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ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ प्रस्‍तावित हल्‍लाबोल का विरोध करेगी लखनऊ केमिस्‍ट एसोसिएशन

-15 फरवरी को केंद्रीय इकाई के प्रस्‍तावित आह्वान को ड्रामा करार दिया

-हल्‍ला बोल की आड़ लेकर स्‍वार्थसिद्ध करने में साथ नहीं देगी एसोसिएशन

अध्‍यक्ष सुरेश कुमार व महामंत्री हरीश साह

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन लखनऊ ने अपनी केंद्रीय इकाई एआईओसीडी पर जोरदार हमला बोलते हुए एआईओसीडी द्वारा आगामी 15 फरवरी को ऑनलाइन दवा व्यापार के खिलाफ प्रस्‍तावित हल्ला बोल अभियान का विरोध करने का फैसला लिया है। एसोसिएशन ने हल्ला बोल कार्यक्रम को ड्रामा बताया है। एसोसिएशन के अध्‍यक्ष सुरेश कुमार का कहना है कि ड्रग एंड कॉस्‍मेटिक एक्‍ट में दवा की बिक्री ऑनलाइन किये जाने का प्रावधान नहीं है, इसके साथ ही रिटेल दवा बि‍क्री का लाइसेंस लेने के लिए भी फार्मासिस्‍ट की अनिवार्यता है, यह अनिवार्यता इसलिए है ताकि फार्मासिस्‍ट दवा की बिक्री के समय दवा के डोज के बारे में जानकारी दे सके, ऐसे में ऑनलाइन दवा की बिक्री में फार्मासिस्‍ट की अनिवार्यता भी पूरी नहीं होती है। सुरेश कुमार ने कहा कि अगर ऑनलाइन दवा बिक्री करनी ही है तो एक्‍ट में संशोधन होने के बाद ही ऐसा हो सकता है।   

प्रवक्ताद्वय विकास रस्तोगी व मयंक रस्तोगी द्वारा जारी प्रेस नोट में देते हुए कहा गया है कि हल्ला बोल का विरोध करने का यह फैसला जिला इकाई के अध्यक्ष सुरेश कुमार की अध्यक्षता में 8 फरवरी को जिमखाना क्लब में हुई बैठक में लिया गया है। बैठक में व्यापारियों का कहना था कि हल्ला बोल सिर्फ एक ड्रामा है और यह बड़ी-बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों को ब्लैकमेल करने की योजना है। उनका कहना है कि अगर एआईओसीडी में दम है तो केंद्र सरकार के खिलाफ सही और कड़े फैसले लेकर अनिश्चितकालीन भारत बंद करने की घोषणा करते हुए समस्या का समाधान करवाए।

बैठक में कहा गया कि एआईओसीडी के मूल उद्देश्यों को छोड़कर लिमिटेड कंपनी बनाकर दवा व्यापारियों का करोड़ों अरबों रुपया हजम करने वाले इसके पदाधिकारी और उनके गुर्गों के खिलाफ हल्ला बोलने की जरूरत है। बैठक में कहा गया कि एआईओसीडी के अध्यक्ष जे शिंदे का यह कहना कि ऑनलाइन दवा कंपनियों की तरह वे भी ग्राहकों को 25 से 30% की छूट देंगे, लेकिन ऐसा किसी भी तरह से संभव नहीं है क्योंकि भारत सरकार द्वारा दवा व्यवसाय के लिए जो रिटेल मार्जिन रखा गया है, वहीं 20% से कम है, ऐसे में यह बयान झूठा और दवा विक्रेताओं को बरगलाने वाला है। बैठक में कहा गया कि हल्‍ला बोल का ड्रामा करने वाले वही लोग हैं जो खुद ऑनलाइन दवा व्यापार करने की योजना बना रहे हैं।

बैठक में महामंत्री हरीश साह ने कहा कि सबसे पहले केंद्र सरकार से दवा नीति और दवा व्यवसायी के मार्जिन पर बात होनी चाहिए तथा दवा कानून में मार्जिन की नियत से दवा व्यवसाय को मुक्त कराने का प्रयास किया जाना चाहिए जिससे दवा व्यवसायी कम्‍पनी से खुद अपना मार्जिन तय कर सकें। बैठक में कहा गया कि अगर ऐसा करना संभव नहीं है तो दवा कानून में निर्धारित किया जाने वाला मार्जिन कम से कम इतना हो कि दवा विक्रेता ऑनलाइन दवा खरीद में दी जाने वाली  छूट का मुकाबला करने के साथ-साथ अपने परिवार का भरण पोषण भी कर सके।

बैठक में एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि वर्ष 2008 में एआईओसीडी ने एआईओसीडी लिमिटेड के नाम से कंपनी बनाई और उसकी एक सहायक कंपनी एआईओसीडी फार्मा अवाक्स भी बनायी गयी थी, करोड़ों रुपए राज्‍य इकाइयों से एकत्र किए गए थे सदस्यों से पैसा लेकर उन्हें बड़े-बड़े सपने दिखाए गये, बाद में एआईओसीडी फार्मा अवाक्‍स को सौ करोड़ से ज्‍यादा राशि में बेचकर उसका पैसा भी हजम कर लिया गया इस पर जेएस शिंदे मौन हैं, इसका जवाब देश के दवा व्यापारियों को देना चाहिए।

इस बैठक में रचित रस्तोगी, अमित तिवारी, अशोक भार्गव, अमित अग्रवाल, संजीव अग्रवाल, अभिषेक रस्तोगी, अंशुल रस्तोगी, मोहम्मद सलीम, सिद्धार्थ सक्सेना, अनिल उपाध्याय, मधुप रस्तोगी, अंकित रस्तोगी, मनीष रस्तोगी, मोहित रस्तोगी, अजय जैसवाल, संदीप जैसवाल, पंकज अग्रवाल, अमित गुप्ता, राजीव वर्मा, अवनीश दुबे, गुरदीप सिंह, सत्यम रस्तोगी, मनीष खन्ना, गोपाल टंडन, जीवन भागचंदानी, वीके ढींगरा, विनोद आसवानी, रितेश रस्तोगी, गोविंद गुप्ता सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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