–डॉ गिरीश गुप्ता के होम्योपैथिक दवाओं पर किये गये स्टडी कार्य को मिल रही सराहना


सेहत टाइम्स
लखनऊ। लगभग सवा दो सौ चिकित्सकों से भरे हॉल में पिन ड्रॉप साइलेंस के बीच मंच पर तीन घंटे में तीन सौ स्लाइड के जरिये जब चिकित्सकों ने होम्योपैथी की उपयोगिता को साक्ष्यों के साथ देखा तो देखते ही रह गये, इसकी मुख्य वजह थी कि होम्योपैथी में इस तरह की स्टडी, जिसमें एक ही रोग से ग्रस्त रोगियों के लिए अलग-अलग दवाओं का चुनाव उस रोगी विशेष की विस्तार से ली गयी हिस्ट्री, उसकी मन:स्थिति व उसकी प्रकृति को देखकर किया गया हो, साथ ही उपचार के बाद रोगी को हुए पूर्ण लाभ, आंशिक लाभ या लाभ न होने के बारे में विस्तार से परिणाम दिये हों, ऐसी स्टडी आमतौर पर होम्योपैथिक चिकित्सक नहीं करते हैं।
मौका था बीते रविवार 4 जनवरी, 2026 को गुजरात के नाडियाड शहर में Homoeopathy : amazing clinical applications & its understanding for all विषय पर आयोजित स्टेट लेवल साइंटिफिक सेमिनार का। सेमिनार का आयोजन दि होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एचएमएआई)-नाडियाड यूनिट व नाडियाड होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। एक दिन के सेमिनार में दो वक्ताओं डॉ गिरीश गुप्ता और डॉ सुनील शाह ने व्याख्यान प्रस्तुत किये थे। डॉ सुनील शाह ने विभिन्न प्रकार के रोगों को ठीक करने के लिए किये गये अपने साक्ष्य आधारित शोध, जो सफल हुए, के बारे में जानकारी दी। जबकि दूसरे स्पीकर डॉ गिरीश गुप्ता ने अपने प्रेजेन्टेशन में शोध की विस्तृत स्टडी प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने रोग ठीक किये जाने में सफलता, आंशिक सफलता व असफलता तीनों की जानकारी दी गयी है।
तीन घंटे चले प्रेजेन्टेशन में डॉ गिरीश गुप्ता ने सात प्रकार के त्वचा रोगों पर किये गये अपने शोध कार्यों का प्रदर्शन स्लाइड्स के जरिये किया। उन्होंने विटिलिगो यानी ल्यूकोडर्मा (सफेद दाग), सोरियासिस, एलोपीशिया एरियटा, लाइकिन प्लेनस, वार्ट, मोलस्कम कॉन्टेजियोसम तथा माइकोसेस ऑफ नेल के दो-दो रोगियों के केसेज के बारे में विस्तार से अपना प्रेजेन्टेशन दिया।
ज्ञात हो डॉ गिरीश गुप्ता पिछले 40 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहे हैं, तथा अब तक विभिन्न प्रकार के स्त्री रोगों, त्वचा रोगों, क्रॉनिक किडनी डिजीज के साथ ही होम्योपैथिक दवाओं की इन विट्रो रिसर्च यानी दवा के असर को लैब में कल्चर प्लेट में सिद्ध करने सम्बन्धी स्टडी की हैं, इन सभी स्टडीज का प्रकाशन विभिन्न प्रतिष्ठित भारतीय एवं विदेशी जर्नल्स में हो चुका है। इसके अतिरिक्त साक्ष्य आधारित इन शोधों पर उनकी तीन पुस्तकें 1.Evidence-based Research of Homoeopathy in Gynaecology, 2. Evidence-based research of Homoeopathy in Dermatology तथा 3. Experimental Homoeopathy प्रकाशित हो चुकी हैं।
सेमिनार में होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के नेशनल डिप्टी प्रेसीडेंट डॉ पीयूष जोशी भी उपस्थित रहे, आयोजकों ने उन्हें सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त इस मौके पर होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया, गुजरात शाखा के प्रेसीडेंट डॉ हरेश पटेल, महासचिव डॉ अंकुर देसाई और साइंटिफिक कमेटी के चेयरमैन डॉ मयूर टोलट के साथ ही एसोसिएशन की नाडियाड यूनिट एवं नाडियाड होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन की सेमिनार मैनेजमेंट कमेटी के प्रेसीडेंट डॉ अतुल जोशी, डॉ रौनक पटेल, सचिव डॉ परेश चौकशी, डॉ विपुल शाह, कोषाध्यक्ष डॉ केतन नरखी, डॉ संदीप भट्ट तथा यूनिट एडवाइजर डॉ योगेश पंजाबी, डॉ जिगर ठक्कर सहित अनेक चिकित्सक मौजूद रहे।

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