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मानसिक बीमारी भी दूसरे रोगों की तरह, ठीक होना संभव

नेशनल यूनानी डॉक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने आयोजित की संगोष्ठी

लखनऊ। मानसिक बीमारी को भी अन्य बीमारियों की तरह समझें इसे अभिशाप न बनायें। जिस प्रकार किसी न किसी कमी की वजह से शरीर की अन्य बीमारियां होती हैं उसी प्रकार से मस्तिष्क में भी किसी प्रकार की कमी के कारण मानसिक बीमारी हो जाती है जो कि दवाओं से ठीक हो सकती है।
यह बात न्यूरोसाइक्यिाट्रिक विभाग एरा मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एम अलीम सिद्दीकी ने शनिवार को यहां नेशनल यूनानी डॉक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन नुडवा की एक दिवसीय संगोष्ठी में कही। संगोष्ठी का विषय बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य एवं मानसिक बीमारियों के बारे में आम सोच था।

चिकित्सकों को भी नहीं कहनी चाहिये ये बातें : डॉ अलीम

डॉ अलीम ने कहा कि मानसिक बीमारियों के रोगियों से कुछ बातें कहने से परहेज करना चाहिये। इन बातों में…सोचते ज्यादा हो, रिलेक्स रहा करो, …कुछ नहीं बस टेंशन है, …नौटंकी है, …सब कुछ तो है लाइफ में, …फिर क्यों डिप्रेशन है, …दवा नशीली होती है, …दवा की आदत पड़ जायेगी, …लिवर-किडनी खराब हो जायेगी। उन्होंने कहा कि ये बातें चिकित्सक भी कहते हैं, उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को भी ये बातें नहीं कहनी चाहिये।

बच्चों को प्यार और अनुशासन से पालें : डॉ शाजिया

इससे पहले कन्सल्टेंट साइकोलोजिस्ट डॉ शाजिया सिद्दीकी ने कहा कि हर बच्चे को प्यार और अनुशासन से पाला जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि बच्चों का गलत व्यवहार चीखकर और उसे मारपीट कर नहीं सुधारा जा सकता बल्कि बच्चों के साथ प्यार दिखाना चाहिये। उन्होंने कहा कि जिस नियम का पालन कराने के लिए बच्चों से कहें उसका खुद भी पालन करना चाहिये। उन्होंने कहा कि बार-बार अगर जिद करके बच्चा अपनी जिद पूरी करवा लेता है तो इसमें गलती बच्चे की नहीं, बड़ों की है। बच्चों को सही परवरिश देने के लिए उन पर ध्यान दें, समझाइये, घर का माहौल सही रखिये, उनकी गलतियों को टोकने के बजाय सही करें।

सबके सामने जलील न करें बच्चों को

उन्होंने बताया कि पढ़ाई-लिखाई को लेकर अगर उनकी गलतियां हैं तो उसे सबके सामने जलील न करें उसको सही तरीका बतायें। उन्होंने बताया कि अगर किसी काम को करने में बच्चा आनाकानी करता है तो उसे इनाम देकर उनसे काम करायें जैसे ये कर लो तो फिर यह मिलेगा। यही नहीं कभी-कभी उनकी प्यारी चीज अपने पास रख लें फिर काम करने के बाद ही उसे वापस दें। उन्होंने बताया कि टेलीविजन, फोन, टैबलेट्स उन्हें सिर्फ निर्धारित समय के लिए ही दें। यह पूछने पर कि सुबह बच्चा समय पर नहीं उठता है तो इसके लिए उन्होंने कहा कि यदि बच्चा दिन में सो लेता है तो 10.30 तक और अगर दोपहर में नहीं सोया है तो 9 बजे तक बच्चे को जरूर सुला दें।

व्यायाम करें, स्वस्थ रहें : डॉ मोइद

नुडवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मोइद ने कहा कि आजकल की भागदौड़ की जिन्दगी में अपने आपको रिलेक्स रखें और रोज व्यायाम करें जिससे आपका स्वास्थ्य ठीक रहे, मानसिक रोग से मुक्त रहे। नुडवा के लखनऊ चैप्टर के अध्यक्ष डॉ राशिद इकबाल ने कहा कि आजकल लगभग हर व्यक्ति तनाव के दौर से गुजर रहा है यह तनाव कभी-कभी डिपे्रशन में बदल जाता है। महासचिव डॉ सै.नाजिर अब्बास ने कहा कि हम तनाव की स्थिति में होते हुए भी डॉक्टर से सलाह लेने में संकोच करते हैं और बीमारी को बढ़ावा देते हैं। लोगों में यह गलत धारणा बन गयी है कि डॉक्टर की सलाह लेने में रिश्तेदार और साथी क्या सोचेंगे। उन्होंने आये हुए सभी अतिथियों का धन्यवाद किया। इस संगोष्ठी में डॉ अशरफ, डॉ अलाउद्दीन, डॉ निहाल, डॉ रईस, डॉ अतीक अहमद, डॉ सबीहा मोईद, डॉ रूशी नाज, डॉ सलमान खालिद, डॉ मुज्तबा उसमानी, डॉ आसिफ अली, डॉॅ अहमद रजा, डॉ सैफ प्रमुख रूप से उपस्थित रहेे।

 

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