भ्रम में ना रखें।


एक अन्य सुझाव में कहा गया है कि उपचार के दौरान अनावश्यक रूप से खानपान पर प्रतिबंध न लगाए जाएं। ज्ञात हो अनेक चिकित्सक प्याज, लहसुन जैसी चीजों के साथ ही अन्य खुशबूदार चीजें खाने पर प्रतिबंध लगा देते हैं, जबकि डॉ गिरीश गुप्ता द्वारा की गई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि खुशबूदार चीजों का होम्योपैथिक दवा पर कोई असर नहीं होता है।

एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया कि होम्योपैथिक चिकित्सक एलोपैथिक चिकित्सक के साथ मिलजुलकर उनको विश्वास में लेकर कार्य करें।एलोपैथिक चिकित्सकों को बताएं कि जिन रोगों का इलाज एलोपैथिक में नहीं है और उसका इलाज होम्योपैथी में उपलब्ध है तो ऐसे रोगों के इलाज का साक्ष्य दिखाते हुए एलोपैथिक डॉक्टर से समन्वय स्थापित कर उन रोगों के मरीजों का इलाज करें।


एक अन्य सुझाव में कहा गया कि अपने कार्यों का समाचार पत्रों, मीडिया, सोशल मीडिया जैसे साधनों द्वारा जनता के बीच प्रचार प्रसार करें। बंग्लूरु के डॉ बी डी पटेल, पंजाब के डॉ तनवीर हुसैन और ग्वालियर के डॉ राजेश और डॉ सपना गुप्त ने अपने संबोधन में साक्ष्य आधारित उपचार, प्रेक्टिस के साथ रिसर्च जैसे कार्य करने वाले डॉ गिरीश गुप्त के कार्यों का उदाहरण देते हुए आह्वान किया कि इन कार्यों को करने से ही होमियोपैथी के प्रति लोगों में विश्वास बढ़ाया जा सकता है। वेबिनार का संचालन एशियन होम्योपैथिक मेडिकल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ संदीप कैला ने किया।

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