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सीएचसी पर जरूरत है सात फार्मासिस्‍ट की, तैनाती है दो की

-जनप्रतिनिधि सीएचसी गोद ले रहे, अच्‍छी बात लेकिन इस पर भी ध्‍यान दीजिये

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को विधायकों एवं मंत्रियों द्वारा गोद लेकर उसकी व्यवस्था को सुदृढ़ करने का स्वागत करते हुए फार्मेसिस्ट फेडरेशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह भी मांग की है कि वहां उत्कृष्ट कार्य के लिए जनहित में फार्मेसिस्ट के अतिरिक्त पदों के सृजन किया जाना आवश्यक हैं। सात फार्मासिस्‍ट पद की जरूरत है जबकि तैनाती दो की है। पत्र की प्रति मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव कार्मिक, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को भी प्रेषित की गई है।

यह जानकारी देते हुए फेडरेशन के महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि फेडरेशन ने मुख्यमंत्री सहित सभी विधायकों एवं मंत्रियों का आभार व्यक्त किया है कि प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सुधारने की एक अच्छी पहल की जा रही है, परंतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की सबसे बड़ी समस्या वहां मानव संसाधन की कमी है, इसलिए वहां के भवनों की मरम्मत के साथ ही मानव संसाधन बढ़ाया जाना भी आवश्यक है।

इस बारे में फार्मासिस्ट फेडरेशन (फार्मासिस्ट महासंघ) के अध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि “मानव के मूल अधिकारों मे ‘राइट टू लाइफ’ की संवैधानिक व्यवस्था है। इस व्यवस्था में मानव जीवन को भौतिक, मानसिक और आत्मिक रूप से स्वस्थ रंखने का दायित्व सरकार का है।” हमारे देश की अधिकांश जनता ग्रामीण क्षेत्रो में निवास करती है अतः प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जनहित को देखते हुए कार्य एवं आवश्यकतानुसार फार्मेसिस्ट के पदों के मानक में संशोधन किया जाना अनिवार्य है। सुनील यादव ने बताया कि प्रदेश में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) 24 घंटे सेवा देने वाला प्रथम रेफरल केंद्र है, जहां विशेषज्ञ देखभाल की व्यवस्था है।

उन्‍होंने बताया कि मानक के अनुसार वहां केवल 2 फार्मेसिस्ट के पद हैं जबकि 24 घंटे की 3 शिफ्ट (सुबह 8 से 2, दोपहर 8 से रात 8, रात 8 से सुबह 8 तक) सभी में एक फार्मेसिस्ट आकस्मिक सेवा एवं मेडिकोलीगल के लिए ड्यूटी रूम में रहना अनिवार्य है, लेकिन 2 लोगों से 24 घंटे ड्यूटी रूम में उपस्थिति व्यवहारिक ही नहीं है, इसलिए अक्सर एक फार्मेसिस्ट लगातार 24 से 36 घंटे अस्पताल में रहकर सेवा कर रहा है। वहीं औषधि भंडार, मेडिसिन काउंटर पर आने वाले मरीजों के लिए कम से कम 2 फार्मेसिस्ट, इंजेक्शन, ड्रेसिंग रूम, प्लास्टर रूम, माइनर ओटी आदि सेवाओं के लिए न्यूनतम 2 फार्मेसिस्ट होने ही चाहिए।

फेडरेशन का मानना है कि यह भी सभी जानते हैं कि संक्रामक रोगों सहित बाल एवं मातृ शिशु कल्याण, ग्रामीण स्वास्थ्य के लिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से पूरे ब्लॉक के स्वास्थ्य कार्यकताओं/ आंगनबाड़ी/ आशा आदि को भी दवाएं वितरित की जाती हैं।

उन्‍होंने कहा कि यही नहीं राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी फार्मेसिस्टों की ड्यूटी लगाई जाती है। आवश्यकतानुसार वी आई पी ड्यूटी में एम्बुलेंस में भी फार्मेसिस्ट की ड्यूटी होती है। राष्ट्रीय कार्यक्रम नसबंदी के दिन मरीजों को दवा वितरण के साथ ही कैम्प का प्रबंधन भी फार्मेसिस्ट द्वारा किया जाता है । इस प्रकार न्यूनतम 7 फार्मेसिस्टों के कार्य एवं दायित्व का निर्वहन मात्र 2 फार्मेसिस्टों द्वारा संचालित होने से जनता को उचित व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाऐं उपलब्ध होने में निश्चित ही कठिनाई आती है।

उन्होंने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा, प्रसूति और स्त्री रोग, सर्जरी, बाल रोग, दंत चिकित्सा आदि विशेषज्ञ सेवाएं संचालित हैं. परंतु उक्त केंद्रों पर मानक के अनुसार फार्मेसिस्ट के केवल 2 पद सृजित होते हैं। पूर्व में सृजित केंद्रों पर चीफ फार्मेसिस्ट के एक पद आवंटित किए गए थे परंतु मानक में संशोधन न होने से नवसृजित सीएचसी पर अभी चीफ फार्मेसिस्ट के पद भी सृजित नहीं हो रहे।

संयोजक एवं फीपो के राष्ट्रीय अध्यक्ष के के सचान, डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप बडोला ने बताया कि शासन स्तर पर मानक संसोधन पर कई बार सहमति भी बनी है, महानिदेशालय से प्रस्ताव भी भेजे गए हैं लेकिन शासनादेश निर्गत न होने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्य संचालन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के फार्मेसिस्टों को बुलाया जाता है, जिससे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं भी प्रभावित हो जाती हैं।

फेडरेशन के महामंत्री अशोक कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जे पी नायक, उपाध्यक्ष ओ पी सिंह, जनपद अध्यक्ष एस एन सिंह, डीपीए जनपद अध्यक्ष सुशील त्रिपाठी ने आशा व्यक्त की है कि मुख्यमंत्री द्वारा इस बिंदु पर ध्यान दिया जाएगा।