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रिसर्च को बनायें अपना लक्ष्‍य,  नयी ऊंचाइयों पर पहुंचायेगी : डॉ गिरीश गुप्‍ता

-पटना स्थित जीडी मेमोरियल होम्‍योपैथिक मेडिकल कॉलेज में सीएमई आयोजित

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ/पटना। होम्‍योपैथिक पद्धति से उपचार करने के लिए आप द्वारा चुना गया रास्‍ता आपको सफलता की कितनी ऊंचाई पर ले जा सकता है यह पूरी तरह से आपके हाथ में है, क्‍योंकि यह आप पर निर्भर है कि आप उसके प्रति कितने समर्पित हैं। किसी भी चीज के प्रति समर्पण तभी आता है जब आप अपना लक्ष्‍य निर्धारित करते हैं, मेरी आपको यह सलाह है कि रिसर्च को अपना लक्ष्‍य बनायें, आपके द्वारा की गयी रिसर्च न सिर्फ आपको ऊंचाई पर ले जायेगी बल्कि आमजन को अपेक्षाकृत बहुत कम खर्च में अनेक जटिल रोगों से छुटकारा दिलाने में भी सहायक होगी।

यह उद्गार गौरांग क्‍लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्‍योपैथिक रिसर्च (जीसीसीएचआर) के संस्‍थापक व चीफ कन्‍सल्‍टेंट डॉ गिरीश गुप्‍ता ने बिहार की राजधानी पटना के जीडी मेमोरियल होम्‍योपैथिक मेडिकल कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय (30 व 31 जनवरी) सीएमई (सतत चिकित्‍सा शिक्षा) के प्रथम दिन एमडी के छात्रों को सम्‍बोधित करते हुए व्‍यक्‍त किये। मंच पर जीडी मेमोरियल होम्‍योपैथिक मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन व लम्‍बी अवधि तक सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्‍योपैथी के प्रे‍सीडेंट रहे डॉ रामजी सिंह की उपस्थिति के बीच डॉ गिरीश ने स्‍टूडेंट्स को अपने द्वारा की गयी एक्‍सपेरिमेंटल रिसर्च के बारे में बताते हुए कहा कि यह एक संयोग था कि मैंने अपने बीएचएमएस शिक्षा के दौरान चौथे साल में रिसर्च के क्षेत्र के अपने कदम बढ़ा दिये थे।

उन्‍होंने कहा कि दरअसल उन्‍हें केजीएमसी के एक नामचीन चिकित्‍सक की अखबार में दी गयी टिप्‍पणी चुभ गयी थी, उन्‍होंने होम्‍योपैथी को प्‍लेसिबो थेरेपी, एक्‍वा थेरेपी और साइको थेरेपी की संज्ञा दी थी। यहां तक कि उन चिकित्‍सक ने यह भी कह दिया था कि एक चुटकी साधारण नमक अगर हरिद्वार में गंगाजी में डाला जाये तो वह कानपुर पहुंचकर 30 पोटेंसी और इलाहाबाद में 200 पोटेंसी हो जायेगा। डॉ गिरीश ने बताया कि इस टिप्‍पणी को पढ़ कर उन्‍होंने यह निर्णय लिया था कि जब तक होम्‍योपैथिक दवाओं की वैज्ञानिकता नहीं सिद्ध कर दूंगा तब तक चैन से नहीं बैठूंगा। डॉ गुप्‍ता ने कहा कि इसके बाद मेरी राह में अनेक बाधाएं आयीं लेकिन मैं अपने लक्ष्‍य से नहीं डिगा और सबसे पहले मैंने होम्‍योपैथिक दवाओं का असर पेड़-पौधों पर साबित करने के बारे में फैसला लिया क्‍योंकि पेड़-पौधों में नर्वस सिस्‍टम नहीं होता है, इसे भारत सरकार के नेशनल बॉटीनिकल रिसर्च इंस्‍टीट्यूट (एनबीआरआई) की लैब में वहां के वैज्ञानिकों की निगरानी में सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्‍होंने क‍हा कि मुझे खुशी है कि जो लोग होम्‍योपैथिक दवाओं की प्रामाणिकता पर उंगली उठाते थे उन्‍हें मेरे द्वारा की गयीं सफल रिसर्च से जवाब मिल चुका है।

सीएमई के दूसरे दिन स्‍टूडेंट्स ने रिसर्च को लेकर अनेक प्रकार के प्रश्‍न पूछे जिसका जवाब डॉ गिरीश गुप्‍ता ने बड़े ही आसान शब्‍दों में दिया। डॉ गुप्‍ता ने बताया कि उनके द्वारा जो भी एक्‍सपेंरिंटल रिसर्च की गयी हैं उनका जिक्र उन्‍होंने अपनी लिखी हुई किताब Experimental Homoeopathy में किया है। उन्‍होंने छात्रों को बताया कि रिसर्च करने के लिए किस प्रकार तैयारी करनी पड़ती है, कैसे डॉक्‍यूमेंटेशन करना होता है, उपचार के दौरान किस प्रकार मरीज की हिस्‍ट्री ली जाती है, जैसी अनेक छोटी-बड़ी जानकारियां उन्‍होंने स्‍टूडेंट्स को दीं। डॉ रामजी सिंह ने डॉ गिरीश गुप्‍ता के सारगर्भित सम्‍बोधन की सराहना करते हुए उपस्थित छात्रों का आह्वान किया कि वे रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ें, मेडिकल कॉलेज उनका पूरा साथ देगा। अंत में कॉलेज के ऊर्जावान प्राचार्य डॉ यूके वर्मा ने सभी को धन्‍यवाद ज्ञापित करते हुए फोटो सेशन आयोजित किया।