बाहों, कन्धों, पीठ में दर्द का कारण कहीं यह वजह तो नहीं ?

सेशेल्स गणराज्य में भारतीय शल्य चिकित्सक कर रहे ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी

लखनऊ. यह सुनने में आपको भले ही अजीब लगे लेकिन यह सच है कि बाहों, कंधों और पीठ के दर्द की समस्या का एक बड़ा कारण भारी स्तन का होना भी है. लेकिन चिंता की बात नहीं है, इसे ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी से दूर किया जा सकता है.

वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डॉ वैभव खन्ना ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कई महिलाएं स्तनों के अत्यधिक वजन के लक्षणों से उत्पन्न पीड़ाओं से ग्रसित होती हैं, इनमें गर्दन और पीठ के दर्द के अलावा शरीर के विभिन्न भागों में भी दर्द की समस्या हो सकती है. डॉक्टर खन्ना आजकल सेशेल्स गणराज्य में 20 मार्च से 27 मार्च तक चल रहे ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी शिविर में भाग लेने गए हुए हैं, उनके नेतृत्व में गए दल में प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर रोमेश कोहली व दंत शल्य चिकित्सक डॉ एस पी एस तुलसी भी शामिल हैं.  सेशेल्स गणराज्य में वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से जीवन ज्योति फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित निशुल्क शिविर में ऐसी ही दर्द से पीड़ित महिलाओं का उपचार शल्य चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है.

डॉ वैभव खन्ना

डॉक्टर खन्ना के अनुसार इस शिविर में 19 ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी यानी स्तन न्यूनन सर्जरी होनी है. उन्होंने बताया स्तन कम करने की सर्जरी एक अत्यंत प्रभावी उपचार है क्योंकि लक्षणों के कारण इसका सीधे तौर पर सरोकार है. उन्होंने बताया ज्यादातर महिलाएं ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी के परिणामों से बेहद संतुष्ट हैं. डॉ. खन्ना ने बताया कि सर्जरी के उपरांत स्तनों के छोटे, हलके एवं मजबूत होने से रोगी को पीठ गर्दन आदि के दर्द से निजात मिल जाती है उन्होंने बताया कि एक निश्चित समय के बाद सर्जरी के निशान और धब्बे भी दूर हो जाते हैं.

 

 

शिविर में एलिजाबेथ लाफोर्टयून नामक महिला को पिछले 8 सालों से शारीरिक दर्द हो रहा था, उसने 22 मार्च को इस शिविर में निशुल्क स्तन नियोजन सर्जरी की सेवा का लाभ उठाया. एलिजाबेथ के अनुसार लंबे समय से इस दर्द से जूझ रही थी और अब काफी हल्का महसूस कर रही हैं. ज्ञात हो डॉ खन्ना राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित हेल्थ सिटी हॉस्पिटल के संस्थापक निदेशक हैं तथा कटे होंठ व तालू का निशुल्क ऑपरेशन कराने वाली अमेरिकन संस्था स्माइल ट्रेन के परियोजना निदेशक भी हैं. आपको बता दें भारतीय चिकित्सकों के दल द्वारा शिविर में किए जा रहे शल्य चिकित्सा की सराहना  सेशेल्स गणराज्य के अख़बारों में भी हो रही है.