Sunday , September 19 2021

केजीएमयू के पूर्व कुलपति प्रो.रविकांत के खिलाफ जांच के आदेश

नियुक्तियों और वित्तीय लेनदेन में अनियमितता की हुई थी शिकायत

लखनऊ. अखिलेश सरकार में ठसके के साथ रहने वाले केजीएमयू के पूर्व कुलपति प्रो.रविकांत की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. प्रो.रविकांत के खिलाफ नियुक्तियों और वित्तीय लेनदेन में की गयी अनियमितता की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए शासन ने जांच के आदेश दिए हैं.

शासन ने जांच का जिम्मा केजीएमयू के कुलपति को सौपते हुए आदेश दिए हैं की एक समिति बनाकर जांच करें. यह भी कहा है कि जो समिति बनाएं उसमें केजीएमयू के कुलसचिव को जरूर शामिल करें. ज्ञात हो कुलसचिव शासन का प्रतिनिधि होता है.प्रो. रविकांत वर्तमान में ऋषिकेश एम्स में डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं.

बताते चलें कि प्रो. रवि कान्त के खिलाफ नियुक्तियों में और वित्तीय लेनदेन में अनियमितताओं की शिकायतें हैं. इस सम्बन्ध में केजीएमयू की कार्य समिति के सदस्यों डॉ. गुरमीत सिंह, डॉ. सुरेश अहिरवार, डॉ. खुर्शीद उर रहमान तथा डॉ. जीके शुक्ल ने 12 मई, 2016 को संयुक्त रूप से कुलाधिपति से शिकायत की थी. इसमें मनमानी तरीके से प्रशासनिक तथा गैर प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां की शिकायत की गयी थी.

इसके बाद केजीएमयू टीचर्स एसोसिएशन ने भी 2 जून, 2016 को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी. इस पत्र में भी नियुक्तियों में अनियमितताओं तथा वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे. पूर्व कुलपति रविकांत पर आरोप हैं कि वह तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं राजभवन के मौखिक निर्देशों पर नियुक्तियां करते रहे, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है.

इसके अलावा डॉ. रविकांत पर के.जी.एम.यू., ट्रामा-२ व चक गजरिया कैंसर संस्थान में सैकड़ों डॉक्टरों व कर्मचारियों की नियुक्तियां करने का आरोप है. उन्होंने अपने चहेते को छ: महीने में ही दो-दो प्रमोशन दी दिए थे. यही नहीं प्रो.रविकांत ने अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए मनमाने तरीके से एक विभाग से दूसरे विभाग में नियमविरुद्ध स्थानांतरण किये थे.

डॉ. रविकांत पर आरोप है कि कुलसचिव और उपकुलसचिव जैसे पदों पर अपने चहेते डाक्टरों की नियुक्तियां गैरकानूनी तरीके से कीं, यहाँ तक कि उपकुलसचिव का पद परिनियामावली के प्रावधान में ही न होने के बाद भी उस पर नियुक्ति कर दी.

आरोप हैं कि डॉ. रविकांत ने के.जी.एम.यू. अधिनियम व एम.सी.आई. रेगुलेशन की जमकर धज्जियां उडाई हैं. डॉक्टर रविकांत नियमविरुद्ध स्वयं मेडिकल काउंसिल के सदस्य बन गए, जबकि नियमानुसार मेडिकल काउन्सिल के सदस्य के लिए संकाय का सदस्य होना जरूरी है, जबकि डॉ. रविकांत की केजीएमयू में नियुक्ति पूर्णकालिक अधिकारी के रूप में हुई थी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1 × 3 =

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com