-संगठनों के दो पदाधिकारियों योगेश उपाध्याय व मयंक प्रताप सिंह ने लिखा मिशन निदेशक को पत्र

सेहत टाइम्स
लखनऊ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों की वेतन नीति निर्धारण सहित अन्य मांगों को लेकर प्रमुख सचिव और अपर मिशन निदेशक एनएचएम के साथ हुई अलग-अलग बैठकों में बनी सहमति पर 30 कार्यदिवसों के भीतर ठोस कार्रवाई न हुई तो कर्मचारी संगठन पुन: अनिश्चितकालीन आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
इस आशय का एक ज्ञापन पत्र 16 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश के महामंत्री योगेश उपाध्याय और उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष मयंक प्रताप सिंह ने मिशन निदेशक उत्तर प्रदेश को लिखा है।
पत्र में लिखा है कि विभित्र NHM संविदा कर्मचारी संगठनों द्वारा अपनी नंवित एवं न्यायोचित मांगों के समाधान हेतु लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया गया। उक्त आंदोलन के क्रम में 12 अक्टूबर को प्रमुख सचिव के साथ संगठन के प्रतिनिधिमंडन की वार्ता हुई। इसके उपरांत 14 अक्टूबर को अपर मिशन निदेशक (AMID) के साथ तथा सायंकाल निदेशक की अध्यक्षता में पुनः बातचीत आयोजित हुई। तत्पश्चात 15 अक्टूबर कोनिदेशक के समक्ष प्रतिनिधिमंडल की वार्ता हुई।
वार्ता में संविदा कर्मचारियों की विभित्र समस्याओं पर सकारात्मक चर्चा हुई। वार्ता में संविदा कर्मचारियों के पुनः वेतन निर्धारण के लिए वेतन नीति कमेटी की कार्यवाही पूर्ण कर वेतन नीति लागू किए जाने सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति एवं आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन प्राप्त हुआ। संगठन अपेक्षा करता है कि वार्ता में बनी सहमति के अनुरूप इस प्रकरण में समयबद्ध एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
संगठन की ओर से मांग की गयी है कि वेतन नीति कमेटी की समस्त आवश्यक कार्यवाही 30 कार्यदिवस के भीतर पूर्ण कर सक्षम स्तर से अनुमोदन प्राप्त करते हुए वेतन नीति लागू करने हेतु आवश्यक आदेश जारी किए जाएं। साथ ही, इस संबंध में की जा रही कार्यवाही एवं निर्धारित समय-सीमा से संगठन को लिखित रूप से अवगत कराया जाए। विज्ञप्ति में कहा गया है कि संगठन स्पष्ट करना चाहता है कि वार्ता में बनी सहमति का समयबद्ध क्रियान्वयन कर्मचारियों के विश्वास एवं आंदोलन के सकारात्मक समाधान के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि 30 कार्यदिवस के भीतर वेतन नीति कमेटी की कार्यवाही पूर्ण कर वेतन नीति लागू करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही नहीं की जाती है, तो संगठन अपने संबैधानिक एवं नोकतांत्रिक अधिकारों के अंतर्गत पुनः आंदोलन प्रारम्भ करने के लिए बाध्य होगा।

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