स्पीसिएशन तथा इवोल्यूशन में नॉन-कोडिंग आरएनए महत्चपूर्ण

आईआईटीआर के पीएचडी छात्रों को सम्बोधित करते प्रो. लखोटिया।

आईआईटीआर में पीएचडी छात्रों के साथ विज्ञान और लेखन कौशल पर नैतिकता के संदर्भ में चर्चा

लखनऊ। आजीवन प्रोफेसर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और आईएनएसएस के वरिष्ठ वैज्ञानिक साइटोजैनेटिक्स लैबोरेटरी, बीएचयू प्रो. सुभाष चंद्र लखोटिया ने यहां आईआईटीआर में

मंच पर उपस्थित डॉ सी.एस. नौटियाल, प्रोफेसर आलोक धवन, प्रोफेसर सुभाष लखोटिया, प्रोफेसर अनिल कुमार त्रिपाठी और डॉ डी कार चौधरी।

पीएचडी कर रहे छात्रों के साथ विज्ञान और लेखन कौशल में नैतिकता के संदर्भ में गहन चर्चा की।
डॉ लखोटिया को 16 जून को उत्तर प्रदेश अकेडमी ऑफ साइंस (यूपीएएस), भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) के स्थानीय अध्याय और भारत के नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इलाहाबाद (नासी) द्वारा आईआईटीआर में आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर आयोजित समारोह में प्रोफेसर आलोक धवन, निदेशक सीएसआईआर-आईआईटीआर और यूपीएएस के अध्यक्ष ने उनका स्वागत किया। उनके साथ ही
प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी, अध्यक्ष आईएनएसए, लखनऊ स्थानीय अध्याय और डॉ. सी.एस. नौटियाल, अध्यक्ष, नासी, लखनऊ स्थानीय अध्याय, ने भी समारोह में आने के लिए प्रोफेसर लखोटिया का स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर प्रो लखोटिया ने नॉन कोडिंग आरएनए वित सेंट्रल रोल इन सेल रेगुलेशन डिमिस्टीफाइ हेट्रोक्रोमैटिन पर एक प्रस्तुतीकरण दिया।
उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे नॉन-कोडिंग आरएनए प्रमुख सेलुलर फंक्शंस को मोडुलेट कर सकता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने  एचएसआर-ओमेगा, जो स्वयं में एक नॉन-कोडिंग जीन है, पर अपने काम के बारे में भी बताया।  उन्होने प्रकाश डाला कि कैसे अनुप्रवर्तनशील मॉडल ड्रोसोफिला मेलेनोगास्टर का उपयोग करते हुए एचएसआर-ओमेगा विभिन्न आरएनए बाध्यकारी प्रोटीन को मोडुलेट कर सकता है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि स्पीसिएशन तथा इवोल्यूशन में नॉन-कोडिंग आरएनए का बहुत महत्व है। समारोह के अंत में डॉ डी कार चौधरी, संयोजक एवं  मुख्य वैज्ञानिक, आईआईटीआर ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।
फोटो-1- मंच पर उपस्थित डॉ सी.एस. नौटियाल, प्रोफेसर आलोक धवन, प्रोफेसर सुभाष लखोटिया, प्रोफेसर अनिल कुमार त्रिपाठी और डॉ डी कार चौधरी।
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